फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Scientists are searching for 400 crore year old stone in barren land of Bundelkhand

Prayagraj: बुंदेलखंड की बंजर जमीन में ‘खजाना’ तलाशेंगे वैज्ञानिक, चार सौ करोड़ वर्ष पुराने पत्थर की होगी खोज

Fri, 08 Jul 2022 04:30 AM IST
विजय पुंडीर अमित सरन, प्रयागराज
अमित सरन, प्रयागराज Published by: विजय पुंडीर Updated Fri, 08 Jul 2022 04:30 AM IST
सार

बुंदेलखंड की बंजर जमीन में इविवि के अर्थ एंड प्लेनेटरी साइंस के प्रो. जेके पति और उनकी टीम 400 करोड़ वर्ष पुराने पत्थर खोज रही है।  प्रो. जेके पति का दावा है कि बुंदेलखंड की बंजर जमीन पर सोना, यूरेनियम और प्लेटिनम जैसी बहुमूल्य धातुओं एवं खनिजों की भरमार है। 

विज्ञापन
Scientists are searching for 400 crore year old stone in barren land of Bundelkhand
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Getty

विस्तार

बुंदेलखंड की बंजर जमीन पर सोना, यूरेनियम और प्लेटिनम जैसी बहुमूल्य धातुओं एवं खनिजों की भरमार है। यह दावा करने वाले इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के अर्थ एंड प्लेनेटरी साइंस, नेहरू सेंटर के प्रो. जयंत कुमार पति और उनकी टीम बुंदेलखंड में 400 करोड़ वर्ष पुराने पत्थर खोज रही है। उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही वह इस खोज में सफल होंगे। इस दिशा में प्रारंभिक सफलता मिलने के बाद भारत सरकार की अर्थ साइंसेज मिनिस्ट्री की ओर से उन्हें 70 लाख 73 हजार रुपये का प्रोजेक्ट दिया गया है।

विज्ञापन


लार्ज हैड्रोन मशीन से धरती की उत्पत्ति की खोज में जुटे वैज्ञानिकों की टीम के सदस्य और चंद्रयान में डेटा एनालिसिस ग्रुप के सदस्य रहे प्रो. जेके पति के अनुसार पृथ्वी की उम्र 45 सौ करोड़ वर्ष की है। अब तक ऑस्ट्रेलिया और झारखंड के सिंघुम में चार सौ करोड़ साल पुराने पत्थर के अवशेष मिले हैं। प्रारंभिक शोध में बुंदेलखंड इलाके से कुछ ऐसे पत्थर मिले हैं, जो कि 35 सौ करोड़ साल पुराने हैं। बुंदेलखंड में ही अब चार सौ करोड़ साल पुराने पत्थर खोजे जा रहे हैं और वहां इसके मिलने की पूरी उम्मीद है।
विज्ञापन


प्रो. पति के अनुसार, बबीना, महोबा, बांदा जैसे पठारी क्षेत्रों में कभी समुद्र हुआ करता था और समुद्र में ज्वालामुखी भी था। ज्वालामुखी होने के कारण वहां के भूभाग एक-दूसरे के नीचे चले गए। वहां प्रचुर मात्रा में खनिज मिलने के संकेत हैं। अर्थ साइंसेज मिनिस्ट्री की ओर से मिले प्रोजेक्ट के तहत इसी दिशा में शोध को आगे बढ़ाया जाएगा। यह शोध बुंदेलखंड के विकास की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। सोना, प्लेटिनम, यूरेनियम जैसी बहुमूल्य धातुओं के मिलने से बुंदेलखंड की दशा और दिशा दोनों बदल सकती है। डॉ. जेके पति ने बताया कि वह और उनकी टीम वर्ष 1992 से इस दिशा में काम कर रही है। प्रारंभिक शोध में सकारात्मक संकेत मिले हैं। 

विज्ञापन
विज्ञापन

29 हजार वर्ग किमी है शोध का दायरा
चार सौ करोड़ साल पुराने पत्थर और बहुमूल्य धातुओं एवं खनिजों की खोज का दायरा 29 हजार वर्ग किलोमीटर है। प्रो. पति के अनुसार ललितपुर से लेकर ग्वालियर के कुछ पहले तक, बबीना के पश्चिम से लेकर बांदा एवं महोबा तक और खजुराहो से लेकर झांसी तक शोध किया जा रहा है।

आइसो डायनिमिक सेपरेटर की ली जाएगी मदद
इस शोध में आइसो डायनिमिक सेपरेटर नाम के उपकरण की मदद ली जाएगी। इस मशीन की मदद से पत्थर से मिनिरल को अलग किया जाएगा और इससे पत्थर की उम्र का पता लगाया जा सकेगा। अर्थ साइंसेज मिनस्ट्रि से मंजूर हुए प्रोजेक्ट के तहत 41 लाख रुपये की लागत से यह उपकरण खरीदा जाएगा। इसके अलावा केमिकल भौगोलिक सर्वेक्षण में 3.80 लाख रुपये खर्च होंगे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed