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उद्घाटन के इंतजार में बिधूना बस स्टैंड
Auraiya
Updated Sun, 18 Nov 2012 12:00 PM IST
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बिधूना(औरैया)। बिधूना में 60 लाख की लागत से बना रोडवेज बस स्टैंड पिछले सात साल से उद्घाटन की वाट जोह रहा है। बस स्टेशन शुरू नल होने से क्षेत्रीय लोगों को आवागमन में काफी दिक्कतें उठानी पड़ रहीं हैं। स्थानीय बाशिंदों ने शनिवार को विभागीय अधिकारियों को ज्ञापन देकर बस अड्डा शुरू करवाने की मांग की है।
ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 2005 में तत्कालीन सपा सरकार के कार्यकाल में क्षेत्रीय जनता की मांग पर बिधूना कस्बे में 60 लाख की लागत से परिवाहन निगम ने बस स्टेशन का निर्माण कराया था। सपा सरकार के सत्ता से हटने और बसपा के सरकार बनाने पर नवनिर्मित बस स्टेशन के उद्घाटन के लिए क्षेत्रीय लोगों ने काफी गुहार लगाई। लगभग 4 बार उद्घाटन की तिथियां भी घोषित कर दी गईं। लेकिन एक भी बार उद्घाटनकर्ता के न आने से उद्घाटन की उम्मीदों पर पानी फिरता रहा। दोबारा सत्ता पर काबिज हुई सपा सरकार में क्षेत्रीय जनता को इस बस स्टेशन के उद्घाटन की फिर उम्मीद बंधी। शासन और परिवहन निगम के अधिकारियों की उदासीनता से लोगों के अरमानों पर अब तक पानी फिरा है। बस स्टेशन के शुभारंभ न कराए जाने से बिधूना से कन्नौज, जालौन, मैनपुरी, भिंड, ग्वालियर, मथुरा, फरुखाबाद, बेबर, लखनऊ, हरदोई, रायबरेली, इलाहाबाद, अलीगढ़, बरेली आदि विभिन्न शहरों के लिए रोडवेज बसों के अभाव में प्राइवेट बसों में लोगों को सफर करना पड़ता है।
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ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 2005 में तत्कालीन सपा सरकार के कार्यकाल में क्षेत्रीय जनता की मांग पर बिधूना कस्बे में 60 लाख की लागत से परिवाहन निगम ने बस स्टेशन का निर्माण कराया था। सपा सरकार के सत्ता से हटने और बसपा के सरकार बनाने पर नवनिर्मित बस स्टेशन के उद्घाटन के लिए क्षेत्रीय लोगों ने काफी गुहार लगाई। लगभग 4 बार उद्घाटन की तिथियां भी घोषित कर दी गईं। लेकिन एक भी बार उद्घाटनकर्ता के न आने से उद्घाटन की उम्मीदों पर पानी फिरता रहा। दोबारा सत्ता पर काबिज हुई सपा सरकार में क्षेत्रीय जनता को इस बस स्टेशन के उद्घाटन की फिर उम्मीद बंधी। शासन और परिवहन निगम के अधिकारियों की उदासीनता से लोगों के अरमानों पर अब तक पानी फिरा है। बस स्टेशन के शुभारंभ न कराए जाने से बिधूना से कन्नौज, जालौन, मैनपुरी, भिंड, ग्वालियर, मथुरा, फरुखाबाद, बेबर, लखनऊ, हरदोई, रायबरेली, इलाहाबाद, अलीगढ़, बरेली आदि विभिन्न शहरों के लिए रोडवेज बसों के अभाव में प्राइवेट बसों में लोगों को सफर करना पड़ता है।
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