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Ambedkar Nagar News: टांडा चेयरमैन ने ससुराल वालों पर लगाया संपत्ति हड़पने का आरोप
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शबाना नाज, नगर पालिका अध्यक्ष टांडा।
विद्युतनगर/टांडा। नगर पालिका टांडा की अध्यक्ष शबाना नाज ने अपने पति मोहम्मद अयाज उर्फ गुल्लू की हत्या के दोषी उबैदुर्रहमान को सजा मिलने के बाद रविवार को मीडिया से बातचीत की। उन्होंने न्यायपालिका पर भरोसा जताया। साथ ही चेयरमैन पद को लेकर चल रहे पारिवारिक विवाद और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों पर भी सफाई दी। उन्होंने परिवार के कुछ सदस्यों पर संपत्ति और नकदी हड़पने के गंभीर आरोप भी लगाए।
शबाना नाज ने कहा कि चुनाव जीतने के बाद करीब एक साल तक उनके देवर और जेठ ही पालिका का कामकाज देखते रहे। ईओ से विवाद के बाद तत्कालीन डीएम ने उन्हें खुद पालिका की जिम्मेदारी संभालने को कहा। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष पद की सांविधानिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी उनकी है, इसलिए उन्होंने स्वयं कामकाज संभाला।
अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि पति की मौत के करीब एक माह के भीतर परिवार के लोगों ने उनसे 50 से अधिक संपत्तियों के दस्तावेज, स्टांप पेपर और करीब 2500 ब्लैंक चेक पर हस्ताक्षर करा लिए। उन्होंने करीब एक करोड़ रुपये के बीमा के पैसे को लेने और लखनऊ स्थित दिवंगत पति के फ्लैट को बच्चों के नाम कराने के बजाय देवर जावेद के नाम कराने के प्रयास का भी आरोप लगाया।
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खाते में मिले सिर्फ 400 रुपये
अध्यक्ष के मुताबिक उनके बैंक खाते का संचालन भी परिवार के लोग कर रहे थे। करीब एक साल बाद एटीएम कार्ड वापस लेने पर खाते में सिर्फ 400 रुपये मिले। उन्होंने दावा किया कि बैंक स्टेटमेंट में करीब 90 लाख रुपये दूसरे खातों में ट्रांसफर होने की जानकारी सामने आई। चुनाव खर्च के नाम पर 80 लाख रुपये मांगने और दिवंगत पति की लाइसेंसी बंदूक अपने नाम कराने का भी ससुराल वालों पर आरोप लगाया। पालिका अध्यक्ष ने कहा कि एक महिला को पीछे हटाने के लिए उसके चरित्र पर सवाल उठाने का प्रयास किया गया।
वित्तीय अनियमितता के आरोपों पर सफाई
पालिका अध्यक्ष ने विपक्षी सभासदों की ओर से लगाए गए आरोपों पर सफाई देते हुए कहा कि कुल 12 आरोपों में चार को ही आगे बढ़ाया गया है। उन्होंने अपने पूरे कार्यकाल में किसी भी वित्तीय अनियमितता से इन्कार किया। हाउस टैक्स के मामले में कहा कि जनता की आपत्तियों के चलते नियमावली स्थगित कर सात सदस्यीय कमेटी बनाई गई थी। अकबरपुर की तुलना में टांडा में टैक्स की दर कम है। ठेकेदार से धन उगाही के आरोप को खारिज करते हुए कहा कि भुगतान काम की गुणवत्ता की शिकायत पर रोका गया था। टेंडर निरस्त करने के मामले में डीएम ने त्रिस्तरीय जांच कराई थी और री-टेंडर की अनुमति के बाद प्रक्रिया आगे बढ़ी। 22 तारीख को आने वाले फैसले के संबंध में उन्होंने कहा कि गलत कार्रवाई हुई तो ऊपरी अदालत का दरवाजा खटखटाएंगी।
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शबाना नाज ने कहा कि चुनाव जीतने के बाद करीब एक साल तक उनके देवर और जेठ ही पालिका का कामकाज देखते रहे। ईओ से विवाद के बाद तत्कालीन डीएम ने उन्हें खुद पालिका की जिम्मेदारी संभालने को कहा। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष पद की सांविधानिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी उनकी है, इसलिए उन्होंने स्वयं कामकाज संभाला।
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अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि पति की मौत के करीब एक माह के भीतर परिवार के लोगों ने उनसे 50 से अधिक संपत्तियों के दस्तावेज, स्टांप पेपर और करीब 2500 ब्लैंक चेक पर हस्ताक्षर करा लिए। उन्होंने करीब एक करोड़ रुपये के बीमा के पैसे को लेने और लखनऊ स्थित दिवंगत पति के फ्लैट को बच्चों के नाम कराने के बजाय देवर जावेद के नाम कराने के प्रयास का भी आरोप लगाया।
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खाते में मिले सिर्फ 400 रुपये
अध्यक्ष के मुताबिक उनके बैंक खाते का संचालन भी परिवार के लोग कर रहे थे। करीब एक साल बाद एटीएम कार्ड वापस लेने पर खाते में सिर्फ 400 रुपये मिले। उन्होंने दावा किया कि बैंक स्टेटमेंट में करीब 90 लाख रुपये दूसरे खातों में ट्रांसफर होने की जानकारी सामने आई। चुनाव खर्च के नाम पर 80 लाख रुपये मांगने और दिवंगत पति की लाइसेंसी बंदूक अपने नाम कराने का भी ससुराल वालों पर आरोप लगाया। पालिका अध्यक्ष ने कहा कि एक महिला को पीछे हटाने के लिए उसके चरित्र पर सवाल उठाने का प्रयास किया गया।
वित्तीय अनियमितता के आरोपों पर सफाई
पालिका अध्यक्ष ने विपक्षी सभासदों की ओर से लगाए गए आरोपों पर सफाई देते हुए कहा कि कुल 12 आरोपों में चार को ही आगे बढ़ाया गया है। उन्होंने अपने पूरे कार्यकाल में किसी भी वित्तीय अनियमितता से इन्कार किया। हाउस टैक्स के मामले में कहा कि जनता की आपत्तियों के चलते नियमावली स्थगित कर सात सदस्यीय कमेटी बनाई गई थी। अकबरपुर की तुलना में टांडा में टैक्स की दर कम है। ठेकेदार से धन उगाही के आरोप को खारिज करते हुए कहा कि भुगतान काम की गुणवत्ता की शिकायत पर रोका गया था। टेंडर निरस्त करने के मामले में डीएम ने त्रिस्तरीय जांच कराई थी और री-टेंडर की अनुमति के बाद प्रक्रिया आगे बढ़ी। 22 तारीख को आने वाले फैसले के संबंध में उन्होंने कहा कि गलत कार्रवाई हुई तो ऊपरी अदालत का दरवाजा खटखटाएंगी।