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आयोग अध्यक्ष के खिलाफ सड़क पर हुजूम
ब्यूरो/अमर उजाला इलाहाबाद
Updated Wed, 15 Apr 2015 11:04 PM IST
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उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग अध्यक्ष के खिलाफ बुधवार को सड़क पर छात्रों और प्रतियोगियों का हुजूम उमड़ा। छात्रों के शांति मार्च के दौरान सुभाष चौराहा पर लाठीचार्ज के बाद स्थिति अनियंत्रित हो गई। इस दौरान पुलिस की ओर से फायरिंग भी हुई। इससे नाराज छात्रों ने सिविल लाइंस बस अड्डा समेत जगह-जगह तोड़फोड़ और आगजनी की। जवाब में पुलिस ने भी कई बार लाठीचार्ज किया तथा छात्रों को काफी दूर तक दौड़ाकर पीटा। तोड़फोड़ और आगजनी में रोडवेज की बसों के अलावा दर्जनों निजी चार पहिया वाहन क्षतिग्रस्त हो गए।
पुलिस की कार्रवाई में दर्जनों छात्रों और प्रतियोगियों को गंभीर चोट आई है। कई के हाथ और पैर भी टूट गए हैं। पत्थरबाजी और भगदड़ में कई राहगीरों को चोट लगी है। महात्मा गांधी मार्ग पर एक महिला तथा बच्चे को सिर में गंभीर चोट लग गई। अराजकता तथा छात्रों और पुलिस के बीच लुका-छिपी का यह माहौल देर शाम तक बना रहा। उधर, पुलिस ने बलपूर्वक विश्वविद्यालय छात्रसंघ भवन पर चल रहे छात्रों का आमरण अनशन तथा चंद्रशेखर आजाद पार्क में 10 दिन जारी एबीवीपी का धरना भी खत्म करा दिया।
पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा-2015 केदोनों पेपर निरस्त करने, आयोग के अध्यक्ष को हटाने तथा भर्तियों की सीबीआई जांच और पेपर लीक मामले की सीबीआई जांच की मांग को लेकर पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार छात्रों और प्रतियोगियों का इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ भवन पर जमावड़ा हुआ। भीड़ का अनुमान इससे ही लगाया जा सकता है कि छात्रसंघ भवन से मेयोहाल चौराहा तक छात्रों और प्रतियोगियों की लाइन लगी रही और आवागमन पूरी तरह से बंद रहा। विश्वविद्यालय पर उम्मीद से कहीं अधिक भीड़ को देखते हुए छात्रों का उत्साह बढ़ गया था तो प्रशासन की चिंता बढ़ गई।
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विश्वविद्यालय पर सभा के बाद तकरीबन साढ़े बारह बजे आयोग दफ्तर के लिए छात्रों के शांति मार्च की शुरुआत हुई। विश्वविद्यालय मार्ग होते हुए छात्र मनमोहन पार्क पहुंचे थे कि पुलिस ने रोक लिया। छात्र हिन्दू हॉस्टल की तरह से जाना चाहते थे लेकिन पुलिस के रोकने के बाद वे मेयोहाल की तरफ चल दिए। मेयोहाल चौराहा पर भारी संख्या में मौजूद फोर्स ने उन्हें वहां भी रोक दिया। कुछ देर के लिए छात्र वहीं धरने पर बैठ गए लेकिन वाटर कैनल से बौछार की तैयारी को देखते हुए वे फिर वापस होकर हिन्दू हॉस्टल की तरफ चले गए। पुलिस ने हिन्दू हॉस्टल पर रोका तो छात्र सिविल लाइंस की तरफ बढ़ गए और बस अड्डा होते हुए सुभाष चौराहा पहुंचे। इस दौरान छात्र और प्रतियोगी पूरी तरह से नियंत्रित रहे और एक पत्थर भी नहीं चला।
छात्रों ने सुभाष चौराहा को हर तरफ से घेर लिया और सड़क पर लेट गए। अभी पूरे छात्र सुभाष चौराहा पर पहुंचे भी नहीं थे कि इसी बीच पीवीआर की तरफ कुछ पुलिस आई और छात्रों पर लाठीचार्ज कर दी। छात्र अभी कुछ समझ पाते कि हर तरफ से पुलिस हरकत में आ गई। पुलिस ने फायरिंग भी की। इसके बाद छात्र चारों दिशा में भागे तो पुलिस ने भी उन्हें काफी दूर तक दौड़ाया। भागते समय छात्रों और प्रतियोगियों ने सड़क के किनारे खड़ी गाड़ियों में तोड़फोड़ की। इसमें दर्जनों वाहन के शीशे टूट गए।
भगदड़ में आमलोग को चोट भी आई। उन्होंने सिविल लाइंस बस अड्डा, नवाब युसूफ रोड आदि स्थानों पर कई बसों में जमकर तोड़फोड़ की। नाराज छात्रों ने बैंक रोड, अल्लापुर में एक बस में आग लगाने की कोशिश की। बेली अस्पताल के पास नगर निगम के कैटिल वैन में आग लगा दी, जिसमें उसका काफी हिस्सा जल गया। छात्रों ने शहर के कई अन्य हिस्सों में भी तोड़फोड़ तथा आगजनी की, जिसमें सरकारी संपत्ति के साथ आम नागरिकों के वाहनों भी नुकसान हुआ। पुलिस की लाठी तथा भगदड़ में कई छात्रों को गंभीर चोट पहुंची है। पुलिस की इस कार्रवाई से छात्रों और प्रतियोगियों में नाराजगी है।
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पुलिस की कार्रवाई में दर्जनों छात्रों और प्रतियोगियों को गंभीर चोट आई है। कई के हाथ और पैर भी टूट गए हैं। पत्थरबाजी और भगदड़ में कई राहगीरों को चोट लगी है। महात्मा गांधी मार्ग पर एक महिला तथा बच्चे को सिर में गंभीर चोट लग गई। अराजकता तथा छात्रों और पुलिस के बीच लुका-छिपी का यह माहौल देर शाम तक बना रहा। उधर, पुलिस ने बलपूर्वक विश्वविद्यालय छात्रसंघ भवन पर चल रहे छात्रों का आमरण अनशन तथा चंद्रशेखर आजाद पार्क में 10 दिन जारी एबीवीपी का धरना भी खत्म करा दिया।
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पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा-2015 केदोनों पेपर निरस्त करने, आयोग के अध्यक्ष को हटाने तथा भर्तियों की सीबीआई जांच और पेपर लीक मामले की सीबीआई जांच की मांग को लेकर पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार छात्रों और प्रतियोगियों का इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ भवन पर जमावड़ा हुआ। भीड़ का अनुमान इससे ही लगाया जा सकता है कि छात्रसंघ भवन से मेयोहाल चौराहा तक छात्रों और प्रतियोगियों की लाइन लगी रही और आवागमन पूरी तरह से बंद रहा। विश्वविद्यालय पर उम्मीद से कहीं अधिक भीड़ को देखते हुए छात्रों का उत्साह बढ़ गया था तो प्रशासन की चिंता बढ़ गई।
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विश्वविद्यालय पर सभा के बाद तकरीबन साढ़े बारह बजे आयोग दफ्तर के लिए छात्रों के शांति मार्च की शुरुआत हुई। विश्वविद्यालय मार्ग होते हुए छात्र मनमोहन पार्क पहुंचे थे कि पुलिस ने रोक लिया। छात्र हिन्दू हॉस्टल की तरह से जाना चाहते थे लेकिन पुलिस के रोकने के बाद वे मेयोहाल की तरफ चल दिए। मेयोहाल चौराहा पर भारी संख्या में मौजूद फोर्स ने उन्हें वहां भी रोक दिया। कुछ देर के लिए छात्र वहीं धरने पर बैठ गए लेकिन वाटर कैनल से बौछार की तैयारी को देखते हुए वे फिर वापस होकर हिन्दू हॉस्टल की तरफ चले गए। पुलिस ने हिन्दू हॉस्टल पर रोका तो छात्र सिविल लाइंस की तरफ बढ़ गए और बस अड्डा होते हुए सुभाष चौराहा पहुंचे। इस दौरान छात्र और प्रतियोगी पूरी तरह से नियंत्रित रहे और एक पत्थर भी नहीं चला।
छात्रों ने सुभाष चौराहा को हर तरफ से घेर लिया और सड़क पर लेट गए। अभी पूरे छात्र सुभाष चौराहा पर पहुंचे भी नहीं थे कि इसी बीच पीवीआर की तरफ कुछ पुलिस आई और छात्रों पर लाठीचार्ज कर दी। छात्र अभी कुछ समझ पाते कि हर तरफ से पुलिस हरकत में आ गई। पुलिस ने फायरिंग भी की। इसके बाद छात्र चारों दिशा में भागे तो पुलिस ने भी उन्हें काफी दूर तक दौड़ाया। भागते समय छात्रों और प्रतियोगियों ने सड़क के किनारे खड़ी गाड़ियों में तोड़फोड़ की। इसमें दर्जनों वाहन के शीशे टूट गए।
भगदड़ में आमलोग को चोट भी आई। उन्होंने सिविल लाइंस बस अड्डा, नवाब युसूफ रोड आदि स्थानों पर कई बसों में जमकर तोड़फोड़ की। नाराज छात्रों ने बैंक रोड, अल्लापुर में एक बस में आग लगाने की कोशिश की। बेली अस्पताल के पास नगर निगम के कैटिल वैन में आग लगा दी, जिसमें उसका काफी हिस्सा जल गया। छात्रों ने शहर के कई अन्य हिस्सों में भी तोड़फोड़ तथा आगजनी की, जिसमें सरकारी संपत्ति के साथ आम नागरिकों के वाहनों भी नुकसान हुआ। पुलिस की लाठी तथा भगदड़ में कई छात्रों को गंभीर चोट पहुंची है। पुलिस की इस कार्रवाई से छात्रों और प्रतियोगियों में नाराजगी है।