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यातायात नियमों की अनदेखी ने असमय निगल लीं 79 जानें
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अंबेडकरनगर। मंजिल तक पहुंचने की जल्दबाजी व यातायात नियमों की अनदेखी ने बीते पांच महीने के भीतर 79 जिंदगियों को असमय ही निगल लिया। यातायात विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, जिले में एक जनवरी, 2019 से 31 मई तक पांच माह में 119 स्थानों पर बाइक व चार पहिया वाहन से हादसे हुए। इसमें 79 लोगों की मौत हुई।
वहीं, 135 लोग ऐसे भी हैं जो घायल होने के बाद लंबे समय तक जीवन और मौत के बीच अस्पतालों में संघर्ष करते रहे। कई तो स्वस्थ हो गए तो बहुत से लोग शरीर के अमूल्य अंगों को गवां बैठे। शिक्षित समाज के बीच इस तरह बढ़ रहे सड़क हादसे न सिर्फ उनकी शिक्षा पर सवाल उठाते हैं, बल्कि दुर्घटनाओं को रोकने के लिए जिम्मेदार संबंधित महकमों की लापरवाही भी दिखाते हैं।
जिले में वाहनों की संख्या में तेजी से वृद्धि के साथ ही हादसों में भी इजाफा हो रहा है। यूं तो शिक्षा का प्रतिशत जिले में बढ़ रहा है, लेकिन सड़क हादसों की तरफ गौर करें तो यह शिक्षित समाज पर सवालिया निशान खड़ा करता दिखता है।
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ज्यादातर मार्ग हादसे यातायात नियमों की अनदेखी के चलते हो रहे हैं तो वहीं बदहाल मार्ग व अतिक्रमण भी इन हादसों के लिए कम जिम्मेदार नहीं है। यातायात विभाग ने 1 जनवरी 2019 से 31 मई 2019 तक पांच माह में हुए मार्ग हादसों का जो आंकड़ा तैयार किया है, वह हर किसी को परेशान कर देने वाला है। विभाग ने अपने आंकड़े में उन्हीं मार्ग हादसों को शामिल किया है, जहां पर किसी की जान गई हो। विभाग के मुताबिक इन पांच माह में कुल 119 स्थानों पर मार्ग हादसे हुए, जिनमें 79 लोगों की मौत हो गई।
जबकि 135 लोग घायल हुए। जनवरी माह में 23 दुर्घटनाएं हुईं। इनमें 17 लोगों की मौत हुई, जबकि 27 लोग घायल हुए। फरवरी में हुए 30 हादसों में 17 लोगों की जान चली गई, जबकि 26 लोग घायल हो गए। मार्च माह में 28 स्थानों पर हुई दुर्घटनाओं में 17 ने दम तोड़ दिया, जबकि 33 गंभीर रूप से घायल हुए। अप्रैल माह में 25 दुर्घटनाओं में 15 की मौत हुई, जबकि 26 लोग घायल हुए। मई माह में 13 दुर्घटनाएं हुईं। इसमें 13 ने दम तोड़ दिया, जबकि 21 लोग उपचार के लिए भर्ती हुए।
ऐसे भी घायल सामने आए जो विकलांगता की श्रेणी में चले गए। इन मार्ग हादसों पर विभाग ने अध्ययन किया तो दुर्घटना में जान गवाने अधिकांश लोग यातायात नियमों की अनदेखी करने वाले ही थे। बाइक चलाते समय हेलमेट या फिर कार चलाते समय सीट बेल्ट न लगाने वाले थे।
ऐसे भी लोग इसमें शामिल हैं जो मनमाने तरीके से वाहनों को ओवरटेक करने का प्रयास कर रहे थे। ओवर स्पीड भी कई लोगों के मौत की वजह बनी। ऐसे में लगातार बढ़ रहे मार्ग हादसे लोगों की शिक्षा व यातायात नियमों के प्रति जागरूकता पर सवाल उठा रहा है। परिवहन विभाग व जिला प्रशासन द्वारा यातायात नियमों की जागरूकता के लिए किए जाने वाले तमाम प्रयास भी सवालों के घेरे में है।
मार्ग हादसे रोकना व उससे बचना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। यातायात नियमों का यदि ईमानदारी से पालन हो तो काफी हद तक समाज के लिए अभिशाप साबित हो रहे मार्ग हादसों को रोका जा सकता है। अकबरपुर नगर के रवि पाण्डेय का कहना है कि अभिभावकों को इस बात को लेकर सख्ती बरतनी चाहिए कि घर से बाइक लेकर निकल रहे बच्चे चलाने योग्य हैं भी या नहीं।
बच्चों को इन सब मामलों में मनमानी नहीं करने देने चाहिए। बरधाभिउरा के अरुण वर्मा का भी मानना है कि अक्सर मार्ग हादसे नियमों की अनदेखी में ही होते हैं। बाइक चलाते समय हेलमेट तो कार चलाते समय सीट बेल्ट का प्रयोग जरूर करना चाहिए। गतंव्य तक पहुंचने में थोड़ा विलंब चल सकता है, लेकिन नियमों की अनदेखी कर वाहन चलाना अक्सर भारी पड़ता है। ऐसे में सभी स्वयं की सुरक्षा के लिए नियमों का अवश्य पालन करना चाहिए।
यातायात नियमों का पालन कराने की सख्ती के साथ ही जागरूकता अभियान समय समय पर चलता है। नियमों का पालन सिर्फ डंडे व कार्रवाई के बल पर ही नहीं कराया जा सकता है। आम नागरिकों को भी इस पर विचार करना चाहिए। युवाओं को स्वयं इसका पालन करने के साथ ही दूसरों को भी प्रेरित करना चाहिए। मार्ग हादसा न सिर्फ किसी व्यक्ति का जान लेता है, बल्कि समूचे परिवार को मुसीबत में डाल देता है।
धर्मेन्द्र सचान सीओ सिटी
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वहीं, 135 लोग ऐसे भी हैं जो घायल होने के बाद लंबे समय तक जीवन और मौत के बीच अस्पतालों में संघर्ष करते रहे। कई तो स्वस्थ हो गए तो बहुत से लोग शरीर के अमूल्य अंगों को गवां बैठे। शिक्षित समाज के बीच इस तरह बढ़ रहे सड़क हादसे न सिर्फ उनकी शिक्षा पर सवाल उठाते हैं, बल्कि दुर्घटनाओं को रोकने के लिए जिम्मेदार संबंधित महकमों की लापरवाही भी दिखाते हैं।
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जिले में वाहनों की संख्या में तेजी से वृद्धि के साथ ही हादसों में भी इजाफा हो रहा है। यूं तो शिक्षा का प्रतिशत जिले में बढ़ रहा है, लेकिन सड़क हादसों की तरफ गौर करें तो यह शिक्षित समाज पर सवालिया निशान खड़ा करता दिखता है।
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ज्यादातर मार्ग हादसे यातायात नियमों की अनदेखी के चलते हो रहे हैं तो वहीं बदहाल मार्ग व अतिक्रमण भी इन हादसों के लिए कम जिम्मेदार नहीं है। यातायात विभाग ने 1 जनवरी 2019 से 31 मई 2019 तक पांच माह में हुए मार्ग हादसों का जो आंकड़ा तैयार किया है, वह हर किसी को परेशान कर देने वाला है। विभाग ने अपने आंकड़े में उन्हीं मार्ग हादसों को शामिल किया है, जहां पर किसी की जान गई हो। विभाग के मुताबिक इन पांच माह में कुल 119 स्थानों पर मार्ग हादसे हुए, जिनमें 79 लोगों की मौत हो गई।
जबकि 135 लोग घायल हुए। जनवरी माह में 23 दुर्घटनाएं हुईं। इनमें 17 लोगों की मौत हुई, जबकि 27 लोग घायल हुए। फरवरी में हुए 30 हादसों में 17 लोगों की जान चली गई, जबकि 26 लोग घायल हो गए। मार्च माह में 28 स्थानों पर हुई दुर्घटनाओं में 17 ने दम तोड़ दिया, जबकि 33 गंभीर रूप से घायल हुए। अप्रैल माह में 25 दुर्घटनाओं में 15 की मौत हुई, जबकि 26 लोग घायल हुए। मई माह में 13 दुर्घटनाएं हुईं। इसमें 13 ने दम तोड़ दिया, जबकि 21 लोग उपचार के लिए भर्ती हुए।
ऐसे भी घायल सामने आए जो विकलांगता की श्रेणी में चले गए। इन मार्ग हादसों पर विभाग ने अध्ययन किया तो दुर्घटना में जान गवाने अधिकांश लोग यातायात नियमों की अनदेखी करने वाले ही थे। बाइक चलाते समय हेलमेट या फिर कार चलाते समय सीट बेल्ट न लगाने वाले थे।
ऐसे भी लोग इसमें शामिल हैं जो मनमाने तरीके से वाहनों को ओवरटेक करने का प्रयास कर रहे थे। ओवर स्पीड भी कई लोगों के मौत की वजह बनी। ऐसे में लगातार बढ़ रहे मार्ग हादसे लोगों की शिक्षा व यातायात नियमों के प्रति जागरूकता पर सवाल उठा रहा है। परिवहन विभाग व जिला प्रशासन द्वारा यातायात नियमों की जागरूकता के लिए किए जाने वाले तमाम प्रयास भी सवालों के घेरे में है।
मार्ग हादसे रोकना व उससे बचना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। यातायात नियमों का यदि ईमानदारी से पालन हो तो काफी हद तक समाज के लिए अभिशाप साबित हो रहे मार्ग हादसों को रोका जा सकता है। अकबरपुर नगर के रवि पाण्डेय का कहना है कि अभिभावकों को इस बात को लेकर सख्ती बरतनी चाहिए कि घर से बाइक लेकर निकल रहे बच्चे चलाने योग्य हैं भी या नहीं।
बच्चों को इन सब मामलों में मनमानी नहीं करने देने चाहिए। बरधाभिउरा के अरुण वर्मा का भी मानना है कि अक्सर मार्ग हादसे नियमों की अनदेखी में ही होते हैं। बाइक चलाते समय हेलमेट तो कार चलाते समय सीट बेल्ट का प्रयोग जरूर करना चाहिए। गतंव्य तक पहुंचने में थोड़ा विलंब चल सकता है, लेकिन नियमों की अनदेखी कर वाहन चलाना अक्सर भारी पड़ता है। ऐसे में सभी स्वयं की सुरक्षा के लिए नियमों का अवश्य पालन करना चाहिए।
यातायात नियमों का पालन कराने की सख्ती के साथ ही जागरूकता अभियान समय समय पर चलता है। नियमों का पालन सिर्फ डंडे व कार्रवाई के बल पर ही नहीं कराया जा सकता है। आम नागरिकों को भी इस पर विचार करना चाहिए। युवाओं को स्वयं इसका पालन करने के साथ ही दूसरों को भी प्रेरित करना चाहिए। मार्ग हादसा न सिर्फ किसी व्यक्ति का जान लेता है, बल्कि समूचे परिवार को मुसीबत में डाल देता है।
धर्मेन्द्र सचान सीओ सिटी