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863 गर्भवती में 79 हाई रिस्क पर

Thu, 11 Mar 2021 09:55 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 11 Mar 2021 09:55 PM IST
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79 pregnant women marked as high risk pregnancy
गौरीगंज (अमेठी)। मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए जिले का स्वास्थ्य विभाग प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान संचालित कर रहा है।
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अभियान के तहत 863 गर्भवती महिलाओं का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। इस दौरान 79 महिलाओं को हाई रिस्क प्रेगनेंसी में चिह्नित किया गया। महिलाओं के नियमित स्वास्थ्य परीक्षण की जिम्मेदारी आशा बहू को दी गई है।
सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर स्वास्थ्य सुविधा बढ़ाने के लिए स्वास्थ्य विभाग सुरक्षित प्रसव का प्रबंध करने में जुटा है। कवायद सफल हो इसके लिए प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत जांच, परामर्श व दवा की उपलब्धता अस्पतालों में सुनिश्चित की गई है।
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प्रत्येक माह विभाग अभियान संचालित कर गर्भवती महिलाओं की जांच करता है। मार्च माह में स्वास्थ्य विभाग ने 863 गर्भवती महिलाओं का शुगर व ब्लड प्रेशर समेत अन्य जांच की। जांच के दौरान 79 गर्भवती महिलाओं को हाई रिस्क प्रेगनेंसी में चिह्नित किया गया।
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एसीएमओ डॉ. नवीन कुमार मिश्र ने बताया कि चिह्नित गर्भवती महिलाओं व बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए आशा व एएनएम नियमित महिलाओं को बीमारियों के प्रति सजग करते हुए नियमित देखभाल करती हैं। जिससे शिशु व प्रसव के उपरांत महिला सुरक्षित रहे और मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाई जा सके।
एसीएमओ ने बताया कि गर्भवती की जांच वरिष्ठ चिकित्सक या प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ से कराने के साथ ही नियमित शरीर में खून की कमी, रक्त समूह, वजन, यूरिन, मधुमेह, एचआईवी, सिफलिस की जांच की जाती है।
इसके अतिरिक्त गर्भवती महिलाओं को प्रसव कालीन व प्रसव के बाद बरती जाने वाले सावधानियों की जानकारी देते हुए अस्पताल में प्रसव कराने के प्रति जागरूक किया जाता है।
गर्भावस्था से लेकर प्रसव तक जांच, टीकाकरण व दवा की व्यवस्था तथा निगरानी आशा बहू नियमित करते प्रति माह विभाग को रिपोर्ट प्रेषित करती है। एसीएमओ ने लोगों से सरकारी अस्पताल में प्रसव कराने की अपील करते हुए परेशानी होने पर अस्पताल अधीक्षक या सीएमओ कार्यालय से संपर्क करने की सलाह दी।
थकान, बुखार और माहवारी में दिक्कत तो हो जाएं सावधान
गौरीगंज (अमेठी)। टीबी का संबंध सिर्फ फेफड़ों से नहीं होता। यह शरीर के किसी भी अंग में हो सकती है। औरतों के गर्भाश्य में होने वाली टीबी उनमें बांझपन का कारण भी बन सकती है। सह बातें संयुक्त जिला चिकित्सालय में कार्यरत शल्य चिकित्सक (परिवार नियोजन) डॉ. विनोद गुप्ता ने कहीं।
चिकित्सक ने कहा कि टीबी कई प्रकार की होती हैं। कई अन्य प्रकार की टीबी के साथ एक होती है जननांग की टीबी। यह महिला और पुरुष दोनों में हो सकती है। दोनों के ही प्रजनन स्वास्थ्य को प्रभावित करती है। इसे बहुरुपिया टीबी भी कहा जाता है।
क्योंकि इस तरह के टीबी का शुरुआती दौर में पकड़ में आना थोड़ा मुश्किल होता है। कई बार तो लोग इसे कैंसर भी समझ लेते हैं। भारत में 20-40 साल की लगभग 18 फीसदी महिलाओं में बांझपन का कारण जननांग की टीबी होती है और इसकी चपेट में आने वाली 90 प्रतिशत महिलाओं के गर्भाशय से जुड़े फैलोपियन ट्यूब में यह होती है।
बताया कि टीबी माइको बैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस जीवाणु की वजह से होती है। जो फेफड़ों की टीबी से संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से निकलने वाली बूंदों से फैलती है। यह बैैक्टीरिया शरीर के निचले हिस्से में पहुंच कर प्रजनन अंग को प्रभावित करता है। इसके कुछ लक्षण थकान, हल्का बुखार, पेट के निचले हिस्से में दर्द रहना, जननांग से सफेद पानी निकलना, पीरियड्स ठीक समय पर न आता है।

अगर किसी भी महिला को यह समस्या हो रही है तो उसे समय रहते डॉक्टर को दिखा लेना चाहिए। सीबी नेट, पेट के निचले हिस्से का अल्ट्रासाउंड, आदि तरीकों से इस टीबी का पता लगाया जा सकता है।
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