संघ प्रमुख भागवत बोले- सरकार पर निर्भरता की बजाय जनता अपने हाथ में ले गंगा निर्मलीकरण का काम
गंगा निर्मलीकरण के लिए संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि गंगा के दोनों तटों पर पांच किलोमीटर के दायरे में बसे गांवों एवं शहरों में इसके निर्मलीकरण के लिए नियमित कार्यक्रम चलाने होंगे। यह काम जन-जन के भीतर के भगवान को जगा कर पूरा किया जा सकता है। इसके लिए सरकार पर निर्भर नहीं होना चाहिए। स्वयं जनता को यह कार्यक्रम अपने हाथों में लेना पड़ेगा। इस काम से हमें क्या-क्या मिलेगा या मेरा क्या होगा इस पर विचार करने की आवश्यकता नहीं है। संघ प्रमुख ने कहा कि सभी आयामों की मजबूत टीम बनाकर केंद्र एवं राज्य स्तर पर विधिवत प्रशिक्षित कर इस काम को आगे बढ़ाना होगा।
इसके लिए तटवर्ती गांव में तीर्थ पुरोहितों को कर्मकांड का प्रशिक्षण, घाटों की स्वच्छता, वृहद वृक्षारोपण तालाबों में जल संचय कर उनको पुनर्जीवन देने से संभव हो पाएगा । इस कार्य में अन्य संगठन भी लगे हुए हैं उनको भी साथ लेकर चलने की जरूरत है। यह काम कठिन जरूर है लेकिन असंभव नहीं है। डिफरेंस बिटवीन सक्सेस एंड फेलियर इज थ्री फीट कहानी का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि सफलता और असफलता में केवल तीन फीट का अंतर रहता है। निराश ना होने वाले कार्यकर्ता सफलता लेकर ही रहते हैं।
उन्होंने कहा कि निर्मल गंगा अविरल गंगा अभियान को आगे बढ़ाने के लिए विकास और पर्यावरण दोनों का समान रूप से ध्यान रखना होगा। दोनों मे संतुलन बनाने की जरूरत है। इस काम में लगे सभी कार्यकर्ताओं को नदियों के जल प्रबंधन तथा जल संरक्षण का पूरा ज्ञान होना चाहिए। इस अवसर पर प्रथम सत्र का संचालन संगठन के कोषाध्यक्ष ललित कपूर ने किया। कार्यक्रम में संघ के सह सरकार्यवाह डा कृष्ण गोपाल, राष्ट्रीय संगठन मंत्री मिथिलेश नारायण, क्षेत्र प्रचारक अनिल, प्रांत प्रचारक रमेश, प्रांत संघचालक डॉ विश्वनाथ लाल निगम, आलोक मालवीय, क्षेत्र संयोजक चिंतामणि सिंह, राकेश मिश्रा, डा. मुरारजी त्रिपाठी समेत विश्व हिंदू परिषद तथा संघ के कई प्रमुख पदाधिकारी मौजूद रहे।