एपल मैनेजर हत्याकांड: दोषी सिपाही प्रशांत चौधरी को दस साल की सजा, पत्नी कल्पना फैसले से नहीं थी संतुष्ट
लखनऊ में वर्ष 2018 के एपल मैनेजर विवेक तिवारी हत्याकांड में अदालत ने पूर्व सिपाही प्रशांत चौधरी को गैर-इरादतन हत्या का दोषी मानते हुए दस साल की सजा सुनाई। दूसरे आरोपी संदीप कुमार को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया। विवेक की पत्नी ने फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट जाने की बात कही।
विस्तार
एपल कंपनी के एरिया मैनेजर की गोली मारकर हत्या के मामले में सत्र न्यायाधीश मलखान सिंह ने सोमवार को दोषी प्रशांत चौधरी को 10 साल की सजा सुनाई। प्रशांत को 20 हजार रुपये के जुर्माने से भी दंडित किया गया है। कोर्ट ने बृहस्पतिवार को प्रशांत को गैर इरादतन हत्या का दोषी ठहराया था। इस मामले में दूसरे आरोपी संदीप को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया था। सजा के प्रश्न पर सुनवाई के लिए सोमवार को प्रशांत चौधरी को कोर्ट ने जेल से तलब किया था।
इस मामले में विवेक की पत्नी कल्पना ने गोमतीनगर थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। एफआईआर के मुताबिक 29 सितंबर 2018 को रात्रि करीब 1:40 बजे विवेक तिवारी अपनी सहकर्मी सना खान घर छोड़ने जा रहे थे। इसी दौरान उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण निगम गोमती नगर विस्तार के पास मुख्य सड़क पर आरोपी कांस्टेबल प्रशांत चौधरी ने लाइसेंसी पिस्टल से विवेक तिवारी को गोली मार दी थी। प्रशांत के साथ उसका साथी सिपाही संदीप कुमार भी मौजूद था, जिसने डंडे से सना खान को मारा।
यही नहीं, गाड़ी के बोनट पर भी डंडे मारे। विवेक तिवारी को राम मनोहर लोहिया अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई। इस मामले में पहली एफआईआर सना खान ने गोमती नगर थाने में सुबह करीब 5:00 बजे दर्ज कराई थी। वहीं, शाम सात बजे कल्पना तिवारी ने दूसरी एफआईआर कांस्टेबल प्रशांत चौधरी एवं संदीप कुमार के खिलाफ दर्ज कराई थी। इसमें कहा गया है कि घटना के समय दोनों पुलिसकर्मी नेम प्लेट लगाए हुए थे। प्रशांत चौधरी ने फायर किया था और संदीप कुमार उनके साथ थे।
जिन्होंने हत्या जैसा कृत्य करने से मना नहीं किया और गाड़ी के बोनट को पीट रहे थे। इस मामले की विवेचना प्रभारी कोतवाली महानगर विकास पांडेय को सौंपी गई। कल्पना तिवारी ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट कहा था कि घटना के बाद सना खान से पुलिस वालों ने दबाव डालकर बोल-बोल कर तहरीर लिखवाई और हस्ताक्षर ले लिए थे। लिहाजा, इस तहरीर को पूर्व में लिखी गई रिपोर्ट में शामिल कर विवेचना की जाए।
लगातार चली गवाही से आया फैसला
अभियोजन की ओर से सबसे पहले घटना की चश्मदीद सना की गवाही हुई। सना को चार अप्रैल 2019 को अदालत के समक्ष गवाही के लिए पेश किया गया। सना की गवाही चार अप्रैल 2019 से 24 अक्तूबर 2019 तक चली। इसके बाद कल्पना तिवारी को दो नवंबर 2019 को गवाही के लिए बुलाया गया।
कल्पना ने लगातार तीन नवंबर, 14 नवंबर और 15 नवंबर को गवाही दी। इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करने वाले हेड कांस्टेबल राजेश कुमार को 28 नवंबर 2019 को पेश किया गया। इसके बाद छह जनवरी 2020 को शव का पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव कोर्ट में पेश हुए।
मजिस्टिरियल जांच करने वाले मजिस्ट्रेट ने भी दिया था बयान
11 फरवरी 2020 को झांसी में नियुक्त तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट सलिल कुमार पटेल का बयान भी दर्ज किया गया। इसके बाद उन्हें 13 मार्च 2020 को भी बयान के लिए बुलाया गया। सिटी मजिस्ट्रेट का बयान दर्ज करने के बाद सना का बयान लेने वाले डॉक्टर राम प्रकाश द्विवेदी को पेश हुए, जिनकी गवाही 21 जनवरी 2021 एवं 23 सितंबर 2021 को हुई।
पत्रावली के अनुसार इसी क्रम में आयोजन साक्षी के रूप में पंचायत नामा करने वाले उप निरीक्षक कौशल कुमार तिवारी को भी पेश किया गया। इन्होंने पंचायत नामा तैयार किया था। अंतिम साक्षी विवेचक व तत्कालीन थानाध्यक्ष महानगर विकास कुमार पांडे को पेश किया गया।
इनकी गवाही और बचाव पक्ष की लंबी जिरह के कारण दो फरवरी 2024 से 19 अक्तूबर 2024 तक हुई। अभियोजन साक्ष्य समाप्त होने के बाद दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 313 के तहत दोनों आरोपियों का कोर्ट ने 26 नवंबर 2024 को विस्तृत बयान दर्ज किए।