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ट्रंप से भिड़े सीएनएन समेत तीन मीडिया संस्थान: व्हाइट हाउस में एंट्री बैन के खिलाफ पहुंचे कोर्ट, क्या विवाद?

Mon, 21 Sep 2026 05:41 PM IST
राहुल कुमार अमर उजाला नेटवर्क, वाशिंगटन।
अमर उजाला नेटवर्क, वाशिंगटन। Published by: राहुल कुमार Updated Mon, 21 Sep 2026 05:41 PM IST
सार

सीएनएन, एमएस नाउ और पोलिटिको ने सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के खिलाफ मुकदमा दायर किया। यह मामला व्हाइट हाउस द्वारा तीनों समाचार संगठनों के पत्रकारों की प्रेस मान्यता अचानक रद्द किए जाने के बाद सामने आया है। जानें क्या है पूरा मामला...

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CNN, MS NOW and Politico file lawsuit against US President Trump administration over White House access ban
ट्रंप बनाम मीडिया - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन और देश के तीन बड़े मीडिया संस्थानों के बीच टकराव अब अदालत तक पहुंचने जा रहा है। सीएनएन, एमएस नाउ और पोलिटिको ने व्हाइट हाउस में अपने पत्रकारों की पहुंच रोके जाने के खिलाफ संघीय अदालत का दरवाजा खटखटाया है। तीनों संस्थानों का कहना है कि पत्रकारों की मान्यता और व्हाइट हाउस में प्रवेश उनकी खबरों और संपादकीय कवरेज से नाराजगी के कारण रोका गया है। मीडिया संस्थानों ने संयुक्त बयान में कहा कि उन्होंने अमेरिकी सरकार को मुकदमा दायर करने की सूचना दे दी है। उनका तर्क है कि सरकार यह तय नहीं कर सकती कि प्रेस क्या रिपोर्ट करे या क्या प्रकाशित करे। मामला वॉशिंगटन डीसी स्थित संघीय जिला अदालत में जाएगा और इसमें तत्काल राहत की मांग किए जाने की संभावना है।

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नकारात्मक खबरों से नाराजगी बनी विवाद की वजह
विवाद की शुरुआत तब हुई जब राष्ट्रपति ट्रंप ने सीएनएन, एमएस नाउ और पोलिटिको के पत्रकारों की व्हाइट हाउस पहुंच पर रोक लगाने की घोषणा की। ट्रंप ने अपनी नाराजगी का कारण इन संस्थानों की कवरेज को बताया और कहा कि उन्हें उनकी नकारात्मक खबरें पसंद नहीं हैं।ट्रंप ने यह भी कहा था कि यदि ये संस्थान उनके बारे में ऐसी खबरें लिखना चाहते हैं तो लिख सकते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उन्हें व्हाइट हाउस में प्रवेश दिया ही जाए।इसके बाद इन संस्थानों के पत्रकारों के प्रेस पास निष्क्रिय कर दिए गए। शनिवार को एमएस नाउ की पत्रकार अकायला गार्डनर, सीएनएन की बेट्सी क्लेन और पोलिटिको की चेयेन हैसलेट को व्हाइट हाउस परिसर में प्रवेश करने से रोक दिया गया। सीक्रेट सर्विस ने उनके प्रेस पास भी अपने कब्जे में ले लिए।
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टीवी कवरेज और प्रेस पूल से भी बाहर
पाबंदी का असर केवल व्हाइट हाउस में प्रवेश तक सीमित नहीं रहा। सीएनएन को सोमवार को उस साझा टीवी कवरेज व्यवस्था से भी हटा दिया गया, जिसमें प्रमुख अमेरिकी मीडिया संस्थान बारी-बारी से राष्ट्रपति की गतिविधियों की कवरेज करते हैं।सीएनएन को राष्ट्रपति के न्यूयॉर्क दौरे के दौरान टीवी पूल ड्यूटी भी करनी थी। इसके अलावा सीएनएन और एमएस नाउ के पत्रकारों को व्हाइट हाउस परिसर में अपने कैमरा उपकरण और टीवी कवरेज के लिए निर्धारित स्थानों के इस्तेमाल से भी रोका गया है।इस घटनाक्रम ने अमेरिका में प्रेस की स्वतंत्रता और सरकार की ओर से पत्रकारों को मिलने वाली पहुंच को लेकर नई कानूनी बहस शुरू कर दी है।
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विवाद के केंद्र में फर्स्ट अमेंडमेंट
मीडिया संस्थानों की कानूनी चुनौती का प्रमुख आधार अमेरिकी संविधान का फर्स्ट अमेंडमेंट यानी पहला संशोधन है। इसमें अभिव्यक्ति और प्रेस की स्वतंत्रता की सुरक्षा की गई है।कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार इस विवाद का एक महत्वपूर्ण पहलू व्यू-पॉइंट डिस्क्रिमिनेशन यानी किसी खास विचार या नजरिये के कारण किसी व्यक्ति या संस्था के साथ अलग व्यवहार करने का सवाल है।ट्रंप द्वारा मीडिया संस्थानों की आलोचनात्मक कवरेज को रोक का कारण बताए जाने के कारण यह पहलू खास महत्व रखता है। अमेरिकी अदालतें पहले भी सरकार द्वारा पत्रकारों को उनकी रिपोर्टिंग या विचारों के आधार पर प्रतिबंधित करने के मामलों में प्रेस के अधिकारों पर विचार कर चुकी हैं।

1977 का फैसला बना अहम नजीर
इस मामले में 1977 का एक महत्वपूर्ण अदालती फैसला भी सामने आ रहा है। उस मामले में द नेशन पत्रिका के पत्रकार रॉबर्ट शेरिल का व्हाइट हाउस प्रेस पास सीक्रेट सर्विस ने रद्द कर दिया था। बाद में अदालत ने पत्रकार को प्रेस पास बहाल करने का रास्ता साफ किया था।डीसी सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स ने उस समय कहा था कि व्हाइट हाउस का प्रेस पास पत्रकार की रिपोर्टिंग की सामग्री के आधार पर नहीं छीना जा सकता और पत्रकारों को सूचना के स्रोतों से मनमाने ढंग से दूर नहीं किया जाना चाहिए।हालांकि अदालतों ने यह भी स्पष्ट किया है कि व्हाइट हाउस में पत्रकारों की पहुंच हर परिस्थिति में असीमित अधिकार नहीं है। सुरक्षा और प्रशासनिक जरूरतों के आधार पर कुछ प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। विवाद इस बात पर है कि क्या किसी मीडिया संस्थान की आलोचनात्मक रिपोर्टिंग उसके पत्रकारों की सरकारी परिसर तक पहुंच रोकने का आधार बन सकती है।

पहले भी हो चुका है ट्रंप और मीडिया का टकराव
ट्रंप के पिछले कार्यकाल में भी व्हाइट हाउस और मीडिया के बीच प्रेस एक्सेस को लेकर विवाद सामने आ चुके हैं। सीएनएन के तत्कालीन संवाददाता जिम एकोस्टा, प्लेबॉय के पत्रकार ब्रायन करेम और एसोसिएटेड प्रेस जैसे मीडिया संस्थानों से जुड़े मामलों में अदालतों को हस्तक्षेप करना पड़ा था।सीएनएन, एमएस नाउ और पोलिटिको की मौजूदा कानूनी चुनौती में सीएनएन की ओर से पहले जिम एकोस्टा मामले में पैरवी कर चुके फर्स्ट अमेंडमेंट वकील टेड बूट्रस भी शामिल हैं।


मीडिया संस्थानों का कवरेज जारी रखने का दावा
व्हाइट हाउस से पहुंच सीमित किए जाने के बावजूद तीनों मीडिया संस्थानों ने संकेत दिया है कि वे ट्रंप प्रशासन की कवरेज जारी रखेंगे।सीएनएन ने कहा है कि अमेरिकी सरकार की रिपोर्टिंग का उसका मिशन व्हाइट हाउस या अन्य सरकारी इमारतों तक भौतिक पहुंच सीमित किए जाने से नहीं रुकेगा।अब इस पूरे विवाद का अगला चरण अदालत में होगा। वहां यह सवाल महत्वपूर्ण होगा कि सरकार को व्हाइट हाउस में पत्रकारों की पहुंच नियंत्रित करने का कितना अधिकार है और क्या किसी मीडिया संस्थान की खबरों या संपादकीय दृष्टिकोण के आधार पर उसके पत्रकारों को सरकारी परिसर से बाहर किया जा सकता है।



 

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