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Ambedkar Nagar News: टांडा कोतवाली के निर्माणाधीन आवासों में गड़बड़ी, एई निलंबित

Fri, 25 Sep 2026 10:39 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 25 Sep 2026 10:39 PM IST
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Irregularities in under-construction housing at Tanda Kotwali; Assistant Engineer suspended.
टांडा कोतवाली परिसर में निर्माणाधीन आवास। संवाद
टांडा। टांडा कोतवाली परिसर में निर्माणाधीन टाइप-बी के 40 आवासीय भवनों के निर्माण में मिली गंभीर अनियमितताओं के मामले में शासन ने शुक्रवार को बड़ी कार्रवाई की। ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के सहायक अभियंता (एई) वीरेंद्र कुमार पांडेय को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। वहीं प्रभारी अधिशासी अभियंता शैलेन्द्र चौधरी से 15 दिन के भीतर प्रमाणिक साक्ष्यों के साथ लिखित जवाब मांगा गया है। इससे पहले मामले में दो अवर अभियंताओं को निलंबित किया जा चुका है।
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ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के निदेशक व मुख्य अभियंता आरके वर्मा ने नौ सितंबर को टांडा कोतवाली परिसर में निर्माणाधीन आवासों का निरीक्षण किया था। इस दौरान निर्माण कार्य में कई गंभीर कमियां मिली थीं। लापरवाही मिलने पर उसी दिन टांडा के अवर अभियंता मनीष पटेल और आलापुर के अवर अभियंता अरुण मौर्या को निलंबित कर दिया गया था। अब प्रथम दृष्ट्या एई वीरेंद्र कुमार पांडेय को भी इसके लिए उत्तरदायी मानते हुए कार्रवाई की गई है।
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निलंबन अवधि में एई को ग्रामीण अभियंत्रण विभाग मुख्यालय, लखनऊ से संबद्ध किया गया है। मामले की विभागीय जांच के लिए मुख्य अभियंता (पश्चिमी क्षेत्र), ग्रामीण अभियंत्रण विभाग, लखनऊ को जांच अधिकारी नामित किया गया है। वहीं उपसचिव फूलचंद यादव ने प्रभारी अधिशासी अभियंता शैलेन्द्र चौधरी को पदीय दायित्वों और कर्तव्यों के निर्वहन में शिथिलता व उदासीनता बरतने के संबंध में 15 दिन के भीतर लिखित जवाब देने के निर्देश दिए हैं।
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सीमेंट-कंक्रीट की मजबूती की जांच तक नहीं
निरीक्षण के दौरान पाया गया कि आरसीसी निर्माण में इस्तेमाल सीमेंट-कंक्रीट की कंप्रेसिव स्ट्रेंथ की निर्धारित फ्रीक्वेंसी के अनुसार जांच नहीं कराई गई थी। निर्माण में प्रयुक्त अन्य सामग्रियों का भी नियमानुसार परीक्षण नहीं कराया गया। निर्माण कार्य की गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के लिए रखी गई पंजिकाओं में अप्रैल के बाद कोई प्रविष्टि नहीं मिली।

इसके अलावा अनुबंध के अनुसार कार्यस्थल पर संबंधित फर्म के तकनीकी स्टाफ की संख्या भी पूरी नहीं थी। निरीक्षण के समय केवल दो इंजीनियर काम करते मिले, जबकि स्थलीय प्रयोगशाला में अनुबंध के मुताबिक कोई अलग तकनीकी स्टाफ मौजूद नहीं था। निर्माण की प्रगति भी निर्धारित माइलस्टोन की तुलना में काफी कम पाई गई। मुख्य अभियंता आरके वर्मा ने बताया कि प्रथम दृष्ट्या लापरवाही मिलने पर एई को निलंबित किया गया है।
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