Prayagraj : आखिर कहां जाएं हृदय रोगी, 74 लाख की आबादी में सिर्फ एक टूडी इको मशीन
एक तरफ जहां लगातार हार्ट अटैक के मामले बढ़ रहे हैं, तो वहीं प्रदेश के सबसे बड़े लगभग 74 लाख की आबादी वाले जिले में सिर्फ स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय (एसआरएन) में एक टूडी इको मशीन काम कर रही है।
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एक तरफ जहां लगातार हार्ट अटैक के मामले बढ़ रहे हैं, तो वहीं प्रदेश के सबसे बड़े लगभग 74 लाख की आबादी वाले जिले में सिर्फ स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय (एसआरएन) में एक टूडी इको मशीन काम कर रही है। बाकी तेज बहादुर सप्रू अस्पताल (बेली) और मोती लाल नेहरु मंडलीय चिकित्सालय (कॉल्विन) की टूडी इको मशीन तीन साल से खराब पड़ी हुई है। जिसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ता है। इन दोनों अस्पतालों में टूडी इको की जांच न होने से पूरा दबाव एसआरएन अस्पताल पर होता है। ऐसे में रोजाना करीब 50 टूडी इको की जांच होती है। जबकि 20 लोगों को ही अप्वाइंमेंट दिया जाता है। वहीं, दूसरी तरफ एसआरएन में यह जांच 200 रुपये में उपलब्ध है। जबकि निजी संस्थान में टूडी इको की जांच 1800 से 2800 रुपये तक होती है।
क्या है टूडी इको की जांच
टूडी इको (इकोकार्डियोग्राफी) एक अल्ट्रासाउंड मशीन है, जो ध्वनि तरंगों का उपयोग करके हृदय की चलती हुई दो आयामी (टूडी) तस्वीरें बनाती है, जिससे डॉक्टर हृदय की संरचना, वाल्वों, और रक्त प्रवाह को वास्तविक समय में देख पाते हैं, यह समझने के लिए कि हृदय कितनी अच्छी तरह पंप कर रहा है और किसी भी समस्या जैसे वाल्व की खराबी, हृदय की मांसपेशियों के रोग या जन्मजात दोषों का पता लगाने के लिए।
हृदय रोगियों की कौन-कौन सी है जांच
1-ईसीजी
2-टूडी इको
3-स्ट्रेस जांच
4-एंजियोग्रॉफी
हमारे यहां जनपद के अलावा आसपास के आधा दर्जन से अधिक जिलों व मध्य प्रदेश के रीवां जिले के हृदय रोगी उपचार कराने आते हैं। इसलिए यहां अधिक से अधिक लोगाें की जांच की जाती है। -डॉ. वीके पांडेय, प्राचार्य, एमएलएन मेडिकल कॉलेज।
अस्पताल में टूडी इको मशीन तीन साल से खराब पड़ी हुई है। इसके अलावा हृदय रोग विशेषज्ञ भी हमारे यहां नहीं है। टूडी इको की जांच हृदय रोगियों के लिए महत्वपूर्ण होती है। -डॉ. एसके चौधरी, प्रमुख अधीक्षक, कॉल्विन अस्पताल।