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इस माह से मिलना शुरू होगा चौकीदारों का बढ़ा मानदेय

Wed, 20 Mar 2019 12:39 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 20 Mar 2019 12:39 AM IST
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इस माह से मिलना शुरू होगा चौकीदारों का बढ़ा मानदेय
औरैया। जिले भर में पुलिस के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाले चौकीदारों को इस माह से बढ़ा हुआ मानदेय मिलना शुरू होगा। चौकीदारों का कहना है कि महंगाई के इस दौर में प्रदेश सरकार की ओर से दिए गए इस लाभ से ज्यादा तो नहीं लेकिन फिर भी काफी समस्याएं हल हो सकेंगी।
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वर्तमान में जिले में 566 चौकीदार तैनात हैं। इनका काम पुलिसकर्मियों से किसी भी हालत में कम नहीं है। इसके बाद भी मेहनताना न के बराबर ही है। सरकारों ने इनका काम कई गुना अधिक होने के बाद भी कोई ध्यान नहीं दिया। धरना प्रदर्शन भी किए गए पर नतीजा सिफर ही रहा। वहीं पिछले दिनों वर्तमान सरकार की ओर से मानदेय में एक हजार रुपये का इजाफा किया गया। पूर्व में इन चौकीदारों को 1500 रुपये ही मिलते थे। खानपुर के चौकीदार बबलू ने बताया कि उन्हें निर्धारित ड्यूटी मिल जाती है। पिछले माह तक का मानदेय का खातों में भुगतान भी आ चुका है।
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हालांकि इतने रुपये से परिवार का खर्चा तो नहीं चल पा रहा था लेकिन इधर एक हजार रुपये की बढ़ोत्तरी हो जाने से कुछ तो आर्थिक बोझ कम होगा। वहीं जनेतपुर निवासी चौकीदार सोबरन कहते हैं कि पंद्रह सौ रुपये में परिवार का भरण पोषण कर पाना बहुत ही मुश्किल काम है। हालांकि एक हजार रुपये बढ़ाए जाने से कुछ राहत तो मिली ही है। वहीं अधिक कमाई के लिए प्रति क्विंटल 70 किलो खाद्यान्न दिए जाने की शर्त पर खेत काटने का ठेका लेकर गुजर बसर कर रहे हैं। 2500 रुपये खातों में पहुंचने की जानकारी से खुशी हो रही है।
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औरैया में 76, दिबियापुर में 62, सहायल में 38, अजीतमल में 63, अयाना में 40, फफूंद में 80, बिधूना में 63, बेला में 66, अछल्दा में 42 और एरवाकटरा में 36 चौकीदार हैं।


अपर पुलिस अधीक्षक कमलेश दीक्षित ने बताया कि जिले भर में तैनात चौकीदारों को पाक्षिक ड्यूटी पर लगाया जाता है। प्रत्येक पखवारे पर इनकी संबंधित थाना पर बैठक कर समस्याएं पूछी जाती हैं। साथ ही गांव की गतिविधियों पर भी नजर रखने पर चर्चा की जाती है। इनका मुख्य काम अपराधियों व संदिग्ध लोगों की संबंधित थाना/कोतवाली पुलिस को सूचना देना है। सभी के खातों में समय से भुगतान भी भेजा जा रहा है।

-महंगाई के दौर में कम रुपयों में नहीं हो रही थी गुजर-बसर
अमर उजाला ब्यूरो
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