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सजा सुनने के इंतजार में ढाई घंटे बैठे रहे भाई
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अमरोहा। शनिवार को सीआरपीएफ जवानों के कातिलों को सजा सुनाने का दिन था। इसका मुझे बेसब्री से इंतजार था। इस दौरान मैं रामपुर में ही था। छुट्टी में परिवार के पास आया था। सजा सुनने के इंतजार में ढाई घंटे रामपुर कचहरी में बैठा रहा। लेकिन बच्चों को स्कूल से लाने में हो रही देरी के चलते बिना सजा सुने घर चला गया। बताया कि साथी से आतंकियों के सजा सुनाने की जानकारी हुई।
नौगांवा सादात थानाक्षेत्र के गांव देहरा निवासी जितेंद्र सिंह पुत्र स्व. कमल सिंह की इन दिनों अलीगढ़ सीआरपीएफ 104 आरएएफ में तैनाती है। जितेंद्र सीआरपीएफ कैंप रामपुर में हुए आतंकी हमले में शहीद हुए आनंद कुमार के बड़े भाई हैं। उनका परिवार सीआरपीएफ कैंप रामपुर में ही रहता है। बारह अक्तूबर को वह छुट्टी पर परिवार के पास रामपुर आए थे। शनिवार को हमले के दोषियों को सजा होनी थी। वह दोपहर साढ़े बारह बजे कचहरी पहुंच गए। जहां आतंकियों के सजा सुनाए जाने का इंतजार करने लगे। तीन बजे तक सजा नहीं होने पर वह बच्चों को स्कूल से लेने के लिए चले गए। कमरे पर पहुंचकर दोबारा कचहरी जाने की तैयारी में थे। तभी साथी सीआरपीएफ जवान ने उन्हें फोन पर चार आतंकियों को फांसी सजा की खबर सुनाई। जितेंद्र सिंह ने बताया कि चार आतंकियों को फांसी की सजा सुनाए जाने की जानकारी होने पर उन्होंने सबसे पहले इसकी खबर मां को दी।
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नौगांवा सादात थानाक्षेत्र के गांव देहरा निवासी जितेंद्र सिंह पुत्र स्व. कमल सिंह की इन दिनों अलीगढ़ सीआरपीएफ 104 आरएएफ में तैनाती है। जितेंद्र सीआरपीएफ कैंप रामपुर में हुए आतंकी हमले में शहीद हुए आनंद कुमार के बड़े भाई हैं। उनका परिवार सीआरपीएफ कैंप रामपुर में ही रहता है। बारह अक्तूबर को वह छुट्टी पर परिवार के पास रामपुर आए थे। शनिवार को हमले के दोषियों को सजा होनी थी। वह दोपहर साढ़े बारह बजे कचहरी पहुंच गए। जहां आतंकियों के सजा सुनाए जाने का इंतजार करने लगे। तीन बजे तक सजा नहीं होने पर वह बच्चों को स्कूल से लेने के लिए चले गए। कमरे पर पहुंचकर दोबारा कचहरी जाने की तैयारी में थे। तभी साथी सीआरपीएफ जवान ने उन्हें फोन पर चार आतंकियों को फांसी सजा की खबर सुनाई। जितेंद्र सिंह ने बताया कि चार आतंकियों को फांसी की सजा सुनाए जाने की जानकारी होने पर उन्होंने सबसे पहले इसकी खबर मां को दी।
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