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हर महीने सात करोड़ कमा रही वंदे भारत
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vandey bharat express
- फोटो : amar ujala
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हर महीने सात करोड़ कमा रही वंदे भारत
0 ट्रेन की हाई स्पीड आमदनी, यात्रियों का मिल रहा बेहतर रिस्पांस, सीटें फुल
0 निर्माण में लगे थे सौ करोड़ रुपये, दावा-साल भर में वसूल हो जाएगी रकम
राहुल शर्मा
प्रयागराज। देश में निर्मित पहली स्वदेशी हाई स्पीड ट्रेन वंदे भारत एक्सप्रेस कमाई के मामले में भी काफी आगे है। ट्रेन की हर माह की औसतन कमाई सात करोड़ रुपये के आसपास है। यात्रियों के बेहतर रिस्पांस को देखते हुए रेलवे अफसर भी गदगद हैं। उनका दावा है कि अगर इसी तरह से ट्रेन कमाई करती रही तो अगले एक वर्ष में इसके निर्माण की लागत (सौ करोड़ रुपये) वसूल हो जाएगी।
कुंभ मेले के दौरान 17 फरवरी 2019 को वंदे भारत एक्सप्रेस की शुरुआत हुई थी। इसका संचालन सप्ताह में पांच दिन दिल्ली से वाराणसी के बीच हो रहा है। अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस इस ट्रेन की निर्माण लागत सौ करोड़ रुपये के आसपास है। अन्य ट्रेनों की भांति वंदे भारत में यात्रियों के किसी भी वर्ग के लिए ट्रेन किराये में रियायत उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा शताब्दी, राजधानी एक्सप्रेस की तुलना में इसका किराया भी अधिक है। फिर भी ट्रेन लगातार यात्रियों से फुल चल रही है। दिल्ली से वाराणसी की बजाय वंदे भारत एक्सप्रेस में इलाहाबाद जंक्शन आने वाले यात्रियों की संख्या ज्यादा है। शायद इसी वजह से हर माह वंदे भारत से हाने वाली यात्री आय का औसत सात करोड़ रुपये के आसपास आ गया है। इससे होने वाली आय को देखते हुए रेलवे अफसर भी अब दावा कर रहे हैं कि इसकी कुल लागत अगले एक वर्ष में ही निकल आएगी।
उत्तर मध्य रेलवे के सीपीआरओ अजीत कुमार सिंह का कहना है कि वंदे भारत को लेकर अब तक यात्रियों को बेहतर रिस्पांस मिला है। औसतन हर माह सात करोड़ रुपये रेलवे को मिल रहे हैं। इसकी लागत सौ करोड़ के आसपास है। निश्चित ही साल भर में यह लागत निकल आएगी। एनसीआर जोन में वंदे भारत के दूसरे रैक का भी परीक्षण पिछले दिनों किया जा चुका है।
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हर महीने सात करोड़ कमा रही वंदे भारत
0 ट्रेन की हाई स्पीड आमदनी, यात्रियों का मिल रहा बेहतर रिस्पांस, सीटें फुल
0 निर्माण में लगे थे सौ करोड़ रुपये, दावा-साल भर में वसूल हो जाएगी रकम
राहुल शर्मा
प्रयागराज। देश में निर्मित पहली स्वदेशी हाई स्पीड ट्रेन वंदे भारत एक्सप्रेस कमाई के मामले में भी काफी आगे है। ट्रेन की हर माह की औसतन कमाई सात करोड़ रुपये के आसपास है। यात्रियों के बेहतर रिस्पांस को देखते हुए रेलवे अफसर भी गदगद हैं। उनका दावा है कि अगर इसी तरह से ट्रेन कमाई करती रही तो अगले एक वर्ष में इसके निर्माण की लागत (सौ करोड़ रुपये) वसूल हो जाएगी।
कुंभ मेले के दौरान 17 फरवरी 2019 को वंदे भारत एक्सप्रेस की शुरुआत हुई थी। इसका संचालन सप्ताह में पांच दिन दिल्ली से वाराणसी के बीच हो रहा है। अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस इस ट्रेन की निर्माण लागत सौ करोड़ रुपये के आसपास है। अन्य ट्रेनों की भांति वंदे भारत में यात्रियों के किसी भी वर्ग के लिए ट्रेन किराये में रियायत उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा शताब्दी, राजधानी एक्सप्रेस की तुलना में इसका किराया भी अधिक है। फिर भी ट्रेन लगातार यात्रियों से फुल चल रही है। दिल्ली से वाराणसी की बजाय वंदे भारत एक्सप्रेस में इलाहाबाद जंक्शन आने वाले यात्रियों की संख्या ज्यादा है। शायद इसी वजह से हर माह वंदे भारत से हाने वाली यात्री आय का औसत सात करोड़ रुपये के आसपास आ गया है। इससे होने वाली आय को देखते हुए रेलवे अफसर भी अब दावा कर रहे हैं कि इसकी कुल लागत अगले एक वर्ष में ही निकल आएगी।
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उत्तर मध्य रेलवे के सीपीआरओ अजीत कुमार सिंह का कहना है कि वंदे भारत को लेकर अब तक यात्रियों को बेहतर रिस्पांस मिला है। औसतन हर माह सात करोड़ रुपये रेलवे को मिल रहे हैं। इसकी लागत सौ करोड़ के आसपास है। निश्चित ही साल भर में यह लागत निकल आएगी। एनसीआर जोन में वंदे भारत के दूसरे रैक का भी परीक्षण पिछले दिनों किया जा चुका है।
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