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गंगा कटान : सतेड़ा में श्मशान घाट के भवन पर मंडराया खतरा
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हसनपुर। तहसील क्षेत्र के गंगापूठ धाम सतेड़ा में जलस्तर बढ़ने से गंगा का कटान बेहद तेज हो गया है। कटान के चलते श्मशान घाट का दूसरा चबूतरा भी नदी के तेज बहाव में बह गया है।
महज पांच दिन पहले ही एक चबूतरा नदी में समाया था। अब गंगा की मुख्य धारा जंगल में बने श्मशान घाट के मुख्य भवन के बिल्कुल मुहाने पर बह रही है, जिससे पूरे भवन के जमींदोज होने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
लगभग 16 साल पहले करीब 14 लाख रुपये की लागत से बने इस श्मशान घाट को बचाने के लिए ग्रामीण प्रयासरत हैं। धारा को पास आता देख शेड उखाड़कर सुरक्षित रख लिया गया है। ग्रामीणों के अनुसार पांच साल पहले कबीरपुर-धौरिया का श्मशान घाट भी इसी तरह नदी में समा गया था।
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तटबंध तक जल पहुंचने से खेतों में पानी भर गया है, जिससे किसानों की सब्जी, गन्ना, धान, मक्का और चारे की फसलें पूरी तरह नष्ट हो रही हैं। सिरसा गुर्जर की मड़ैया व सतेड़ा की मड़ैया के कई छप्परदार मकान पहले ही बह चुके हैं। एसडीएम हिमांशु उपाध्याय ने बताया कि कटान पर लगातार नजर रखी जा रही है और ग्रामीणों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। संवाद
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महज पांच दिन पहले ही एक चबूतरा नदी में समाया था। अब गंगा की मुख्य धारा जंगल में बने श्मशान घाट के मुख्य भवन के बिल्कुल मुहाने पर बह रही है, जिससे पूरे भवन के जमींदोज होने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
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लगभग 16 साल पहले करीब 14 लाख रुपये की लागत से बने इस श्मशान घाट को बचाने के लिए ग्रामीण प्रयासरत हैं। धारा को पास आता देख शेड उखाड़कर सुरक्षित रख लिया गया है। ग्रामीणों के अनुसार पांच साल पहले कबीरपुर-धौरिया का श्मशान घाट भी इसी तरह नदी में समा गया था।
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तटबंध तक जल पहुंचने से खेतों में पानी भर गया है, जिससे किसानों की सब्जी, गन्ना, धान, मक्का और चारे की फसलें पूरी तरह नष्ट हो रही हैं। सिरसा गुर्जर की मड़ैया व सतेड़ा की मड़ैया के कई छप्परदार मकान पहले ही बह चुके हैं। एसडीएम हिमांशु उपाध्याय ने बताया कि कटान पर लगातार नजर रखी जा रही है और ग्रामीणों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। संवाद