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Amroha News: गहराई से हो जांच तो सामने आएगा बड़ा पट्टा घोटाला

Wed, 08 Jul 2026 12:11 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा Updated Wed, 08 Jul 2026 12:11 AM IST
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A thorough investigation will expose a major lease scam.
अमरोहा। जिले में चरागाह, नदी, झील की 2880 बीघा सरकारी जमीन पर पट्टा आवंटन की मनमानी हसनपुर तहसील क्षेत्र के चार गांवों तक ही सीमित नहीं है। राजस्व सूत्र बताते हैं कि गहराई से जांच होगी तो अन्य तहसीलों के कई गांवों में भी बड़ा पट्टा घोटाला सामने आ सकता है। साथ ही सख्ती की स्थिति में 1987 से लेकर साल 2000 के बीच के राजस्व कर्मचारियों और अफसरों पर गाज भी गिर सकती है।
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हसनपुर के गांव आदमपुर, रहरा, दढ़ियाल और गंगेश्वरी में 2880 बीघा जमीन पट्टों की आड़ में खुर्दबुर्द होने की बात सामने आने के बाद अन्य तहसीलों के राजस्व स्टाफ और अधिकारियों के भी कान खड़े हो गए हैं। इस मामले में अभी कोई खुलकर नहीं बोल रहा है लेकिन दबी जुबान कर्मचारी उस दौर में जिले के कई गांवों में मोटी वसूली के एवज में मनमाने तरीके से पट्टे जारी करने की बात कह रहे हैं। हसनपुर के जिन चार गांवों में 2880 बीघा सरकारी जमीन खुर्दबुर्द की गई थी, उसकी कीमत ताजी बाजार दर के हिसाब से 1.44 अरब बताई गई है। इससे माना जा रहा है कि सरकारी जमीनों के बंदरबांट में भी पैसों का बड़ा खेल चला होगा।
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एडीएम न्यायिक धीरेंद्र प्रताप का कहना है कि जो मामले में उजागर हो चुके हैं, उनकी सुनवाई कोर्ट में की जा रही है। साथ ही पट्टों के निरस्तीकरण की कार्रवाई भी क्रमवार आगे बढ़ रही है। जिले के अन्य क्षेत्रों में भी राजस्व और चकबंदी रिकॉर्ड के माध्यम से जांच की जाएगी। साथ ही जिन-जिन की भूमिका गलत मिलेगी, उनके विरुद्ध नियमसंगत तरीके से कार्रवाई की लिखापढ़त भी की जाएगी।
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मनमानी की हद इतनी कि कई पट्टाधरकों को दे दिया स्थायी अधिकार

जिला शासकीय अधिवक्ता राजेश कुमार राणा के मुताबिक उत्तर प्रदेश राजस्व नियमों के तहत झील, तालाब, चारागाह और अन्य सार्वजनिक उपयोग की भूमि पर केवल आसामी श्रेणी-3 का पट्टा ही दिया जा सकता है। यह पूरी तरह अस्थायी पट्टा होता है, जिसकी अधिकतम अवधि पांच वर्ष निर्धारित है। पांच वर्ष पूरे होने के बाद यह पट्टा स्वतः समाप्त हो जाता है और पट्टाधारक को उस भूमि पर किसी प्रकार का स्थायी या संक्रमणीय अधिकार नहीं मिलता।

सामने आए घपले के अधिकांश मामलों में इन अस्थायी पट्टों को नियमों के विपरीत सिरदरी (संक्रमणीय) पट्टों में परिवर्तित कर दिया गया था। इसके बाद संबंधित पट्टाधारकों को श्रेणी-1क के अधिकार प्राप्त हो गए। श्रेणी-1क के अधिकार मिलने के बाद संबंधित व्यक्तियों के नाम राजस्व अभिलेखों में स्थायी रूप से दर्ज हो गए। उन्होंने बताया कि बंजर भूमि का पट्टा असंक्रमणीय श्रेणी-2 के रूप में दिया जाता है। पहले ऐसे पट्टों में 10 वर्ष की अवधि पूरी होने पर और वर्तमान व्यवस्था के अनुसार पांच वर्ष बाद निर्धारित शर्तों के पूरा होने पर उन्हें संक्रमणीय श्रेणी-1क में परिवर्तित किया जा सकता है लेकिन सार्वजनिक उपयोग की भूमि के लिए ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।

जिला शासकीय अधिवक्ता भी मानते हैं यदि पूरे जिले के राजस्व अभिलेखों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो ऐसे कई और मामले सामने आ सकते हैं। जांच के दौरान उन अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी सामने आ सकती है, जिनकी संस्तुति या आदेश के आधार पर सार्वजनिक उपयोग की भूमि के पट्टों का स्वरूप बदला गया।

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इधर जमीन न मिलने से लटके हैं छह ब्लॉकों में स्टेडियम, उधर पट्टों के नाम पर रेवड़ी की तरह बंटी सरकारी जमीनें

- ग्रामीण क्षेत्रों में खेल प्रतिभा तैयार करने के लिए चाहिए तीन-तीन एकड़ भूमि

संवाद न्यूज एजेंसी

अमरोहा। एक ओर जिले में चरागाह, झील, तालाब, नदी जैसी सार्वजनिक उपयोग की हजारों बीघा भूमि के नियमविरुद्ध पट्टे आवंटित कर दिए गए, वहीं दूसरी ओर कई महत्वपूर्ण सरकारी परियोजनाएं जमीन के अभाव में अधर में लटकी हुई हैं। जिले के छह ब्लॉकों में प्रस्तावित ग्रामीण स्टेडियमों का निर्माण भी जमीन न मिलने के कारण अटका पड़ा है। स्टेडियम के लिए तीन-तीन एकड़ सरकारी भूमि की जरूरत है।

सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए हर ब्लॉक में आधुनिक ग्रामीण स्टेडियम विकसित करने की योजना चला रही है। प्रत्येक स्टेडियम पर करीब पांच करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं। इनमें 200 मीटर का रनिंग ट्रैक, मल्टीपर्पज हॉल, जिम तथा टेनिस, बैडमिंटन, कबड्डी, कुश्ती और वॉलीबॉल जैसी खेल सुविधाएं विकसित की जानी हैं। इससे ग्रामीण युवाओं को अभ्यास के लिए बेहतर संसाधन मिलेंगे और सेना व पुलिस भर्ती की तैयारी करने वाले युवाओं को भी लाभ मिलेगा। अमरोहा जिले में भूमि की अनुपलब्धता के कारण स्टेडियम का काम शुरू नहीं हो सका है।

जिला युवा कल्याण अधिकारी ऋषि कुमार बताते हैं कि जिले में एक भी ब्लॉक में स्टेडियम के लिए अभी तक जमीन नहीं मिली है। स्टेडियम बनाने के लिए सरकारी जमीन की तलाश की जा रही है। जमीन मिले तो प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा जाएगा।


जोया ब्लॉक के सहसपुर अलीनगर मशहूर भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद शमी का पैतृक गांव है। वहां स्टेडियम के लिए भूमि तो चिन्हित कर ली गई थी। कार्यदायी संस्था भी नामित कर दी गई और बजट भी स्वीकृत हो चुका है लेकिन राजस्व परिषद से भूमि का हस्तांतरण नहीं होने के कारण करीब डेढ़ वर्ष बाद भी निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है।


जिले के ब्लॉकों में स्टेडियम ही नहीं, गजरौला में मुख्यमंत्री वैश्विक नगरोदय योजना के तहत प्रस्तावित दो ओपन जिम भी जमीन के अभाव में शुरू नहीं हो सके हैं। नगर पालिका ने रमाबाई आंबेडकर राजकीय महाविद्यालय परिसर तथा अवंतिका पार्क में ओपन जिम स्थापित करने की योजना बनाई थी। एक जिम पर लगभग 20 लाख रुपये खर्च होने हैं। योजना कागजों तक ही सीमित है।
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