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निजी मोबाइल नंबरों से चल रहा थानों का काम
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अंबेडकरनगर। आम जनता की मदद तय करने के लिए दिए गए सीयूजी फोन को बंद कर जिले के ज्यादातर थाना प्रभारी अपने निजी मोबाइल नंबरों के सहारे थानों का काम काज चला रहे हैं। इस काम के लिए लगभग सभी थाना प्रभारियों के पास अपने खुद के निजी प्रदाता कंपनियों से जुड़े तीन तीन निजी नंबर क्रियाशील हैं। इनमें से एक नंबर से सिर्फ अधिकारियों से बातचीत होती है तो दूसरा नंबर परिवारीजनों से बातचीत के लिए है। तीसरा सबसे ज्यादा कॉमन नंबर थाने से जुड़े काम काज के लिए स्टाफ के लोगों तक सीमित है। आम लोगों के इस्तेमाल में आने वाला मित्र पुलिस का सीयूजी नंबर अधिकांश तौर पर काम नहीं करता। थानेदारों के तीनों निजी नंबर आम नागरिकों के पास उपलब्ध न होने से इसका सीधा खामियाजा पीड़ितों को भुगतना पड़ता है।
जनसमुदाय की सुविधा के लिए त्वरित स्तर पर पुलिस से शिकायत कर मदद पाने के लिए सभी थाना प्रभारियों व कोतवाल को सीयूजी नंबर की सुविधा उपलब्ध करायी गयी थी। बीएसएनएल से जुड़े इन सीयूजी नंबर को लेकर मित्र पुलिस के ज्यादातर थाना प्रभारी पूरी तरह बेपरवाह हैं। आम नागरिकों से संपर्क न हो सके इसके लिए सूत्रों के अनुसार फोन को अक्सर फ्लाइट मोड में कर दिया जाता है।
कई थानों में तो जानबूझ कर सीयूजी नंबर वाले फोन को ऐसे स्थान पर रख दिया जाता है, जहां नेटवर्क कम रहता है। इसके उलट निजी नंबरों को लेकर थाना प्रभारियों का मोह कुछ ज्यादा ही बढ़ चढ़कर दिखाई पड़ता है। सीयूजी फोन पर नेटवर्क आने को लेकर थाना प्रभारी भले ही गंभीर न रहे लेकिन उनके निजी नंबरों पर नेटवर्क हमेशा बना रहे इस पर पूरा फोकस रहता है। इसके चलते ही वर्तमान में पुलिस थानों में काम काज की पूरी बागडोर निजी नंबरों के जरिए संचालित हो रही है। जिले के सभी 18 थानों में से इक्का दुक्का को छोड़ बाकी सभी के कोतवाल व थाना प्रभारी निजी तौर पर तीन तीन मोबाइल नंबर प्रयोग में ला रहे हैं। इन्हीं तीनों नंबरों से थाने का संचालन करने के साथ ही निजी काम काज को भी निपटाया जाता है।
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इधर बजी घंटी, उधर बोले जय हिंद सर
सीयूजी फोन को लेकर थाना प्रभारियों द्वारा बरती जा रही मनमानी के साथ ही खुद के निजी नंबरों को अलग से महत्व दिया जाता है। इसके लिए विभाग से जुड़े आला अफसरों से बातचीत के लिए खास तौर पर अलग से एक निजी नंबर सबने ले रखा है। एसपी से लेकर एएसपी, सीओ के लिए एक खास नंबर है। इस पर घंटी बजते ही सभी थाना प्रभारी फौरन जयहिंद की मुद्रा में आ जाते हैं। एक से दो घंटी में ही यह फोन उठ जाता है। इस नंबर पर कभी कोई नेटवर्क फाल्ट भी दिखायी नहीं देती। सूत्रों की मानें तो इसके साथ ही सभी ने एक और निजी नंबर अपने परिवारों व रिश्तेदारों के लिए ले रखा है। इस नंबर से सिर्फ उनसे ही बातचीत होती है। थाने से जुड़े खास किस्म के लोगों के लिए सभी थाना प्रभारियों व कोतवाल के पास एक अलग नंबर होता है। इसके माध्यम से ही थानों से जुड़े तमाम काम निपटाया जाता है। लेकिन आम नागरिकों के हिस्से में उपयोग के लिए आता है कभी न उठने वाला विभाग की तरफ से मिला सीयूजी नंबर।
सख्ती से होगी सीयूजी की निगरानी
जनसमुदाय को परेशानी से बचाने के लिए थानेदारों व कोतवालों को पुलिस विभाग की तरफ से विशेषतौर पर सीयूजी नंबर दिए गए हैं। इन नंबरों पर की जाने वाली कॉल को उठाने में लापरवाही बरतने की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए इनके क्रियाशील रहने की निगरानी अब पूरी सख्ती के साथ करायी जाएगी। सीयूजी नंबर पर आने वाले कॉल के निस्तारण में कोई भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।
संजय राय, एएसपी
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जनसमुदाय की सुविधा के लिए त्वरित स्तर पर पुलिस से शिकायत कर मदद पाने के लिए सभी थाना प्रभारियों व कोतवाल को सीयूजी नंबर की सुविधा उपलब्ध करायी गयी थी। बीएसएनएल से जुड़े इन सीयूजी नंबर को लेकर मित्र पुलिस के ज्यादातर थाना प्रभारी पूरी तरह बेपरवाह हैं। आम नागरिकों से संपर्क न हो सके इसके लिए सूत्रों के अनुसार फोन को अक्सर फ्लाइट मोड में कर दिया जाता है।
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कई थानों में तो जानबूझ कर सीयूजी नंबर वाले फोन को ऐसे स्थान पर रख दिया जाता है, जहां नेटवर्क कम रहता है। इसके उलट निजी नंबरों को लेकर थाना प्रभारियों का मोह कुछ ज्यादा ही बढ़ चढ़कर दिखाई पड़ता है। सीयूजी फोन पर नेटवर्क आने को लेकर थाना प्रभारी भले ही गंभीर न रहे लेकिन उनके निजी नंबरों पर नेटवर्क हमेशा बना रहे इस पर पूरा फोकस रहता है। इसके चलते ही वर्तमान में पुलिस थानों में काम काज की पूरी बागडोर निजी नंबरों के जरिए संचालित हो रही है। जिले के सभी 18 थानों में से इक्का दुक्का को छोड़ बाकी सभी के कोतवाल व थाना प्रभारी निजी तौर पर तीन तीन मोबाइल नंबर प्रयोग में ला रहे हैं। इन्हीं तीनों नंबरों से थाने का संचालन करने के साथ ही निजी काम काज को भी निपटाया जाता है।
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इधर बजी घंटी, उधर बोले जय हिंद सर
सीयूजी फोन को लेकर थाना प्रभारियों द्वारा बरती जा रही मनमानी के साथ ही खुद के निजी नंबरों को अलग से महत्व दिया जाता है। इसके लिए विभाग से जुड़े आला अफसरों से बातचीत के लिए खास तौर पर अलग से एक निजी नंबर सबने ले रखा है। एसपी से लेकर एएसपी, सीओ के लिए एक खास नंबर है। इस पर घंटी बजते ही सभी थाना प्रभारी फौरन जयहिंद की मुद्रा में आ जाते हैं। एक से दो घंटी में ही यह फोन उठ जाता है। इस नंबर पर कभी कोई नेटवर्क फाल्ट भी दिखायी नहीं देती। सूत्रों की मानें तो इसके साथ ही सभी ने एक और निजी नंबर अपने परिवारों व रिश्तेदारों के लिए ले रखा है। इस नंबर से सिर्फ उनसे ही बातचीत होती है। थाने से जुड़े खास किस्म के लोगों के लिए सभी थाना प्रभारियों व कोतवाल के पास एक अलग नंबर होता है। इसके माध्यम से ही थानों से जुड़े तमाम काम निपटाया जाता है। लेकिन आम नागरिकों के हिस्से में उपयोग के लिए आता है कभी न उठने वाला विभाग की तरफ से मिला सीयूजी नंबर।
सख्ती से होगी सीयूजी की निगरानी
जनसमुदाय को परेशानी से बचाने के लिए थानेदारों व कोतवालों को पुलिस विभाग की तरफ से विशेषतौर पर सीयूजी नंबर दिए गए हैं। इन नंबरों पर की जाने वाली कॉल को उठाने में लापरवाही बरतने की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए इनके क्रियाशील रहने की निगरानी अब पूरी सख्ती के साथ करायी जाएगी। सीयूजी नंबर पर आने वाले कॉल के निस्तारण में कोई भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।
संजय राय, एएसपी