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तीन वर्ष पूर्व ताबड़तोड़ फायरिंग में बच गई थी जान
Updated Tue, 16 Oct 2018 01:01 AM IST
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टांडा (अंबेडकरनगर)। तीन वर्ष पूर्व हुए जानलेवा हमले में बसपा नेता जुरगाम मेहदी की जान बच गई थी, जबकि उन्हें सात गोलियां लगी थीं। बदमाशों को इस बार कोई चूक न करने का निर्देश था। इसका पालन भी हुआ। इसी के चलते इस बार उन्हें अपनी जान गंवा देनी पड़ी। बदमाशों की फायरिंग में इस बार उन्हें पांच गोली लगी।
हंसवर थाना क्षेत्र के नसीराबाद गांव निवासी जुरगाम मेहदी व इसी थाना क्षेत्र के हरसम्हार गांव निवासी माफिया खान मुबारक के बीच लंबे समय से अदावत चली आ रही। अपराध के क्षेत्र में तेजी से उभरे खान मुबारक के तमाम कार्यों में जुरगाम द्वारा आमलोगों की तरफ से दखलअंदाजी की जाती रही। इसके चलते ही धीरे धीरे दोनों के बीच दुश्मनी का दौर शुरू हो गया। खान मुबारक ने बसपा नेता को रास्ते से हटाने के लिए 28 अप्रैल 2015 की देर शाम उस समय मुंडेरा गांव के निकट ताबड़तोड़ हमला करा दिया था, जब वे एक वाहन से गांव लौट रहे थे। बदमाशों ने इस तरह अंधाधुंध फायरिंग की थी कि बसपा नेता को सात गोलियां लगी थीं। वाहन गोलियों से छलनी हो गया था। उस समय इलाज के बाद उनकी जान बच गई थी। बसपा नेता की जान बचने को हर कोई किसी बड़े चमत्कार से कम नहीं मान रहा था। मौके से एक हमलावर मऊ निवासी नवनीत मिश्र को पकड़ लिया गया था। पुलिस ने खान मुबारक समेत कई लोगों के विरुद्ध मामले में केस दर्ज किया था।
लगभग तीन वर्ष बाद अब सोमवार को एक बार फिर से बसपा नेता पर जानलेवा हमला कराया गया। बदमाशों ने इस बार सटीक निशाना लगाकर फायरिंग की और मौत के घाट उतार दिया। पिछली बार जुरगाम को जहां सात गोलियां लगी थीं, वहीं इस बार पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पाया गया कि उन्हें कुल पांच गोली मारी गई।
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हंसवर थाना क्षेत्र के नसीराबाद गांव निवासी जुरगाम मेहदी व इसी थाना क्षेत्र के हरसम्हार गांव निवासी माफिया खान मुबारक के बीच लंबे समय से अदावत चली आ रही। अपराध के क्षेत्र में तेजी से उभरे खान मुबारक के तमाम कार्यों में जुरगाम द्वारा आमलोगों की तरफ से दखलअंदाजी की जाती रही। इसके चलते ही धीरे धीरे दोनों के बीच दुश्मनी का दौर शुरू हो गया। खान मुबारक ने बसपा नेता को रास्ते से हटाने के लिए 28 अप्रैल 2015 की देर शाम उस समय मुंडेरा गांव के निकट ताबड़तोड़ हमला करा दिया था, जब वे एक वाहन से गांव लौट रहे थे। बदमाशों ने इस तरह अंधाधुंध फायरिंग की थी कि बसपा नेता को सात गोलियां लगी थीं। वाहन गोलियों से छलनी हो गया था। उस समय इलाज के बाद उनकी जान बच गई थी। बसपा नेता की जान बचने को हर कोई किसी बड़े चमत्कार से कम नहीं मान रहा था। मौके से एक हमलावर मऊ निवासी नवनीत मिश्र को पकड़ लिया गया था। पुलिस ने खान मुबारक समेत कई लोगों के विरुद्ध मामले में केस दर्ज किया था।
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लगभग तीन वर्ष बाद अब सोमवार को एक बार फिर से बसपा नेता पर जानलेवा हमला कराया गया। बदमाशों ने इस बार सटीक निशाना लगाकर फायरिंग की और मौत के घाट उतार दिया। पिछली बार जुरगाम को जहां सात गोलियां लगी थीं, वहीं इस बार पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पाया गया कि उन्हें कुल पांच गोली मारी गई।
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