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Reseach : कैंसर का शिकार बना रही तनावग्रस्त जीवनशैली, अध्ययन में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

Fri, 12 Jul 2024 03:44 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 12 Jul 2024 03:44 PM IST
सार

डॉ. अजय के अध्ययन के अनुसार जब कोई तनाव में आता है तो शरीर की रक्षा प्रणाली प्रतिक्रिया देती है, जिसके तहत एड्रनल ग्लैन्ड में कार्टीसाल नाम का हॉर्मोन उत्पन्न होता है जो पाचन तंत्र, प्रजनन अंग, पैंक्रियाज जैसे तमाम अंगों को अस्थायी रूप से निष्क्रिय करके खून में ढेर सारी ग्लूकोज इकट्ठा कर देता है।

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Stressful lifestyle is making one a victim of cancer, shocking revelation in the study
अजय कुमार सोनकर, वैज्ञानिक। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

तनावग्रस्त जीवन शैली आपको डायबिटीज और ब्लडप्रेशर का शिकार तो बना ही रही है, लंबे समय तक तनाव में रहे तो कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी भी जकड़ लेगी। प्रयागराज से जुड़े प्रख्यात वैज्ञानिक पद्मश्री डाॅ.अजय सोनकर ने कई वर्षों के अध्ययन के आधार पर दावा किया है कि हर वक्त मन में किसी ने किसी भय के कारण तनाव बढ़ रहा है। ऐसे में लंबे समय तक टिके रहने वाला तनाव आगे चलकर कैंसर का कारण बन रहा है।

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डॉ. अजय के अध्ययन के अनुसार जब कोई तनाव में आता है तो शरीर की रक्षा प्रणाली प्रतिक्रिया देती है, जिसके तहत एड्रनल ग्लैन्ड में कार्टीसाल नाम का हॉर्मोन उत्पन्न होता है जो पाचन तंत्र, प्रजनन अंग, पैंक्रियाज जैसे तमाम अंगों को अस्थायी रूप से निष्क्रिय करके खून में ढेर सारी ग्लूकोज इकट्ठा कर देता है। यह सामान्य से कई गुना ज्यादा होता है। शरीर को ग्लूकोज का उपयोग करने के लिए उसी अनुपात में कई गुना ज्यादा ऑक्सीजन की जरूरत होती है, जो तीव्र एरोबिक व्यायाम के जरिये शरीर में पहुंचाई जा सकती है।

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इसमें भागना-दौड़ना शामिल है, जो आज की विकृत जीवन शैली में व्यावहारिक रूप से किसी भी व्यक्ति के लिए बहुत मुश्किल है। किसी के लिए भी यह मुश्किल होगा कि हर बार तनाव होते ही वह दौड़ पड़े। नतीजतन खून में बढ़ा ग्लूकोज इस्तेमाल नहीं हो पाता और खून में वसा की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे हृदयरोग की बीमारी जन्म लेती है। पैंक्रियाज की बीटा कोशिकाओं पर क्षमता से कहीं ज्यादा दबाव पड़ता है, जिसके कारण वह ठीक से काम नहीं कर पातीं और व्यक्ति डायबिटीज का शिकार हो जाता है।

शरीर में ऑक्सीजन की कमी होने के कारण नाॅन सेल्युलर नामक परिस्थिति उत्पन्न होती है। इसकी वजह से कोशिका में मौजूद ग्लूकोज फरमेंट हो जाता है और ऐसी कोशिकाओं का आवरण सख्त हो जाता है, जिनमें ना तो ऑक्सीजन जा सकती है और ना ही उसमें से अपव्ययी पदार्थ बाहर निकल सकता है। ऐसी कोशिकाओं को ही मेलिग्नेंट सेल या कैंसर सेल कहा जाता है। इन कोशिकाओं के अंदर की फरमेंटेड सुगर स्वस्थ कोशिकाओं की सुगर को भी फरमेंट करती जाती हैं और इस प्रकार शरीर में कैंसर फैल जाता है।

दीर्घकालिक तनाव से कैंसर का खतरा अधिक
 

वैज्ञानिक डॉ. अजय सोनकर बताते हैं कि दीर्घकालिक तनाव से कैंसर का खतरा अधिक होता है। दरअसल, तनाव मुख्यत: तीन प्रकार के होते हैं। पहला अल्पकालिक तनाव, जैसे ट्रैफिक में फंस जाने, ट्रेन या फ्लाइट छूट जाने की आशंका के कारण तनाव में आ जाना। दूसरा दीर्घकालिक तनाव, जैसे खुद या अपनी संतान के असुरक्षित भविष्य की चिंता से जन्मा तनाव, वर्षों से चल रहे किसी मुकदमे के कारण चिंता एवं तनाव, अभाव या जरूरत से कम आय के कारण तनाव, कर्ज, बिगड़ते रिश्तों के कारण तनाव। आर्थिक अपराध के कारण पकड़े जाने के भय से तनाव। तीसरा है पोस्ट ट्रामेटिक स्ट्रेस, जिसमें अतीत की कोई कोई दुखद घटना के कारण पीड़ाजनक प्रभाव में बने रहने के कारण तनाव।
 

कई स्तर पर अध्ययन के बाद निकला निष्कर्ष
 

वागनिंजन यूनिवर्सिटी एंड रिसर्च सेंटर नीदरलैंड से न्यूट्रिशन एंड कैंसर, न्यूट्रिशन एंड डायबिटीज एंड हार्ट डिजीज, अमेरिका के ह्यूस्टन में राइस यूनिवर्सिटी से जेनेटिक एंड कोड और हारवर्ड मेडिकल स्कूल से कॉग्नेटिव फिटनेस एवं सेंसटिव गट पर अध्ययन के बाद डॉ.अजय सोनकर इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि तनावग्रस्त जीवनशैली कैंसर की वजह बन रही है।

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