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Ambedkar Nagar News: आलू और फूल वाली फसलों को लेकर बढ़ी चिंता
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अंबेडकरनगर । सर्द हवा व बढ़ती गलन ने जिले के लगभग पौने चार लाख किसानों की चिंता बढ़ा दी है। आलू की फसल पर जहां पाला पड़ने लगा है तो वहीं फूल वाली फसलों से फूलों के झड़ने की आशंका बढ़ गई है। बारिश होने की दशा में उन गेहूं की फसल को भी नुकसान हो सकता है जिसकी बीते दिनों ही किसानों ने सिंचाई की है।
पहले से ही कई प्रकार की मुश्किलों से संघर्ष कर रहे किसानों की समस्या लगातार बदलते मौसम ने बढ़ा दी है। एक दिन पहले सोमवार को दिन में धूप निकली तो लगा सब कुछ सामान्य हो जाएगा लेकिन मंगलवार को एक बार फिर से मौसम खराब हो गया। सर्द हवा के बीच गलन बढ़ गई। पूरे दिन धूप भी नहीं निकली। इससे आलू, सरसों, मटर, अरहर व गेहूं के किसानों की चिंता बढ़ गई।
आलू की फसल पर पाला पड़ने लगा है। 1050 हेक्टेअर क्षेत्रफल में आलू की बोआई करने वाले लगभग 12 हजार किसान इससे चिंतित हो उठे हैं। यदि ऐसा ही मौसम आगे रहा तो फसल को नुकसान होने की आशंका है। पांच हजार 413 हेक्टेअर क्षेत्रफल में बोई गई मटर, 13 हजार 198 हेक्टेअर क्षेत्रफल में सरसों, 1578 हेक्टेअर क्षेत्र में चना, 394 हेक्टेअर मसूर, 963 हेक्टेअर क्षेत्रफल में जौ पर भी मौसम की मार पड़ने की संभावना बढ़ गई है। एक लाख 18 हजार 494 हेक्टेअर क्षेत्रफल में गेहूं की बोआई की गई है। इस पर मौसम का विशेष असर तो नहीं है लेकिन यदि बारिश हुई तो उन किसानों को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है जिन्होंने बीते दिनों ही सिंचाई की है।
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नमीं से नहीं पड़ेगा पाला
जिला कृषि अधिकारी पीयूष राय ने बताया कि आलू की फसल को पाले से बचाने के लिए उसकी सिंचाई करनी चाहिए। खेत में यदि नमीं होगी तो इससे उस पर पाला नहीं पड़ेगा। इसके साथ ही फूल वाली फसलों की भी सिंचाई करें। साथ ही राख का छिड़काव भी करें। गेहूं की फसल को अभी मौसम से कोई नुकसान नहीं है।
अस्त व्यस्त हुआ जनजीवन
मंगलवार को अत्यंत खराब हुए मौसम का प्रतिकूल प्रभाव आम जनजीवन पर भी पड़ा। सर्द हवा व गलन से लोग ठिठुर उठे। सोमवार को तो दोपहर करीब निकली धूप ने कुछ राहत भी दी थी लेकिन मंगलवार को पूरे दिन धूप नहीं निकली। पूरे दिन कोहरे का असर बना रहा। ठंड और गलन से लोग कांपते दिखे। अलाव की संख्या तो पर्याप्त दिखी लेकिन ठंड के आगे वह प्रबंध भी बेअसर साबित होता रहा।
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पहले से ही कई प्रकार की मुश्किलों से संघर्ष कर रहे किसानों की समस्या लगातार बदलते मौसम ने बढ़ा दी है। एक दिन पहले सोमवार को दिन में धूप निकली तो लगा सब कुछ सामान्य हो जाएगा लेकिन मंगलवार को एक बार फिर से मौसम खराब हो गया। सर्द हवा के बीच गलन बढ़ गई। पूरे दिन धूप भी नहीं निकली। इससे आलू, सरसों, मटर, अरहर व गेहूं के किसानों की चिंता बढ़ गई।
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आलू की फसल पर पाला पड़ने लगा है। 1050 हेक्टेअर क्षेत्रफल में आलू की बोआई करने वाले लगभग 12 हजार किसान इससे चिंतित हो उठे हैं। यदि ऐसा ही मौसम आगे रहा तो फसल को नुकसान होने की आशंका है। पांच हजार 413 हेक्टेअर क्षेत्रफल में बोई गई मटर, 13 हजार 198 हेक्टेअर क्षेत्रफल में सरसों, 1578 हेक्टेअर क्षेत्र में चना, 394 हेक्टेअर मसूर, 963 हेक्टेअर क्षेत्रफल में जौ पर भी मौसम की मार पड़ने की संभावना बढ़ गई है। एक लाख 18 हजार 494 हेक्टेअर क्षेत्रफल में गेहूं की बोआई की गई है। इस पर मौसम का विशेष असर तो नहीं है लेकिन यदि बारिश हुई तो उन किसानों को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है जिन्होंने बीते दिनों ही सिंचाई की है।
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नमीं से नहीं पड़ेगा पाला
जिला कृषि अधिकारी पीयूष राय ने बताया कि आलू की फसल को पाले से बचाने के लिए उसकी सिंचाई करनी चाहिए। खेत में यदि नमीं होगी तो इससे उस पर पाला नहीं पड़ेगा। इसके साथ ही फूल वाली फसलों की भी सिंचाई करें। साथ ही राख का छिड़काव भी करें। गेहूं की फसल को अभी मौसम से कोई नुकसान नहीं है।
अस्त व्यस्त हुआ जनजीवन
मंगलवार को अत्यंत खराब हुए मौसम का प्रतिकूल प्रभाव आम जनजीवन पर भी पड़ा। सर्द हवा व गलन से लोग ठिठुर उठे। सोमवार को तो दोपहर करीब निकली धूप ने कुछ राहत भी दी थी लेकिन मंगलवार को पूरे दिन धूप नहीं निकली। पूरे दिन कोहरे का असर बना रहा। ठंड और गलन से लोग कांपते दिखे। अलाव की संख्या तो पर्याप्त दिखी लेकिन ठंड के आगे वह प्रबंध भी बेअसर साबित होता रहा।