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गांवों में संक्रामक रोगों का खतरा टले भी तो कैसे, जब लाखों दबाएं मातहत
Updated Sun, 21 Oct 2018 11:00 PM IST
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अंबेडकरनगर। गांवों से संक्रामक बीमारियों का खतरा टले भी तो कैसे जब शासन द्वारा दी गई धनराशि का ही सदुपयोग नहीं हो रहा है। मौजूदा वित्तीय वर्ष में शासन द्वारा जिले की 927 ग्राम पंचायतों को 10 हजार रुपये की दर से 92 लाख 70 हजार रुपए की धनराशि उपलब्ध करायी गई। इस धनराशि से ग्राम पंचायत की स्वच्छता समिति को फॉगिंग मशीन समेत अन्य उपकरण खरीदने हैं, जिससे ग्राम पंचायत में समय समय पर संक्रामक बीमारियों की रोकथाम के लिए फॉगिंग की जाए। परंतु स्वच्छता समिति द्वारा इन पैसों को खर्च करने की जहमत नहीं उठायी जा रही है। योजना को लेकर उदासीनता का आलम यह कि बीते वित्तीय वर्ष का भी करीब 8 लाख रुपये अवशेष बचा हुआ है।
बताते चलें कि शासन द्वारा ग्राम पंचायत को संक्रामक बीमारियों से निजात दिलाने व मच्छरों के प्रकोप को रोकने के लिए ग्राम स्वच्छता समिति का गठन किया गया है। इस समिति को प्रत्येक वर्ष 10 हजार रुपए की धनराशि उपलब्ध करायी जाती है। इस धनराशि से ग्राम पंचायत में मच्छरों के प्रकोप रोकने के लिए समय-समय पर फॉगिंग के लिए मशीन व दवा खरीदना होता है। इसके अलावा सफाई कर्मचारी के लिए आवश्यक उपकरण खरीदने की अनुमति है। परंतु ग्राम पंचायतों को स्वच्छ रखने के लिए स्वच्छता समिति द्वारा कोई दिलचस्पी नहीं दिखायी जा रही है। शासन ने मौजूदा वित्तीय वर्ष में जिले की 927 ग्राम पंचायतों को 10 हजार रुपये की दर से 92 लाख 70 हजार रुपये की धनराशि सौंपी गई। वित्तीय वर्ष को करीब 7 माह बीत चुका है, लेकिन अब तक इनमें से एक भी स्वच्छता समिति द्वारा धन न तो आहरित किया गया है, और न ही ऐसे कोई प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे ग्राम पंचायतों में स्वच्छता का असर दिखाई पड़ता है।
ग्राम स्वच्छता समिति की इस उदासीनता का शासन-प्रशासन भी गंभीरता से नहीं ले रहा है। न तो कोई नोटिस न तो निर्देश। शासन द्वारा उपलब्ध कराई गई लाखों की धनराशि का सदुपयोग नहीं हो पा रहा है। इसके चलते ही गांवों में न तो स्वच्छता दिख रही है, और न ही संक्रामक बीमारियों का खतरा ही टल रहा है। जबकि शासन की मंशा थी कि यदि गांवों में समय-समय पर फॉगिंग होगी तो लोगों को संक्रामक बीमारियों से निजात मिलेगी। मजे की बात तो यह करीब 100 ग्राम पंचायतों ने गत वर्ष का भी करीब 8 लाख रुपये नहीं खर्च किया है। समितियों की इस उदासीनता से लोगों में नाराजगी का माहौल है। कटेहरी के जगतपाल व शिवकुमार, बसखारी के संदीप यादव, रामनगर के विकास ने प्रशासन को इस पर गंभीरता दिखायी जाने की मांग की। कहा कि जब तक सख्ती नहीं बरती जाएगी तब तक शासन के निर्देशों का ईमानदारी से पालन नहीं होगा।
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जिम्मेदार लोगों पर तय होगी कार्रवाई
स्वच्छता समिति से जुड़े ग्राम प्रधान व आशा बहू के साथ बीते दिनों बैठक की गई थी। शासन ने दी गई धनराशि के को संबंधित मद में खर्च करने के लिए निर्देशित किया गया है। जल्द ही पुन: समीक्षा बैठक होगी। यदि योजना के क्रियान्वयन में लापरवाही मिली तो संबंधित लोगों पर कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाएगी। -डॉ. अशोक कुमार मुख्य चिकित्साधिकारी
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बताते चलें कि शासन द्वारा ग्राम पंचायत को संक्रामक बीमारियों से निजात दिलाने व मच्छरों के प्रकोप को रोकने के लिए ग्राम स्वच्छता समिति का गठन किया गया है। इस समिति को प्रत्येक वर्ष 10 हजार रुपए की धनराशि उपलब्ध करायी जाती है। इस धनराशि से ग्राम पंचायत में मच्छरों के प्रकोप रोकने के लिए समय-समय पर फॉगिंग के लिए मशीन व दवा खरीदना होता है। इसके अलावा सफाई कर्मचारी के लिए आवश्यक उपकरण खरीदने की अनुमति है। परंतु ग्राम पंचायतों को स्वच्छ रखने के लिए स्वच्छता समिति द्वारा कोई दिलचस्पी नहीं दिखायी जा रही है। शासन ने मौजूदा वित्तीय वर्ष में जिले की 927 ग्राम पंचायतों को 10 हजार रुपये की दर से 92 लाख 70 हजार रुपये की धनराशि सौंपी गई। वित्तीय वर्ष को करीब 7 माह बीत चुका है, लेकिन अब तक इनमें से एक भी स्वच्छता समिति द्वारा धन न तो आहरित किया गया है, और न ही ऐसे कोई प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे ग्राम पंचायतों में स्वच्छता का असर दिखाई पड़ता है।
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ग्राम स्वच्छता समिति की इस उदासीनता का शासन-प्रशासन भी गंभीरता से नहीं ले रहा है। न तो कोई नोटिस न तो निर्देश। शासन द्वारा उपलब्ध कराई गई लाखों की धनराशि का सदुपयोग नहीं हो पा रहा है। इसके चलते ही गांवों में न तो स्वच्छता दिख रही है, और न ही संक्रामक बीमारियों का खतरा ही टल रहा है। जबकि शासन की मंशा थी कि यदि गांवों में समय-समय पर फॉगिंग होगी तो लोगों को संक्रामक बीमारियों से निजात मिलेगी। मजे की बात तो यह करीब 100 ग्राम पंचायतों ने गत वर्ष का भी करीब 8 लाख रुपये नहीं खर्च किया है। समितियों की इस उदासीनता से लोगों में नाराजगी का माहौल है। कटेहरी के जगतपाल व शिवकुमार, बसखारी के संदीप यादव, रामनगर के विकास ने प्रशासन को इस पर गंभीरता दिखायी जाने की मांग की। कहा कि जब तक सख्ती नहीं बरती जाएगी तब तक शासन के निर्देशों का ईमानदारी से पालन नहीं होगा।
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जिम्मेदार लोगों पर तय होगी कार्रवाई
स्वच्छता समिति से जुड़े ग्राम प्रधान व आशा बहू के साथ बीते दिनों बैठक की गई थी। शासन ने दी गई धनराशि के को संबंधित मद में खर्च करने के लिए निर्देशित किया गया है। जल्द ही पुन: समीक्षा बैठक होगी। यदि योजना के क्रियान्वयन में लापरवाही मिली तो संबंधित लोगों पर कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाएगी। -डॉ. अशोक कुमार मुख्य चिकित्साधिकारी