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Amroha News: जिला अस्पतालों में नहीं है थायराइड जांच की सुविधा
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अमरोहा। जिला अस्पताल में थायराइड जांच की सुविधा नहीं है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं जांच के लिए परेशान होना पड़ रहा है। वहीं, अधिकांश महिलाएं जांच ही नहीं करा पा रही हैं, जबकि चिकित्सकों का कहना है कि गर्भवती होने वाली महिला का तीन माह के भीतर थायराइड जांच होना बेहद जरूरी है।
जिला अस्पताल में थाइराइड जॉच की सुविधा नहीं है। ऐसे में महिलाओं को जांच के लिए परेशान होना पड़ता है। बाहर जांच कराने के बदले में उन्हें रुपये देने पड़ते हैं। ऐसे में अधिकांश महिलाएं जांच से वंचित रह जाती हैं। बाहर जांच कराने में पांच से सात सौ रुपये खर्च करने पड़ते है। इस बारे में जिला अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. चरन सिंह ने बताया कि थायराइड जांच की सुविधा शुरू करने के लिए प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए शासन को पत्र लिखा गया है।
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सरकारी अस्पताल में सुविधा नहीं
गर्भवती रामवती ने बताया कि तीन माह के भीतर थायराइड की जांच के लिए चिकित्सक बोल रहे हैं। सरकारी अस्पताल में जांच की व्यवस्था नहीं है। रुपये नहीं होने से जांच नहीं हो पा रही है। छह माह गुजर गए, गर्भ में पलने वाले शिशु के स्वास्थ्य की चिंता बनी रहती है।
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सरिता देवी ने बताया कि वह आठ माह से गर्भवती है। महिला चिकित्सक को दिखाया तो खून की जांच हो गई, लेकिन थायराइड की जांच नहीं हो पाई। अब आठ माह हो गए चिंता बनी हुई है। जांच कराने के लिए मुरादाबाद या मेरठ जाना पड़ेगा। वरना निजी लैब पर करनी पड़ेगी।
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दो प्रकार की होती है थायराइड जांच
सीएमएस प्रेमा पंत त्रिपाठी के मुताबिक थायराइड दो प्रकार की होती है। इसमें हाइपोथायराइट होने पर अचानक वजन बढ़ने लगता है। इस कारण व्यक्ति काम में रुचि नहीं लेता है, जबकि महिलाओं की माहवारी में अनियमितता हो जाती है। जोड़ों में पानी भर जाता है, जिससे पैरों में सूजन आ जाता है। यह 30 से 60 वर्ष की महिलाओं में अधिक होता है। दूसरा हायपर थायराइड है, जिसमें बीमारी वजन अचानक कम होने लगता है। ऐसे में गर्मी बर्दाश्त नहीं होती है। इसमें मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं और पीड़ित महिला के प्रजनन शक्ति पर असर पड़ता है। यह बीमारी 20 साल की महिलाओं को अधिक होती है। थायराइड के कारण गर्भपात का भी जोखिम रहता है।
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इस लिए जरूरी है थायराइड जांच
गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था में थायराइड की समस्या अधिक होती है। इस लिए उन्हें ज्यादा ध्यान रखना होता है। महिलाओं को पुरुष की तुलना में थायराइड अधिक होती है। औसतन हर दस थायराइड मरीजों में सात महिलाएं होती हैं। गर्भावस्था में दिक्कत और बढ़ जाती है। ऐसे में थायराइड की जांच जरूरी है, वह भी गर्भधारण करने के तीन माह के भीतर जांच होने पर समय से इलाज होता है तो दिक्कत नहीं होती। इसलिए गर्भधारण करने वाली हर महिला को तीन माह के भीतर जांच करा लेनी चाहिए।
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जिला अस्पताल में थाइराइड जॉच की सुविधा नहीं है। ऐसे में महिलाओं को जांच के लिए परेशान होना पड़ता है। बाहर जांच कराने के बदले में उन्हें रुपये देने पड़ते हैं। ऐसे में अधिकांश महिलाएं जांच से वंचित रह जाती हैं। बाहर जांच कराने में पांच से सात सौ रुपये खर्च करने पड़ते है। इस बारे में जिला अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. चरन सिंह ने बताया कि थायराइड जांच की सुविधा शुरू करने के लिए प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए शासन को पत्र लिखा गया है।
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सरकारी अस्पताल में सुविधा नहीं
गर्भवती रामवती ने बताया कि तीन माह के भीतर थायराइड की जांच के लिए चिकित्सक बोल रहे हैं। सरकारी अस्पताल में जांच की व्यवस्था नहीं है। रुपये नहीं होने से जांच नहीं हो पा रही है। छह माह गुजर गए, गर्भ में पलने वाले शिशु के स्वास्थ्य की चिंता बनी रहती है।
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सरिता देवी ने बताया कि वह आठ माह से गर्भवती है। महिला चिकित्सक को दिखाया तो खून की जांच हो गई, लेकिन थायराइड की जांच नहीं हो पाई। अब आठ माह हो गए चिंता बनी हुई है। जांच कराने के लिए मुरादाबाद या मेरठ जाना पड़ेगा। वरना निजी लैब पर करनी पड़ेगी।
दो प्रकार की होती है थायराइड जांच
सीएमएस प्रेमा पंत त्रिपाठी के मुताबिक थायराइड दो प्रकार की होती है। इसमें हाइपोथायराइट होने पर अचानक वजन बढ़ने लगता है। इस कारण व्यक्ति काम में रुचि नहीं लेता है, जबकि महिलाओं की माहवारी में अनियमितता हो जाती है। जोड़ों में पानी भर जाता है, जिससे पैरों में सूजन आ जाता है। यह 30 से 60 वर्ष की महिलाओं में अधिक होता है। दूसरा हायपर थायराइड है, जिसमें बीमारी वजन अचानक कम होने लगता है। ऐसे में गर्मी बर्दाश्त नहीं होती है। इसमें मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं और पीड़ित महिला के प्रजनन शक्ति पर असर पड़ता है। यह बीमारी 20 साल की महिलाओं को अधिक होती है। थायराइड के कारण गर्भपात का भी जोखिम रहता है।
इस लिए जरूरी है थायराइड जांच
गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था में थायराइड की समस्या अधिक होती है। इस लिए उन्हें ज्यादा ध्यान रखना होता है। महिलाओं को पुरुष की तुलना में थायराइड अधिक होती है। औसतन हर दस थायराइड मरीजों में सात महिलाएं होती हैं। गर्भावस्था में दिक्कत और बढ़ जाती है। ऐसे में थायराइड की जांच जरूरी है, वह भी गर्भधारण करने के तीन माह के भीतर जांच होने पर समय से इलाज होता है तो दिक्कत नहीं होती। इसलिए गर्भधारण करने वाली हर महिला को तीन माह के भीतर जांच करा लेनी चाहिए।