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काम न मिलने से पौने तीन लाख मजदूर परेशान

Sun, 08 May 2022 11:16 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 08 May 2022 11:16 PM IST
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Three and a half lakh laborers upset due to non-availability of work
अंबेडकरनगर। जिले की 902 ग्राम पंचायतों में मनरेगा के तहत सक्रिय पौने तीन लाख मजदूरों के समक्ष काम न मिलने से मौजूदा समय में आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। कारण यह है कि बीते करीब दो माह से जिले को शासन से निर्माण सामग्रियों के लिए राशि नहीं मिल सकी है। इससे लगभग सभी ग्राम पंचायतों में पक्का कार्य नहीं हो रहा है। इसके अलावा मौजूदा समय में 75 ग्राम पंचायतों में योजना के तहत किसी भी प्रकार का कार्य नहीं हो रहा है। इससे मनरेगा मजदूरों के समक्ष सुचारु रूप से काम मिलने का संकट खड़ा हो गया है।
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मनरेगा मजदूर इन दिनों काम न मिलने से आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। इसका मुख्य कारण धनाभाव है। जिले में 902 ग्राम पंचायतें हैं। इन ग्राम पंचायतों में दो लाख 72 हजार सक्रिय मनरेगा मजदूर पंजीकृत हैं। मनरेगा के तहत ग्राम पंचायतों में कच्चा व पक्का कार्य कराया जाता है। मनरेगा मजदूरों को गांव में ही 100 दिन का रोजगार देकर उन्हें मजदूरी दी जाती है। इससे मनरेगा मजदूरों को मजदूरी के लिए अन्यत्र नहीं जाना पड़ता है।
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मौजूदा समय में मनरेगा जिले में धराशायी हो गई है। कारण यह है कि दो माह से अधिक बीत गए हैं, लेकिन अब तक जिले को शासन से पूर्व में कराए गए पक्के कार्यों में लगी सामग्रियों की 10 करोड़ रुपये से अधिक की राशि नहीं उपलब्ध हो सकी है। ऐसे में धनाभाव के चलते पक्का कार्य लगभग पूरी तरह से ठप पड़ा है। मात्र मिट्टी पटाई आदि का ही कार्य चल रहा है। हालांकि 75 ग्राम पंचायतों में कच्चा व पक्का दोनों ही कार्य पूरी तरह से ठप पड़ा है। नतीजा यह है कि इसका खामियाजा मनरेगा मजदूरों को भुगतना पड़ रहा है।
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मजदूर बोले, हो रही आर्थिक समस्या
अकबरपुर की मनरेगा मजदूर ठकुरी देवी, अवतार व शन्नो ने कहा कि बीते दो माह से सुचारु रूप से योजना के तहत कार्य नहीं हो रहा है। पक्का कार्य तो पूरी तरह से ठप ही हैं। कभी-कभी कच्चा कार्य ही होता है। इससे सुचारु रूप से काम नहीं मिल रहा, जिससे विभिन्न प्रकार की आर्थिक मुश्किल हो रही है। महरुआ के मनरेगा मजदूर सीताराम, मधुर कुमार व लंबू ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि बीते दो माह से सुचारु रूप से काम नहीं मिल सका है। इससे घर का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है। जिम्मेदारों से जब भी इसे लेकर शिकायत दर्ज कराई जाती है, तो धनाभाव होने का हवाला दिया जाता है। जिम्मेदार तो यह कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं, लेकिन हम मजदूर क्या करें, इसकी सुध किसी को नहीं है।
प्रधान बोले, भुगतान न होने से नहीं हो सका पक्का कार्य
मीरपुर शेखपुर की प्रधान प्रतिभा सिंह ने कहा कि बीते वित्तीय वर्ष में मनरेगा योजना के तहत पक्का कार्य कराया गया था। इसमें लगी सामग्रियों का लगभग तीन लाख रुपये का भुगतान शासन से नहीं हो सका है। इसके चलते इस वित्तीय वर्ष में पक्का कार्य नहीं कराया गया है। अंधियरवा के ग्राम प्रधान वेदप्रकाश वर्मा ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2022-23 में अब तक एक भी पक्का कार्य नहीं कराया जा सका है। कारण यह कि बीते वित्तीय वर्ष में कराए गए पक्के कार्य का साढ़े सात लाख का भुगतान नहीं हो सका है। अफजलपुर के ग्राम प्रधान दुखराम कनौजिया ने कहा कि बीते वित्तीय वर्ष में जो पक्का कार्य कराया था, उसमें लगी सामग्रियों का लगभग छह लाख रुपये का भुगतान नहीं हुआ है। इससे इस वित्तीय वर्ष में पक्का कार्य नहीं करा रहे हैं। सिर्फ मिट्टी पटाई का कार्य ही योजना के तहत कराया जा रहा है।

शासन को भेजा गया पत्र
धनाभाव के चलते जिले की ज्यादातर ग्राम पंचायतों में मनरेगा का पक्का कार्य नहीं हो रहा है। कारण यह कि बीते वित्तीय वर्ष में कराए गए कार्य में लगी सामग्रियों का 10 करोड़ रुपये से अधिक की राशि शासन से नहीं मिली है। इसके लिए शासन को पत्र भेजा गया है। मनरेगा मजदूरों को किसी भी प्रकार की मुश्किल न हो, इसके लिए सभी ग्राम प्रधानों को दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
राजेंद्र प्रसाद मिश्र, मनरेगा उपायुक्त
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