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Amroha News: गैस की किल्लत के बीच बढ़े ईंधन के दाम उपला चार रुपये व लकड़ी 11 रुपये किलो
Sun, 15 Mar 2026 02:07 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Sun, 15 Mar 2026 02:07 AM IST
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डिडौली में सिलिंडर नहीं मिलने पर चूल्हे पर खाना बनाती महिला। संवाद
- फोटो : rs pura news
अमरोहा। पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब स्थानीय बाजारों में ईंधन की कीमतों पर भी दिखाई देने लगा है। एलपीजी की कमी और महंगाई के कारण कोयला, लकड़ी और उपलों के दाम तेजी से बढ़ गए हैं।
हालात यह हैं कि जो उपला कुछ दिन पहले दो रुपये का मिल रहा था, वह अब तीन से चार रुपये तक पहुंच गया है। वहीं लकड़ी के दाम भी आठ रुपये प्रति किलो से बढ़कर 11 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं।
कामर्शियल गैस सिलिंडर की आपूर्ति प्रभावित होने के कारण शहर के कई होटल और रेस्टोरेंट में कोयले की भट्ठियां फिर से जलने लगी हैं। छोटे दुकानदार और ठेला संचालक लकड़ी और उपलों का सहारा लेकर काम चलाने लगी हैं। गैस की किल्लत ने लोगों को फिर से पुराने पारंपरिक ढर्रे पर लाकर खड़ा कर दिया है। ईंधनों की मांग अचानक बढ़ गई है और बाजार में कीमतें भी चढ़ गई हैं।
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मोहल्ला बटवाल में रहले वाले पिज्जा बर्गर का ठेला लगाने वाले सौरभ पाल ने बताया कि गैस सिलिंडर मिलना मुश्किल हो गया है। ऐसे में मजबूरी में अंगीठी पर उपले और लकड़ी जलाकर काम करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि अब उपले भी महंगे हो गए हैं और पहले उपला दो मिल रहा था लेकिन अब चार रुपये तक मिल रहा है। इसी तरह चाय का ठेला लगाने वाले साबुद्दीन ने बताया कि उनका कामर्शियल सिलिंडर खत्म होने के बाद उन्हें गैस नहीं मिल सकी है।
यहीं कारण है कि दुकान बंद रखनी पड़ी। इसके बाद उन्होंने लोहे का चूल्हा खरीद लिया और अब उसमें लकड़ी और उपले जलाकर चाय बना रहे हैं। बाजार में उपले आसानी से मिल भी नहीं रहे हैं, इसलिए उन्हें गांव से मंगवाने पड़ रहे हैं। बड़े होटल वाले तो कोयला भी खरीद सकते हैं, लेकिन छोटे दुकानदारों को उपले और लकड़ी से ही काम चलाना मजबूरी है।
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हालात यह हैं कि जो उपला कुछ दिन पहले दो रुपये का मिल रहा था, वह अब तीन से चार रुपये तक पहुंच गया है। वहीं लकड़ी के दाम भी आठ रुपये प्रति किलो से बढ़कर 11 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं।
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कामर्शियल गैस सिलिंडर की आपूर्ति प्रभावित होने के कारण शहर के कई होटल और रेस्टोरेंट में कोयले की भट्ठियां फिर से जलने लगी हैं। छोटे दुकानदार और ठेला संचालक लकड़ी और उपलों का सहारा लेकर काम चलाने लगी हैं। गैस की किल्लत ने लोगों को फिर से पुराने पारंपरिक ढर्रे पर लाकर खड़ा कर दिया है। ईंधनों की मांग अचानक बढ़ गई है और बाजार में कीमतें भी चढ़ गई हैं।
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मोहल्ला बटवाल में रहले वाले पिज्जा बर्गर का ठेला लगाने वाले सौरभ पाल ने बताया कि गैस सिलिंडर मिलना मुश्किल हो गया है। ऐसे में मजबूरी में अंगीठी पर उपले और लकड़ी जलाकर काम करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि अब उपले भी महंगे हो गए हैं और पहले उपला दो मिल रहा था लेकिन अब चार रुपये तक मिल रहा है। इसी तरह चाय का ठेला लगाने वाले साबुद्दीन ने बताया कि उनका कामर्शियल सिलिंडर खत्म होने के बाद उन्हें गैस नहीं मिल सकी है।
यहीं कारण है कि दुकान बंद रखनी पड़ी। इसके बाद उन्होंने लोहे का चूल्हा खरीद लिया और अब उसमें लकड़ी और उपले जलाकर चाय बना रहे हैं। बाजार में उपले आसानी से मिल भी नहीं रहे हैं, इसलिए उन्हें गांव से मंगवाने पड़ रहे हैं। बड़े होटल वाले तो कोयला भी खरीद सकते हैं, लेकिन छोटे दुकानदारों को उपले और लकड़ी से ही काम चलाना मजबूरी है।