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दलित एक्ट को लेकर अपनी ही सरकार पर हमलावर हुए सांसद
Updated Sat, 08 Sep 2018 10:32 PM IST
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अंबेडकरनगर। एससी-एसटी एक्ट को लेकर अंबेडकरनगर सांसद हरिओम पांडेय ने भी अपनी ही सरकार पर करारा हमला बोला है। दलित एक्ट को लेकर सांसद हरिओम पांडेय ने पार्टी के लिए मुश्किलें बढ़ाने वाला बयान देकर हड़कंप मचा दिया है। सांसद ने कहा है कि इस एक्ट को लेकर सवर्णों व पिछड़े वर्ग के लोगों में व्यापक आक्रोश है। ऐसे लोग क्षेत्र में जाने पर उन पर इस्तीफे का दबाव बना रहे हैं। कानून पर फिर से विचार करने की जरूरत पर बल देते हुए सांसद ने कहा कि दलित कभी भी भाजपा का वोट बैंक रहा ही नहीं। सिर्फ एक वर्ग को खुश करने का प्रयास कर राजनीति में सफलता नहीं पाई जा सकती।
सांसद हरिओम पांडेय ने मीडियाकर्मियों के सवाल का जवाब देते हुए शनिवार को अकबरपुर स्थित जिला मुख्यालय पर कहा कि एससी-एसटी कानून को लेकर पार्टी के दलित सांसदों उदितराज व सावित्री बाई फुले आदि का रुख पार्टी को नुकसान पहुंचाने वाला है। सवर्ण समाज इस कानून को काले कानून के तौर पर देख रहा है। दलित कभी भी भाजपा का मतदाता नहीं रहा है। इस कानून से यादव व मुस्लिम जैसे सपा के परंपरागत मतदाता भी पीड़ित होंगे। इसलिए यह मतदाता आज आंदोलन करने वाले सवर्ण मतदाताओं के साथ खड़े हैं। इसका दुष्परिणाम आने वाले चुनाव में उठाना पड़ सकता है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से एक्ट में संशोधन की अपील करते हुए कहा कि देश व प्रदेश में अमन-चैन बनाए रखने के लिए ऐसा करना जरूरी है। सांसद ने जोर देकर कहा कि इस एक्ट को लेकर सवर्णों में व्यापक गुस्सा क्षेत्र में देखने को मिल रहा है। यह अच्छी बात है कि अभी तक उन्होंने शांतिपूर्ण विरोध अपना रखा है। गुस्सा इतना ज्यादा है कि क्षेत्र में जाने पर उनके ऊपर लोगों द्वारा त्यागपत्र देने का दबाव बनाया जा रहा है। सांसद ने कहा कि एक्ट लागू होने के बाद जिले में सात-आठ मुकदमे कायम हो गए हैं। यह संख्या बढ़ेगी, तो आक्रोश और बढ़ेगा।
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सांसद हरिओम पांडेय ने मीडियाकर्मियों के सवाल का जवाब देते हुए शनिवार को अकबरपुर स्थित जिला मुख्यालय पर कहा कि एससी-एसटी कानून को लेकर पार्टी के दलित सांसदों उदितराज व सावित्री बाई फुले आदि का रुख पार्टी को नुकसान पहुंचाने वाला है। सवर्ण समाज इस कानून को काले कानून के तौर पर देख रहा है। दलित कभी भी भाजपा का मतदाता नहीं रहा है। इस कानून से यादव व मुस्लिम जैसे सपा के परंपरागत मतदाता भी पीड़ित होंगे। इसलिए यह मतदाता आज आंदोलन करने वाले सवर्ण मतदाताओं के साथ खड़े हैं। इसका दुष्परिणाम आने वाले चुनाव में उठाना पड़ सकता है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से एक्ट में संशोधन की अपील करते हुए कहा कि देश व प्रदेश में अमन-चैन बनाए रखने के लिए ऐसा करना जरूरी है। सांसद ने जोर देकर कहा कि इस एक्ट को लेकर सवर्णों में व्यापक गुस्सा क्षेत्र में देखने को मिल रहा है। यह अच्छी बात है कि अभी तक उन्होंने शांतिपूर्ण विरोध अपना रखा है। गुस्सा इतना ज्यादा है कि क्षेत्र में जाने पर उनके ऊपर लोगों द्वारा त्यागपत्र देने का दबाव बनाया जा रहा है। सांसद ने कहा कि एक्ट लागू होने के बाद जिले में सात-आठ मुकदमे कायम हो गए हैं। यह संख्या बढ़ेगी, तो आक्रोश और बढ़ेगा।
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