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स्टाफ की कमी से जूझ रहा पीएचसी
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अंबेडकरनगर। पीएचसी जमुनीपुर अव्यवस्थाओं व स्टॉफ की कमी से जूझ रहा है। जर्जर हो चुके अस्पताल में प्रतिदिन औसतन 40 मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं, लेकिन उन्हें विभिन्न मुश्किलों से संघर्ष करना पड़ता है। अस्पताल में न तो साफ सफाई पर ध्यान दिया जा रहा है और न ही पेयजल व प्रकाश की ही समुचित व्यवस्था है। अस्पताल में बने शौचालय पूरी तरह निष्प्रयोज्य हो चुके हैं। अस्पताल में वार्ड ब्वाय, स्वीपर व वार्ड आया का एक-एक पद लंबे समय से रिक्त चल रहा है, लेकिन इस पर तैनाती की सुध नहीं ली जा रही है। समुचित व्यवस्था उपलब्ध कराए जाने की मांग लंबे समय से ग्रामीणों की ओर से की जा रही है, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। नतीजा यह है कि इसका खामियाजा मरीजों व उनके तीमारदारों को भुगतना पड़ रहा है।
मरीजों व उनके तीमारदारों को समुचित इलाज के लिए इधर-उधर की दौड़ न लगानी पड़े, इसके लिए जमुनीपुर में पीएचसी की स्थापना की गई थी। शुरुआती दौर से ही उपेक्षा व देखरेख के अभाव में भवन समय बीतने के साथ ही जर्जर होने लगा। मौजूदा समय में आलम यह है कि न सिर्फ दीवारों, बल्कि छत में दरारें उत्पन्न हो गई हैं। कर्मचारियों के आवास पूरी तरह झाड़ियों की चपेट में हैं। सफाई पूरी तरह बेपटरी हो चुकी है। दरअसल अस्पताल में स्वीपर का एक पद है, जो लंबे समय से रिक्त चल रहा है। इसके चलते ही सफाई व्यवस्था बेपटरी है। न तो प्रकाश और न ही पेयजल की समुचित व्यवस्था है। एकमात्र हैंडपंप लंबे समय से खराब है। ऐसे में कर्मचारियों व चिकित्सक को पानी की व्यवस्था खुद ही करनी पड़ती है।
अस्पताल में बाउंड्रीवाल नहीं है। इससे अक्सर आवारा पशु अस्पताल में पहुंच जाते हैं, जिससे मरीजों व तीमारदारों को दिक्कतें होती हैं। उपेक्षा का आलम तब है, जबकि प्रतिदिन औसतन 40 मरीज इलाज के लिए अस्पताल पहुंचते हैं। यहां चिकित्सक के रूप में डॉ. पुष्पेंद्र की तैनाती है। ग्रामीणों के अनुसार अक्सर चिकित्सक अस्पताल आते ही नहीं हैं। ऐसे में इलाज की जिम्मेदारी फार्मासिस्ट राजेश श्रीवास्तव पर रहती है। अस्पताल में एक वार्ड ब्वाय, एक आया व एक स्वीपर का पद है, जो लंबे समय से रिक्त चल रहा है।
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शासन को भेजा गया है पत्र
रिक्त चल रहे पदों पर तैनाती के लिए शासन को पत्र भेजा गया है। अस्पताल में आने वाले मरीजों का बेहतर ढंग से इलाज सुनिश्चित हो सके, इसके लिए सभी जरूरी व्यवस्थाएं की गई हैं।
डॉ. अशोक कुमार, सीएमओ
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मरीजों व उनके तीमारदारों को समुचित इलाज के लिए इधर-उधर की दौड़ न लगानी पड़े, इसके लिए जमुनीपुर में पीएचसी की स्थापना की गई थी। शुरुआती दौर से ही उपेक्षा व देखरेख के अभाव में भवन समय बीतने के साथ ही जर्जर होने लगा। मौजूदा समय में आलम यह है कि न सिर्फ दीवारों, बल्कि छत में दरारें उत्पन्न हो गई हैं। कर्मचारियों के आवास पूरी तरह झाड़ियों की चपेट में हैं। सफाई पूरी तरह बेपटरी हो चुकी है। दरअसल अस्पताल में स्वीपर का एक पद है, जो लंबे समय से रिक्त चल रहा है। इसके चलते ही सफाई व्यवस्था बेपटरी है। न तो प्रकाश और न ही पेयजल की समुचित व्यवस्था है। एकमात्र हैंडपंप लंबे समय से खराब है। ऐसे में कर्मचारियों व चिकित्सक को पानी की व्यवस्था खुद ही करनी पड़ती है।
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अस्पताल में बाउंड्रीवाल नहीं है। इससे अक्सर आवारा पशु अस्पताल में पहुंच जाते हैं, जिससे मरीजों व तीमारदारों को दिक्कतें होती हैं। उपेक्षा का आलम तब है, जबकि प्रतिदिन औसतन 40 मरीज इलाज के लिए अस्पताल पहुंचते हैं। यहां चिकित्सक के रूप में डॉ. पुष्पेंद्र की तैनाती है। ग्रामीणों के अनुसार अक्सर चिकित्सक अस्पताल आते ही नहीं हैं। ऐसे में इलाज की जिम्मेदारी फार्मासिस्ट राजेश श्रीवास्तव पर रहती है। अस्पताल में एक वार्ड ब्वाय, एक आया व एक स्वीपर का पद है, जो लंबे समय से रिक्त चल रहा है।
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शासन को भेजा गया है पत्र
रिक्त चल रहे पदों पर तैनाती के लिए शासन को पत्र भेजा गया है। अस्पताल में आने वाले मरीजों का बेहतर ढंग से इलाज सुनिश्चित हो सके, इसके लिए सभी जरूरी व्यवस्थाएं की गई हैं।
डॉ. अशोक कुमार, सीएमओ