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घोषणा 14 घंटे की, बिजली मिल रही मात्र 10 घंटे

Thu, 14 Apr 2016 11:07 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/अंबेडकरनगर
अमर उजाला ब्यूरो/अंबेडकरनगर Updated Thu, 14 Apr 2016 11:07 PM IST
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14 hours of the announcement, suppling just 10 hours of electricity
बिजली संकट - फोटो : demo pic

गेहूं की मड़ाई तथा गन्ना व मेंथा की सिंचाई के समय भी किसानों को वादे के अनुरूप 14 घंटे की बिजली नहीं मिल पा रही है। ज्यादातर ग्रामीण क्षेत्रों में 10 घंटे की बिजली मिलना भी कठिन बना हुआ है। इससे एक तरफ जहां राज्य सरकार के दावे की पोल खुल रही है, वहीं किसानों को तमाम मुश्किलों का सामना भी करना पड़ रहा है।

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किसानों ने इस स्थिति पर नाराजगी का इजहार किया है। उनका कहना है कि सिर्फ लालीपॉप दिए जाने से बात नहीं बनेगी। गौरतलब है कि बीते दिनों ही राज्य सरकार ने घोषणा की थी कि ग्रामीण क्षेत्रों में अब 14 घंटे की विद्युत आपूर्ति की जाएगी। इससे पहले ग्रामीण क्षेत्रों का रोस्टर सिर्फ 10 घंटे का था।
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विद्युत आपूर्ति की अवधि बढ़ाए जाने की घोषणा से किसानों में एक नई उम्मीद जगी थी। दरअसल खेती के तमाम कार्य अभी भी बिजली पर आधारित हैं। ऐसे में किसानों को लगा था कि 14 घंटे बिजली मिलने लगेगी तो उनकी तमाम समस्याएं कम हो जाएंगी।
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यह बात अलग है कि सरकार की घोषणा के बाद से ज्यादातर क्षेत्रों को 14 घंटे बिजली मिल पाना सिर्फ सपना बना हुआ है। अकबरपुर व टांडा दोनों वितरण खंड क्षेत्रों में लगभग यही हाल है। कहीं आठ से 10 घंटे की बिजली मिल रही है तो कहीं बमुश्किल नौ से 10 घंटे की बिजली।

अकबरपुर के मरथुआ सरैया निवासी ओमप्रकाश तिवारी कहते हैं कि पिछले कई दिनों से औसत आठ से नौ घंटे की ही बिजली मिल पा रही है। कहा कि सरकार को जब पर्याप्त बिजली देना ही नहीं था तो झूठा वादा करने की जरूरत क्या थी।

 पहितीपुर निवासी उपभोक्ता प्रेमशंकर के मुताबिक कभी भी ठीक से 10 घंटे की बिजली नहीं मिल पा रही है। सरकार की घोषणा से उत्साह जगा था लेकिन अब निराशा दिख रही है। बेवाना निवासी जगरोपन ने कहा कि 14 घंटे बिजली मिलती तो मेंथा व गन्ने की सिंचाई का काम तमाम किसान आसानी से कर सकते थे।

टांडा के हंसवर क्षेत्र निवासी श्यामलाल ने पर्याप्त बिजली न मिलने का हवाला दिया। कहा कि उन्होंने बिजली से गेहूं की मड़ाई की उम्मीद लगा रखी थी, लेकिन बार बार आपूर्ति में व्यवधान से ऐसा संभव नहीं हो पाया।


इसके चलते उन्हें ट्रैक्टर का सहारा लेकर मड़ाई करनी पड़ी। उधर अधिशाषी अभियंता मुकेश बाबू ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में समुचित आपूर्ति के प्रयास किए जा रहे हैं।

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