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संपत्ति क्षति दावा अधिकरण: विधेयक पास होने के विरोध को जनांदोलन बनाएगा हाईकोर्ट बार
Wed, 26 Aug 2020 08:11 PM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 26 Aug 2020 08:11 PM IST
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- फोटो : sociol media
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संपत्ति क्षति दावा अधिकरण की पीठें लखनऊ और मेरठ में बनाने के लिए पारित विधेयक के विरोध को हाईकोर्ट बार एसोसिएशन जनआंदोलन का रूप देगी तथा इसके खिलाफ कानूनी लड़ाई भी लड़ी जाएगी। बुधवार को हुई पूर्व पदाधिकारियों के साथ पर बैठक में आंदोलन को लेकर रणनीति पर चर्चा की गई।
बैठक में कहा गया कि अधिकरण आम जनमानस पर बोझ है और सरकार द्वारा उठाया गया कदम निरर्थक है। विचार-विमर्श के बाद तय किया गया कि बार एसोसिएशन का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री, राज्य विधिमंत्री और प्रमुख सचिव न्याय से मिलकर इस मामले पर अपना पक्ष रखेगा।
यदि शासन द्वारा इसकी अनदेखी की जाती है तो इसे जनांदोलन का रूप दिया जाएगा। बैठक में शामिल पूर्व पदाधिकारियों का सुझाव था कि आंदोलन से व्यापारियों, छात्रों , कर्मचारी संघों तथा सभी बार एसोसिएशनों को भी जोड़ा जाएगा। आंदोलन को प्रयागराज की आम जनता तक ले जाया जाएगा तथा सरकार के विरुद्ध धरना प्रदर्शन किया जाएगा। यह भी निर्णय लिया गया कि एक जनहित याचिका दाखिल कर कानूनी रूप से लड़ाई लड़ी जाएगी।
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बैठक में बार के महासचिव प्रभाशंकर मिश्र ने कहा कि सरकार द्वारा उठाया गया कदम निंदनीय है, क्योंकि इससे सिर्फ अधिवक्ता ही नहीं प्रयागराज के सभी वर्गों को नुकसान होगा। अगली बैठक में पूर्व और वर्तमान पदाधिकारियों की एक साथ होगी, जिसमें जिसमें लिए गए निर्णय के अनुसार आंदोलन किया जाएगा।
बैठक में पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता वीपी श्रीवास्तव, पूर्व अध्यक्ष आईके चतुर्वेदी, पूर्व महासचिव सीपी उपाध्याय, पूर्व महासचिव ओपी सिंह, पूर्व महासचिव रामशिरोमणि शुक्ला, पूर्व महासचिव जेबी सिंह, अशोक कुमार सिंह, एके ओझा, एससी उपाध्याय सहित अन्य अधिवक्ता उपस्थित थे। सभा का संचालन महासचिव प्रभाशंकर मिश्र ने किया।
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बैठक में कहा गया कि अधिकरण आम जनमानस पर बोझ है और सरकार द्वारा उठाया गया कदम निरर्थक है। विचार-विमर्श के बाद तय किया गया कि बार एसोसिएशन का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री, राज्य विधिमंत्री और प्रमुख सचिव न्याय से मिलकर इस मामले पर अपना पक्ष रखेगा।
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यदि शासन द्वारा इसकी अनदेखी की जाती है तो इसे जनांदोलन का रूप दिया जाएगा। बैठक में शामिल पूर्व पदाधिकारियों का सुझाव था कि आंदोलन से व्यापारियों, छात्रों , कर्मचारी संघों तथा सभी बार एसोसिएशनों को भी जोड़ा जाएगा। आंदोलन को प्रयागराज की आम जनता तक ले जाया जाएगा तथा सरकार के विरुद्ध धरना प्रदर्शन किया जाएगा। यह भी निर्णय लिया गया कि एक जनहित याचिका दाखिल कर कानूनी रूप से लड़ाई लड़ी जाएगी।
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बैठक में बार के महासचिव प्रभाशंकर मिश्र ने कहा कि सरकार द्वारा उठाया गया कदम निंदनीय है, क्योंकि इससे सिर्फ अधिवक्ता ही नहीं प्रयागराज के सभी वर्गों को नुकसान होगा। अगली बैठक में पूर्व और वर्तमान पदाधिकारियों की एक साथ होगी, जिसमें जिसमें लिए गए निर्णय के अनुसार आंदोलन किया जाएगा।
बैठक में पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता वीपी श्रीवास्तव, पूर्व अध्यक्ष आईके चतुर्वेदी, पूर्व महासचिव सीपी उपाध्याय, पूर्व महासचिव ओपी सिंह, पूर्व महासचिव रामशिरोमणि शुक्ला, पूर्व महासचिव जेबी सिंह, अशोक कुमार सिंह, एके ओझा, एससी उपाध्याय सहित अन्य अधिवक्ता उपस्थित थे। सभा का संचालन महासचिव प्रभाशंकर मिश्र ने किया।