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सीएचसी में दो साल से नहीं महिला चिकित्सक
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सीएचसी में महिला एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ की तैनाती दो वर्ष से नहीं है। गर्भवती महिलाओं का उपचार, उनकी देखभाल एवं प्रसव तक की जिम्मेेदारी स्टाफ नर्स एवं एएनएम के सहारे चल रही है। विभागीय अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में करीब दो साल पहले तक महिला एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ की तैनाती थी। तब कभी ऐसी घटना नहीं हुई। जो एक साथ दो या उससे अधिक बच्चों की मौत कुछ घंटों के भीतर हुई है। महिला चिकित्सक की देखरेख में प्रसव कराए जाते थे तो स्टाफ नर्स एवं एएनएम भी अच्छा कार्य करती थीं लेकिन जब से महिला चिकित्सक का स्थानांतरण हुआ है। तब से यहां प्रसव की पूरी जिम्मेदार स्टाफ नर्स पर ही है। इस समय छह स्टाफ नर्स हैं। स्टाफ नर्स के सहारे ही पूरी व्यवस्था को देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि महिला चिकित्सक की तैनाती कराने की मांग लंबे समय से की जा रही है। लेकिन विभागीय अधिकारियों द्वारा इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा।
दो बच्चों में सांस लेने में थी दिक्क्त, दो बच्चों का मृत अवस्था में पैदा होने का दावा
हसनपुर। सीएचसी में मरने वाले चार बच्चों में से दो बच्चों को सांस लेने में दिक्कत हुई। जिसके बाद उनकी जन्म के पंद्रह मिनट बाद ही मौत हो गई। जबकि स्टाफ द्वारा दावा किया जा रहा है कि दो बच्चे मृत अवस्था में ही पैदा हुए थे।
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गांव फतेहपुर खादर निवासी देवेंद्र ने की पत्नी पूनम ने सोमवार शाम 5 बजे प्रसव के दौरान बच्चे को जन्म दिया। चिकित्सकों ने बताया कि बच्चे की जन्म से पहले ही मौत हो चुकी थी। गांव अगरौला कला निवासी सर्वेश की पत्नी बीना शाम 7:30 बजे प्रसव के दौरान बच्चे को जन्म दिया। इसके बाद गंभीर हालत में बच्चे को रेफर कर दिया गया। रास्ते में उसकी मौत हो गई। गांव सुतारी निवासी ओमवीर की पत्नी सविता ने सुबह 6 बजे उसने बच्चे को जन्म दिया। लेकिन वह भी जीवित नहीं रह सका। गांव झोंटना निवासी बंटी की पत्नी रिंकी ने सुबह करीब 3 बजे प्रसव के दौरान बेटा बच्चा हुआ। यह बच्चा भी जन्म से पहले ही मृत हो चुका था।
सीएचसी में जरूरी सुविधाओं अभाव है। ना अल्ट्रासाउंड है और ना ही एक्स-रे मशीन है। इसके अलावा ब्लड बैंक भी नहीं है। यदि प्रसव के दौरान किसी जच्चा को खून की जरूरत पड़ जाए तो खून उपलब्ध नहीं हो सकता। उसे हायर सेंटर रेफर करने से अलावा कोई रास्ता ही नहीं है। आजादी के बाद आजतक यहां अस्पताल में मरीजों के लिए मूलभूत सुविधाएं नहीं है। यदि गर्भवती को प्रसव से पहले अल्ट्रासाउंड की जरूरत होती तो उसे प्राइवेट में ही अल्ट्रासाउंड कराया जाता है।
सीएचसी में नौ चिकित्सकों की जगह काम कर रहे केवल दो चिकित्सक
हसनपुर। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में नौ चिकित्सकों की आवश्यकता है। लेकिन केवल दो चिकित्सकों की ही तैनाती है। दो चिकित्सक पूरे सीएचसी का संचालन करने नाकाम साबित हो रहे है। कई बार चिकित्सकों की तैनाती बढ़ाने की मांग की जा चुकी है, लेकिन इस तरफ ध्यान नहीं दिया जा रहा। चिकित्साधीक्षक डॉ.अमित बरू का कहना है कि पूरे अस्पताल में दो एमबीबीएस चिकित्सक हैं। छह चिकित्सकों की कमी है।
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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में करीब दो साल पहले तक महिला एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ की तैनाती थी। तब कभी ऐसी घटना नहीं हुई। जो एक साथ दो या उससे अधिक बच्चों की मौत कुछ घंटों के भीतर हुई है। महिला चिकित्सक की देखरेख में प्रसव कराए जाते थे तो स्टाफ नर्स एवं एएनएम भी अच्छा कार्य करती थीं लेकिन जब से महिला चिकित्सक का स्थानांतरण हुआ है। तब से यहां प्रसव की पूरी जिम्मेदार स्टाफ नर्स पर ही है। इस समय छह स्टाफ नर्स हैं। स्टाफ नर्स के सहारे ही पूरी व्यवस्था को देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि महिला चिकित्सक की तैनाती कराने की मांग लंबे समय से की जा रही है। लेकिन विभागीय अधिकारियों द्वारा इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा।
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दो बच्चों में सांस लेने में थी दिक्क्त, दो बच्चों का मृत अवस्था में पैदा होने का दावा
हसनपुर। सीएचसी में मरने वाले चार बच्चों में से दो बच्चों को सांस लेने में दिक्कत हुई। जिसके बाद उनकी जन्म के पंद्रह मिनट बाद ही मौत हो गई। जबकि स्टाफ द्वारा दावा किया जा रहा है कि दो बच्चे मृत अवस्था में ही पैदा हुए थे।
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गांव फतेहपुर खादर निवासी देवेंद्र ने की पत्नी पूनम ने सोमवार शाम 5 बजे प्रसव के दौरान बच्चे को जन्म दिया। चिकित्सकों ने बताया कि बच्चे की जन्म से पहले ही मौत हो चुकी थी। गांव अगरौला कला निवासी सर्वेश की पत्नी बीना शाम 7:30 बजे प्रसव के दौरान बच्चे को जन्म दिया। इसके बाद गंभीर हालत में बच्चे को रेफर कर दिया गया। रास्ते में उसकी मौत हो गई। गांव सुतारी निवासी ओमवीर की पत्नी सविता ने सुबह 6 बजे उसने बच्चे को जन्म दिया। लेकिन वह भी जीवित नहीं रह सका। गांव झोंटना निवासी बंटी की पत्नी रिंकी ने सुबह करीब 3 बजे प्रसव के दौरान बेटा बच्चा हुआ। यह बच्चा भी जन्म से पहले ही मृत हो चुका था।
सीएचसी में जरूरी सुविधाओं अभाव है। ना अल्ट्रासाउंड है और ना ही एक्स-रे मशीन है। इसके अलावा ब्लड बैंक भी नहीं है। यदि प्रसव के दौरान किसी जच्चा को खून की जरूरत पड़ जाए तो खून उपलब्ध नहीं हो सकता। उसे हायर सेंटर रेफर करने से अलावा कोई रास्ता ही नहीं है। आजादी के बाद आजतक यहां अस्पताल में मरीजों के लिए मूलभूत सुविधाएं नहीं है। यदि गर्भवती को प्रसव से पहले अल्ट्रासाउंड की जरूरत होती तो उसे प्राइवेट में ही अल्ट्रासाउंड कराया जाता है।
सीएचसी में नौ चिकित्सकों की जगह काम कर रहे केवल दो चिकित्सक
हसनपुर। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में नौ चिकित्सकों की आवश्यकता है। लेकिन केवल दो चिकित्सकों की ही तैनाती है। दो चिकित्सक पूरे सीएचसी का संचालन करने नाकाम साबित हो रहे है। कई बार चिकित्सकों की तैनाती बढ़ाने की मांग की जा चुकी है, लेकिन इस तरफ ध्यान नहीं दिया जा रहा। चिकित्साधीक्षक डॉ.अमित बरू का कहना है कि पूरे अस्पताल में दो एमबीबीएस चिकित्सक हैं। छह चिकित्सकों की कमी है।