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Amroha News: करोड़ों की सब्सिडी का दुरुपयोग करने में जिला कृषि अधिकारी समेत तीन पर एफआईआर
Wed, 22 Jan 2025 02:15 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Wed, 22 Jan 2025 02:15 AM IST
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अमरोहा। छह उर्वरक बिक्री लाइसेंस अलग-अलग सहकारी संस्थाओं के नाम से जारी कर करोड़ों रुपये की सब्सिडी का दुरुपयोग करने के मामले में जिला कृषि अधिकारी बबलू सिंह व एआर कोऑपरेटिव वरुण अग्रवाल समेत तीन के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। कोर्ट के आदेश पर दर्ज मामले की देहात पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
सीओ पंकज त्यागी ने बताया कि अमरोहा देहात क्षेत्र के पचोकरा मेहरबान अली निवासी कारोबारी विकास चौधरी का आरोप है कि वर्ष 2024 में सरकारी उर्वरक बिक्री केंद्रों पर किसानों को यूरिया व अन्य खाद उपलब्ध नहीं हो पाई थी। जांच में सामने आया था कि जनपद के अधिकारियों की मिलीभगत से उर्वरक की कालाबाजारी की जा रही है। संयुक्त कृषि निदेशक (उर्वरक अनुभाग) उत्तर प्रदेश ने 24 अक्तूबर 2024 को एक पत्र जारी किया था। इसमें बताया गया कि एक व्यक्ति के नाम पर व उसकी शैक्षिक योग्यता पर विभाग की ओर से एक ही उर्वरक बिक्री लाइसेंस व एफएमएस आईडी जारी की जा सकती है, लेकिन अधिकारियों ने गजरौला क्षेत्र के खेड़की खादर निवासी अमित कुमार के नाम पर एक अधिक ब्रिकी लाइसेंस और अन्य सहकारी संस्थाओं के नाम से जारी कर कालाबाजारी की गई है। इसमें एआर कोऑपरेटिव वरुण कुमार अग्रवाल व जिला कृषि अधिकारी बबलू कुमार के नाम सामने आए है।
ढबारसी सहकारी समिति के निरस्त बिक्री लाइसेंस व एफएमएस आईडी पर उर्वरक जारी करके विभाग व भारत सरकार की करोड़ों रुपये की सब्सिडी का दुरुपयोग किया। अधिकारियों ने किसान एवं सरकार के साथ धोखाधड़ी की। मामले में पुलिस अधिकारियों से शिकायत की गई तो कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद विकास चौधरी ने न्यायालय की शरण ली। प्रकरण को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ओमपाल सिंह ने अमरोहा देहात पुलिस को एआर कोऑपरेटिव वरुण अग्रवाल और जिला कृषि अधिकारी बबलू सिंह और गजरौला के खेड़की खादर गांव निवासी अमित कुमार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।
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इन धाराओं में दर्ज हुई रिपोर्ट
सीओ ने बताया कि प्रकरण में बीएनएस की धारा 318(4), 316(2) में एफआईआर दर्ज की गई है। ये धाराएं धोखाधड़ी व विश्वासघात से संबंधित हैं।
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सीओ पंकज त्यागी ने बताया कि अमरोहा देहात क्षेत्र के पचोकरा मेहरबान अली निवासी कारोबारी विकास चौधरी का आरोप है कि वर्ष 2024 में सरकारी उर्वरक बिक्री केंद्रों पर किसानों को यूरिया व अन्य खाद उपलब्ध नहीं हो पाई थी। जांच में सामने आया था कि जनपद के अधिकारियों की मिलीभगत से उर्वरक की कालाबाजारी की जा रही है। संयुक्त कृषि निदेशक (उर्वरक अनुभाग) उत्तर प्रदेश ने 24 अक्तूबर 2024 को एक पत्र जारी किया था। इसमें बताया गया कि एक व्यक्ति के नाम पर व उसकी शैक्षिक योग्यता पर विभाग की ओर से एक ही उर्वरक बिक्री लाइसेंस व एफएमएस आईडी जारी की जा सकती है, लेकिन अधिकारियों ने गजरौला क्षेत्र के खेड़की खादर निवासी अमित कुमार के नाम पर एक अधिक ब्रिकी लाइसेंस और अन्य सहकारी संस्थाओं के नाम से जारी कर कालाबाजारी की गई है। इसमें एआर कोऑपरेटिव वरुण कुमार अग्रवाल व जिला कृषि अधिकारी बबलू कुमार के नाम सामने आए है।
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ढबारसी सहकारी समिति के निरस्त बिक्री लाइसेंस व एफएमएस आईडी पर उर्वरक जारी करके विभाग व भारत सरकार की करोड़ों रुपये की सब्सिडी का दुरुपयोग किया। अधिकारियों ने किसान एवं सरकार के साथ धोखाधड़ी की। मामले में पुलिस अधिकारियों से शिकायत की गई तो कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद विकास चौधरी ने न्यायालय की शरण ली। प्रकरण को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ओमपाल सिंह ने अमरोहा देहात पुलिस को एआर कोऑपरेटिव वरुण अग्रवाल और जिला कृषि अधिकारी बबलू सिंह और गजरौला के खेड़की खादर गांव निवासी अमित कुमार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।
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इन धाराओं में दर्ज हुई रिपोर्ट
सीओ ने बताया कि प्रकरण में बीएनएस की धारा 318(4), 316(2) में एफआईआर दर्ज की गई है। ये धाराएं धोखाधड़ी व विश्वासघात से संबंधित हैं।