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हाईकोर्ट : दस साल बीत गए महिला को शौचालय पर कब्जा न मिला, तीसरी बार पहुंची कोर्ट

Thu, 21 Mar 2024 06:38 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 21 Mar 2024 06:38 PM IST
सार

यह आदेश न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमित्र सुरेंद्र सिंह प्रथम की खंडपीठ ने दिया है। कोर्ट ने मामले में शाहगंज एसडीएम के उदासीन रवैये पर नाराजगी जाहिर की है। कहा कि उनकी भूमिका भी देखी जानी चाहिए।

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Ten years have passed, the woman did not get possession of the toilet
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

निर्मल ग्राम योजना के तहत 2013 में जौनपुर की एक वृद्धा को शाैचालय का लाभ मिला। आरोप है कि शौचालय बना तो दबंगों ने उस पर ताला जड़ दिया, फिर उसे ध्वस्त कर दिया। प्रशासनिक जांच-पड़ताल और उदासीनता के कारण मामले का निस्तारण नहीं हो पाया। महिला तीसरी बार इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंची। कोर्ट ने डीएम जौनपुर को जांच कर 15 दिन में रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।

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यह आदेश न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमित्र सुरेंद्र सिंह प्रथम की खंडपीठ ने दिया है। कोर्ट ने मामले में शाहगंज एसडीएम के उदासीन रवैये पर नाराजगी जाहिर की है। कहा कि उनकी भूमिका भी देखी जानी चाहिए। मामले में याची निर्मला मिश्रा की ओर से कोर्ट को बताया गया कि शौचालय बना लेकिन आसपास के दबंगों ने उस पर अपने हितों को देखते हुए ताला जड़ दिया।
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याची ने इसके खिलाफ एसडीएम शाहगंज से दो बार गुहार लगाई। एसडीएम ने ध्यान नहीं दिया तो उसने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट ने 23 फरवरी 2023 को आदेश कर एसडीएम को इस मामले को निस्तारित करने का आदेश पारित किया। एसडीएम ने कोई कार्रवाई नहीं की। महिला ने अवमानना याचिका दाखिल की।ता से लिया जाना चाहिए। अब डीएम इसकी जांच करेंगे।

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हाईकोर्ट ने 11 नवंबर 2023 को आदेश पारित कर एक माह में याची निर्मला देवी की समस्या का निराकरण करने का आदेश पारित कर याचिका निस्तारित कर दी लेकिन महिला को न्याय नहीं मिल सका। इस बीच शौचालय भी तोड़ दिया गया। महिला ने अब तीसरी बार याचिका दाखिल की है।

शौचालय बना और गायब मिला तो पता क्यों नहीं किया

याची द्वारा तीसरी बार याचिका पर पहले सुनवाई करते हुए एसडीएम से रिपोर्ट मांगी थी। एसडीएम ने रिपोर्ट दिया कि शौचालय बना था लेकिन जांच में मौके पर नहीं पाया गया। इस पर कोर्ट ने एसडीएम की भूमिका पर नाराजगी जाहिर की। यह भी कहा कि जब किसी नागरिक के लिए लाभ के लिए शौचालय बना तो और मौके पर नहीं मिला तो इसे गंभीर

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