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‘जिसे गोद में खेलाया, कैसे देखूंगा उसकी लाश’
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sun, 27 Aug 2017 02:23 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
इलाहाबाद। शाश्वत अब सिर्फ यादों में हैं। परिजन उसकी एक एक बात याद कर बिलख रहे हैं। शहर के नामचीन डाक्टर ओपी बजाज ने जब भरभराई आवाज में कहा कि ‘जिसे गोद में खेलाया, उसकी लाश कैसे देखूंगा’, सांत्वना देने वालों की आंखें भर आईं। सब नि:शब्द थे, आखिर क्या कह कर उन्हें दिलासा दी जाए।
बचपन से अपने नाना डा. ओपी बजाज के घर पले बढ़े शाश्वत को वह बेहद चाहते थे। डा. बजाज ने शाश्वत को लेकर भविष्य की पूरी योजना तैयार की थी कि उसे कहां कैसे कब प्रेक्टिस करनी है। सिविल लाइंस स्थित अपने घर पर बैठे डा. बजाज रह रहकर बिलख उठते। शहर के नामचीन डाक्टरों समेत लगभग सभी क्षेत्रों की बड़ी हस्तियां उनके घर पर थीं। वह किसी से कहते भी तो क्या, शाश्वत की छोटी-छोटी बातें, भविष्य की बड़ी-बड़ी योजनाएं सब उन्हें याद आ रहा था। इतने सीधे इतने अच्छे शाश्वत को आखिर कोई कैसे इतनी बेरहम मौत दे सकता है। कुछ-कुछ ऐसा ही माहौल शाश्वत के चर्चलेन स्थित घर पर था। पिता डा. संजय पांडेय तो इतने गहरे सदमे में थे कि बस कुछ देर के लिए ही कमरे से निकलते फिर अंदर चले जाते। जैसे यकायक उन्हें कोई गहरी पीड़ा होने लगती। सांत्वना व्यक्त करने वाले लोग भी उस वक्त सिहर जा रहे थे जब वह सूनी आंखों से शून्य में निहारने लगते। कहते हैं कि दुनिया का सबसे बड़ा बोझ एक पिता के कंधों पर बेटे की लाश होता है। डा. पांडेय आज उसी बोझ तले दबे नजर आ रहे थे।
डा. शाश्वत पांडेय का शव रविवार तड़के घर पहुंचेगा। पोस्टमार्टम तथा अन्य जरूरी औपचारिकता के बाद रात में नौ बजे एयर एंबुलेंस से शव लखनऊ के लिए चला। लखनऊ से एंबुलेंस से सुबह चार बजे तक लाश आने की संभावना है। शाश्वत के शव के साथ मां शालिनी और बहन नीति हैं। घटना वाले दिन शालिनी अपनी बेटी नीति के साथ दिल्ली में ही थीं। ब्रिटिश एंबेसी में एप्वाइंटमेंट के बाद उन्हें शाश्वत से मिलना था। वह तैयार ही हो रही थीं कि वह मनहूस खबर आ गई। शाश्वत नहीं रहा। मां शालिनी और बहन नीति को तो वहां कोई संभालने वाला भी नहीं था। बेटे का शव देखकर शालिनी की तबियत खराब हो गई थी।
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बचपन से अपने नाना डा. ओपी बजाज के घर पले बढ़े शाश्वत को वह बेहद चाहते थे। डा. बजाज ने शाश्वत को लेकर भविष्य की पूरी योजना तैयार की थी कि उसे कहां कैसे कब प्रेक्टिस करनी है। सिविल लाइंस स्थित अपने घर पर बैठे डा. बजाज रह रहकर बिलख उठते। शहर के नामचीन डाक्टरों समेत लगभग सभी क्षेत्रों की बड़ी हस्तियां उनके घर पर थीं। वह किसी से कहते भी तो क्या, शाश्वत की छोटी-छोटी बातें, भविष्य की बड़ी-बड़ी योजनाएं सब उन्हें याद आ रहा था। इतने सीधे इतने अच्छे शाश्वत को आखिर कोई कैसे इतनी बेरहम मौत दे सकता है। कुछ-कुछ ऐसा ही माहौल शाश्वत के चर्चलेन स्थित घर पर था। पिता डा. संजय पांडेय तो इतने गहरे सदमे में थे कि बस कुछ देर के लिए ही कमरे से निकलते फिर अंदर चले जाते। जैसे यकायक उन्हें कोई गहरी पीड़ा होने लगती। सांत्वना व्यक्त करने वाले लोग भी उस वक्त सिहर जा रहे थे जब वह सूनी आंखों से शून्य में निहारने लगते। कहते हैं कि दुनिया का सबसे बड़ा बोझ एक पिता के कंधों पर बेटे की लाश होता है। डा. पांडेय आज उसी बोझ तले दबे नजर आ रहे थे।
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डा. शाश्वत पांडेय का शव रविवार तड़के घर पहुंचेगा। पोस्टमार्टम तथा अन्य जरूरी औपचारिकता के बाद रात में नौ बजे एयर एंबुलेंस से शव लखनऊ के लिए चला। लखनऊ से एंबुलेंस से सुबह चार बजे तक लाश आने की संभावना है। शाश्वत के शव के साथ मां शालिनी और बहन नीति हैं। घटना वाले दिन शालिनी अपनी बेटी नीति के साथ दिल्ली में ही थीं। ब्रिटिश एंबेसी में एप्वाइंटमेंट के बाद उन्हें शाश्वत से मिलना था। वह तैयार ही हो रही थीं कि वह मनहूस खबर आ गई। शाश्वत नहीं रहा। मां शालिनी और बहन नीति को तो वहां कोई संभालने वाला भी नहीं था। बेटे का शव देखकर शालिनी की तबियत खराब हो गई थी।
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