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स्वाइन फ्लू की अधूरी तैयारी: संक्रमण का खतरा, जांच की व्यवस्था बेदम
Wed, 02 Sep 2026 12:07 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Wed, 02 Sep 2026 12:07 AM IST
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जिला अस्पताल की ओपीडी में बिना मास्क मरीज देखते डॉक्टर। संवाद
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औरैया। राजधानी लखनऊ सहित अन्य शहरों में स्वाइन फ्लू के मरीज तेजी से सामने आ रहे हैं। इस फ्लू के इलाज और पहचान के लिए शासन ने अलर्ट जारी किया है। इसके बावजूद मंगलवार को औरैया के मेडिकल कॉलेज, सीएचसी, पीएचसी और जिला अस्पतालों में कोई व्यवस्था नहीं दिखी। सोमवार से अलग ओपीडी शुरू करने के निर्देशों का भी पालन नहीं हुआ। अधूरी तैयारियों के बीच जांच व्यवस्था पूरी तरह से बेदम नजर आई।
जिला अस्पताल में मरीजों की स्क्रीनिंग नहीं की जा रही थी। फिजिशियन के कमरे के बाहर दोपहर 12:36 बजे मरीजों की भारी भीड़ लगी थी। जल्द दिखाने की होड़ में मरीज एक-दूसरे को धक्का देते दिखाई दे रहे थे। प्रवेश द्वार से अस्पताल के अंदर तक स्वाइन फ्लू के लिए कोई अलग डेस्क नहीं बनाई गई थी। मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में भी पूरी तरह से अव्यवस्था का आलम था। तेज बुखार और दस्त की शिकायत वाले मरीज एक-दूसरे से चिपक कर खड़े थे।
यहां भी शासन के निर्देशों का पालन नहीं हो रहा था। अजीतमल, सहार, अयाना, बिधूना सहित अन्य सीएचसी व पीएचसी का भी यही हाल रहा। यदि बुखार पीड़ित मरीजों की स्क्रीनिंग नहीं कराई गई तो फ्लू कैसे सामने आएगा और उन्हें इलाज कैसे मिलेगा। इस सवाल का अधिकारियों के पास कोई जवाब नहीं है। उनकी पूरी दौड़ केवल कागजों में ही दिख रही है।
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जिला अस्पताल में स्वाइन फ्लू की जांच के लिए आरटीपीसीआर मशीन पिछले दो साल से खराब पड़ी है। यह वही मशीन है जिससे कोरोना काल में कोविड की जांच होती थी। अब जब स्वाइन फ्लू के मामले आने की हलचल शुरू हुई है, अधिकारी इंजीनियरों की तलाश कर रहे हैं। जांच के अभाव में स्वाइन फ्लू के रोगी सामने नहीं आ पा रहे हैं। शासन से अलर्ट जारी होने के बाद भी जिला स्तर पर इंतजाम नाकाफी हैं। चिकित्सालयों में महज आइसोलेशन वार्ड बनाकर खानापूर्ति की गई है।
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इन लक्षण वाले मरीजों की होनी थी स्क्रीनिंग
गाइडलाइन के अनुसार स्वाइन फ्लू के संभावित लक्षणों में तेज बुखार, नाक बहना, खांसी, गले में खरास, सर दर्द, बदन दर्द, ठंड लगना व आंखों में लालिमा होना है। छींक और खांसी के साथ यह वायरस पड़ोसी को भी फैल सकता है। ऐसे मरीजों की स्क्रीनिंग कराई जानी थी। इसके अलावा मास्क लगाने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, आइसोलेशन व ए व बी कैटेगरी के अनुसार वैक्सीनेशन भी अहम बताया गया है।
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विशेष स्थिति में सूचना देकर छुट्टी पर जाने के निर्देश
स्वाइन फ्लू को लेकर शासन से जारी हुई गाइडलाइन में अस्पताल के अधीक्षकों को लेकर विशेष निर्देश दिए गए हैं। इसमें अधीक्षकों को विषम परिस्थिति में ही छुट्टी लेने को कहा गया है। साथ ही उच्चाधिकारियों को अवगत कराने को कहा गया है। ताकि स्वास्थ्य सेवाओं में किसी तरह की अव्यवस्था न हो सके।
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वर्जन--
खांसी, जुकाम और बुखार के मरीजों के लिए अलग से ओपीडी की तैयारी बनाई जा रही है। मरीजों की स्क्रीनिंग को लेकर माइक्रोबायोलॉजी डिपार्टमेंट के साथ संवाद किया जाएगा। आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है। फिलहाल संभावित लक्षण के मरीज सामने नहीं आए हैं।
-डॉ. मनोज कुमार मेघवानी, नोडल अधिकारी मेडिकल कॉलेज
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स्वाइन फ्लू को लेकर सभी चिकित्सालयों में अलग से डेस्क बनाने व स्क्रीनिंग करने के निर्देश हैं। आरटीपीसीआर मशीन को ठीक कराने के लिए इंजीनियर को बुलाया गया है।
- डॉ. मनोज कुमार, डिप्टी सीएमओ
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जिला अस्पताल में मरीजों की स्क्रीनिंग नहीं की जा रही थी। फिजिशियन के कमरे के बाहर दोपहर 12:36 बजे मरीजों की भारी भीड़ लगी थी। जल्द दिखाने की होड़ में मरीज एक-दूसरे को धक्का देते दिखाई दे रहे थे। प्रवेश द्वार से अस्पताल के अंदर तक स्वाइन फ्लू के लिए कोई अलग डेस्क नहीं बनाई गई थी। मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में भी पूरी तरह से अव्यवस्था का आलम था। तेज बुखार और दस्त की शिकायत वाले मरीज एक-दूसरे से चिपक कर खड़े थे।
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यहां भी शासन के निर्देशों का पालन नहीं हो रहा था। अजीतमल, सहार, अयाना, बिधूना सहित अन्य सीएचसी व पीएचसी का भी यही हाल रहा। यदि बुखार पीड़ित मरीजों की स्क्रीनिंग नहीं कराई गई तो फ्लू कैसे सामने आएगा और उन्हें इलाज कैसे मिलेगा। इस सवाल का अधिकारियों के पास कोई जवाब नहीं है। उनकी पूरी दौड़ केवल कागजों में ही दिख रही है।
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जिला अस्पताल में स्वाइन फ्लू की जांच के लिए आरटीपीसीआर मशीन पिछले दो साल से खराब पड़ी है। यह वही मशीन है जिससे कोरोना काल में कोविड की जांच होती थी। अब जब स्वाइन फ्लू के मामले आने की हलचल शुरू हुई है, अधिकारी इंजीनियरों की तलाश कर रहे हैं। जांच के अभाव में स्वाइन फ्लू के रोगी सामने नहीं आ पा रहे हैं। शासन से अलर्ट जारी होने के बाद भी जिला स्तर पर इंतजाम नाकाफी हैं। चिकित्सालयों में महज आइसोलेशन वार्ड बनाकर खानापूर्ति की गई है।
इन लक्षण वाले मरीजों की होनी थी स्क्रीनिंग
गाइडलाइन के अनुसार स्वाइन फ्लू के संभावित लक्षणों में तेज बुखार, नाक बहना, खांसी, गले में खरास, सर दर्द, बदन दर्द, ठंड लगना व आंखों में लालिमा होना है। छींक और खांसी के साथ यह वायरस पड़ोसी को भी फैल सकता है। ऐसे मरीजों की स्क्रीनिंग कराई जानी थी। इसके अलावा मास्क लगाने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, आइसोलेशन व ए व बी कैटेगरी के अनुसार वैक्सीनेशन भी अहम बताया गया है।
विशेष स्थिति में सूचना देकर छुट्टी पर जाने के निर्देश
स्वाइन फ्लू को लेकर शासन से जारी हुई गाइडलाइन में अस्पताल के अधीक्षकों को लेकर विशेष निर्देश दिए गए हैं। इसमें अधीक्षकों को विषम परिस्थिति में ही छुट्टी लेने को कहा गया है। साथ ही उच्चाधिकारियों को अवगत कराने को कहा गया है। ताकि स्वास्थ्य सेवाओं में किसी तरह की अव्यवस्था न हो सके।
वर्जन
खांसी, जुकाम और बुखार के मरीजों के लिए अलग से ओपीडी की तैयारी बनाई जा रही है। मरीजों की स्क्रीनिंग को लेकर माइक्रोबायोलॉजी डिपार्टमेंट के साथ संवाद किया जाएगा। आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है। फिलहाल संभावित लक्षण के मरीज सामने नहीं आए हैं।
-डॉ. मनोज कुमार मेघवानी, नोडल अधिकारी मेडिकल कॉलेज
स्वाइन फ्लू को लेकर सभी चिकित्सालयों में अलग से डेस्क बनाने व स्क्रीनिंग करने के निर्देश हैं। आरटीपीसीआर मशीन को ठीक कराने के लिए इंजीनियर को बुलाया गया है।
- डॉ. मनोज कुमार, डिप्टी सीएमओ

जिला अस्पताल की ओपीडी में बिना मास्क मरीज देखते डॉक्टर। संवाद

जिला अस्पताल की ओपीडी में बिना मास्क मरीज देखते डॉक्टर। संवाद