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जिम्मेदार हुए मौन, इनकी सुनेगा कौन
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गजरौला (अमरोहा)। गंगा पार स्थित 18 से अधिक गांवों की हालत बेहद खराब है। अधिकांश गांवों में बाढ़ का पानी घुस आया है। इससे लोग दहशत के साए में जी रहे हैं। वहीं अभी तक किसी भी नेता, जनप्रतिनिधि अथवा अफसरों के हालात का जायजा लेने नहीं आने से वहां के ग्रामीण गुस्से में हैं। वहीं गंगा के लगातार उफान से बाशिंदों की चिंता बढ़ती जा रही है।
रामगंगा पोषक नहर में बाढ़ का पानी तेजी से बढ़ रहा है। गंगा पार स्थित कई गांवों में बाढ़ का पानी घुस आया है। टीकोवाली, शीशोवाली, जाटोवाली और ढाकोवाली में तो हालात सबसे खराब हैं। शीशोवाली में बनाया गया अस्थाई तटबंध बाढ़ की भेंट चढ़ चुका है। यहां रहने वाले नन्हें, भूरा, उदय राम, कलवा, तेजराम, विजयपाल, दीपक आदि की झोंपड़ियों में पानी भर गया। वहीं टीकोवाली के हालात तो और भी अधिक खराब हैं। गांव तक जाने वाली कच्ची सड़क दलदल में तब्दील हो चुकी है। बाइक तो दूर पैदल भी नहीं चला जा सकता है। यहां रहने वाले ध्यानचंद, राधे, सुरेश का कहना है कि चुनाव के समय तो नेता वोट मांगने के लिए जैसे-तैसे आ जाते हैं। इसके बाद लौटकर आते ही नहीं हैं। हिम्मत है तो जरा अब यहां के हालात देखने आएं। इन गांवों में रहने वाले अधिकांश लोगों ने अमर उजाला को अपना दर्द साझा किया। कहा कि विधायक, सांसद और जिम्मेदार अधिकारियों को कम से कम इस वक्त इन गांवों का दौरा तो करना ही चाहिए। दफ्तरों में बैठकर बाढ़ की सुरक्षा को कागजों में अंजाम देने से कुछ नहीं होगा। अच्छा होगा कि यहां आकर वास्तविकता परखी जाए।
मगरमच्छ देख मची खलबली
गजरौला। मंगलवार की शाम चकनवाला स्थित रामगंगा पोषक नहर में मगरमच्छ दिखाई देने से वहां पार जाने के लिए नाव की प्रतीक्षा कर रहे ग्रामीणों में खलबली मच गई। दहशतजदा ग्रामीण मगरमच्छ के पानी में गुम होने के बाद काफी देर तक उस स्थान को नजरें गड़ाए देखते रहे। ग्रामीणों का कहना था कि पूर्व में भी कई बार वहां मगरमच्छ देखा गया है।
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शाम ढलते ही पसर जाता है सन्नाटा
गजरौला। खादर में गंगा पार स्थित गांवों में नाव या डोंगी ही एकमात्र आवागमन का साधन हैं। नाव का संचालन शाम तक ही होता है। शाम ढलते ही यहां सन्नाटा पसर जाता है। शीशोवाली मार्ग पर बाढ़ का पानी भरा होने और वहां गहरे गड्ढे होने से लोग बाइक निकालते हुए भी डर रहे हैं। यही वजह है कि वे दूसरी बाइक आने की प्रतीक्षा में घंटों खड़े रहते हैं। सहारा मिलने पर ही आगे बढ़ते हैं।
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रामगंगा पोषक नहर में बाढ़ का पानी तेजी से बढ़ रहा है। गंगा पार स्थित कई गांवों में बाढ़ का पानी घुस आया है। टीकोवाली, शीशोवाली, जाटोवाली और ढाकोवाली में तो हालात सबसे खराब हैं। शीशोवाली में बनाया गया अस्थाई तटबंध बाढ़ की भेंट चढ़ चुका है। यहां रहने वाले नन्हें, भूरा, उदय राम, कलवा, तेजराम, विजयपाल, दीपक आदि की झोंपड़ियों में पानी भर गया। वहीं टीकोवाली के हालात तो और भी अधिक खराब हैं। गांव तक जाने वाली कच्ची सड़क दलदल में तब्दील हो चुकी है। बाइक तो दूर पैदल भी नहीं चला जा सकता है। यहां रहने वाले ध्यानचंद, राधे, सुरेश का कहना है कि चुनाव के समय तो नेता वोट मांगने के लिए जैसे-तैसे आ जाते हैं। इसके बाद लौटकर आते ही नहीं हैं। हिम्मत है तो जरा अब यहां के हालात देखने आएं। इन गांवों में रहने वाले अधिकांश लोगों ने अमर उजाला को अपना दर्द साझा किया। कहा कि विधायक, सांसद और जिम्मेदार अधिकारियों को कम से कम इस वक्त इन गांवों का दौरा तो करना ही चाहिए। दफ्तरों में बैठकर बाढ़ की सुरक्षा को कागजों में अंजाम देने से कुछ नहीं होगा। अच्छा होगा कि यहां आकर वास्तविकता परखी जाए।
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मगरमच्छ देख मची खलबली
गजरौला। मंगलवार की शाम चकनवाला स्थित रामगंगा पोषक नहर में मगरमच्छ दिखाई देने से वहां पार जाने के लिए नाव की प्रतीक्षा कर रहे ग्रामीणों में खलबली मच गई। दहशतजदा ग्रामीण मगरमच्छ के पानी में गुम होने के बाद काफी देर तक उस स्थान को नजरें गड़ाए देखते रहे। ग्रामीणों का कहना था कि पूर्व में भी कई बार वहां मगरमच्छ देखा गया है।
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शाम ढलते ही पसर जाता है सन्नाटा
गजरौला। खादर में गंगा पार स्थित गांवों में नाव या डोंगी ही एकमात्र आवागमन का साधन हैं। नाव का संचालन शाम तक ही होता है। शाम ढलते ही यहां सन्नाटा पसर जाता है। शीशोवाली मार्ग पर बाढ़ का पानी भरा होने और वहां गहरे गड्ढे होने से लोग बाइक निकालते हुए भी डर रहे हैं। यही वजह है कि वे दूसरी बाइक आने की प्रतीक्षा में घंटों खड़े रहते हैं। सहारा मिलने पर ही आगे बढ़ते हैं।