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बुन रहे हैं जाल लोग खुद फंसने के लिए...

Sun, 02 Jan 2022 11:51 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 02 Jan 2022 11:51 PM IST
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People are weaving nets to get themselves trapped...
अंबेडकरनगर जिला मुख्यालय पर आयोजित कवि गोष्ठी में सम्मानित कवि व शायर। - फोटो : AMBEDKAR NAGAR
अंबेडकरनगर। अकबरपुर तहसील क्षेत्र में अमरौला रोड स्थित विवेकानंद दिव्य शिक्षण संस्थान में नववर्ष के स्वागत पर कवि गोष्ठी एवं साहित्यकार सम्मान समारोह का आयोजन हुआ। इसमें कई प्रसिद्ध कवियों ने रचनाएं प्रस्तुत कीं। बाद में वरिष्ठ साहित्यकारों को सम्मानित भी किया गया।
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कवि गोष्ठी का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर किया गया। सुल्तानपुर जनपद से आए वरिष्ठ साहित्यकार विजय शंकर मिश्र भास्कर की अध्यक्षता में आयोजित कवि गोष्ठी में कई प्रसिद्ध कवियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। युवा कवि तारकेश्वर मिश्र जिज्ञासु के संचालन में आयोजित कार्यक्रम में उदय नरायन सिंह ने वाणी वंदना प्रस्तुत की। जहांगीरगंज से आए गीतकार संतोष श्रीकंठ ने पढ़ा कि चैन चुरा के मेरा वो मुझे आराम करने को कहती है, वह लड़की अपने गांव में मुुझे एक शाम ठहरने को कहती है। टांडा से आए कवि डॉ. मनीराम वर्मा ने पढ़ा कि फूल की तलाश में दुकूल भूल गया, शर्वरी की चाह में विभावरी में रह गया।
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बाराबंकी के कवि कौशल सिंह सूर्यवंशी ने पढ़ा कि सब जन बजाओ ताली कि आई अब कौशल की बारी। रसों में करने सराबोर कि आई अब कवियों की बारी। जौनपुर से आए कवि अच्छेलाल राही ने सवैया छंद पढ़कर सभी को भावविभोर कर दिया। कहा कि भाव में जहां अभाव रहे, भगवान करे नहीं आवे बुढ़उती। आजमगढ़ से आए उदय नरायनण सिंह निर्झर ने कुछ इस प्रकार से अपनी कविता को प्रस्तुत किया। कहा कि बुन रहे हैं जाल खुद फंसने के लिए लोग, दलदल में मूद खड़े हैं धंसने के लिए लोग। लोकहित में शिव ने कभी विषपान किया था, अब पी रहे हैं निर्झर अपनों को डसने के लिए लोग।
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शायर शूबी हसन ने कहा कि मेरी तमन्ना मिले मुझको ऐसा हमराही, जो मुझको दिल में बसाए तो बात और भी हो। मुझे बुला के आशियां पे अपने वो रहबर। और मुझसे मिलने न आए, तो बात और भी हो। टांडा से आए कवि प्रदीप मांझी ने पढ़ा कि मिट्टी की जां लेकर नदी की गहर में खड़ा हूं, तेरी ही बनाई दुनिया में तेरे ही सामने खड़ा हूं। तारकेश्व जिज्ञासु ने पढ़ा कि मस्त इमारत शहर की कैसे करूं बयां, वैसे अपने गांव में हर घर की है शान।

कवि संजय सवेरा ने पढ़ा कि वो मुझे खरीदने की चाहत रखते हैं, मगर नादान से हैं। मेरा पता बता दो उन्हें कोई, हम सिपाही नागार्जुन अदम के खानदान से हैं। अध्यक्षता कर रहे कवि विजय शंकर मिश्र भास्कर ने पढ़ा कि मंगलमय हो विश्व को नया आंग्ल नव वर्ष। विश्व पटल पर प्रभु कृपा बरसे लेकर हर्ष। इसके अलावा कई अन्य शायरों व कवियों ने भी अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं।
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