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High Court : कोर्ट को गुमराह करने वाले दो वकीलों को नोटिस, पूछा एक आदेश दो तरह के कैसे, क्यों न हो कार्रवाई
Sun, 29 Jan 2023 01:10 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sun, 29 Jan 2023 01:10 AM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आद्या प्रसाद तिवारी व प्रदीप कुमार पाण्डेय दो अधिवक्ताओं को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है कि किस वजह से एक ही केस के एक ही तिथि के दो तरह के आदेश दाखिल किए हैं।
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- फोटो : istock
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आद्या प्रसाद तिवारी व प्रदीप कुमार पाण्डेय दो अधिवक्ताओं को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है कि किस वजह से एक ही केस के एक ही तिथि के दो तरह के आदेश दाखिल किए हैं। क्यों न उ प्र बार काउंसिल को आपके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कहा जाय। कोर्ट ने एक अर्जी खारिज होने के बाद दूसरी अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल कर कपट करने वाले याची से अलग से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है कि क्यों न अभियोजित किया जाय। कोर्ट ने हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष व महासचिव को इन दोनों वकीलों के आचरण को देखते हुए क्या ऐक्शन हो ,सुझाव देने का अनुरोध किया है। अर्जी की सुनवाई 7 फरवरी को होगी।
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यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने संदीप कुमार बिष्णोई व 3अन्य की दूसरी बार दाखिल अग्रिम जमानत अर्जी की सुनवाई करते हुए दिया है। याचियों के खिलाफ मेरठ के सरधना थाने में आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत धोखाधड़ी,गबन के आरोप में एफ आई आर दर्ज की गई। याचियों ने अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल की कोर्ट ने निराधार मानते हुए अर्जी खारिज कर दी। उसमें दूसरी अर्जी दाखिल करने की कोई इजाजत नहीं दी गई थी।
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इसके बाद दूसरी बार यह अर्जी दाखिल की गई। जिसमें पहली अर्जी को वापस करते हुए खारिज करने का आदेश लगाया गया है। सरकारी वकील ने कोर्ट से कहा कि अर्जी के साथ कोर्ट का जो आदेश लगाया गया है वह उसकी पत्रावली से भिन्न है।इसपर कोर्ट ने पहली अर्जी के रिकार्ड मंगाये।एक ही व्यक्ति के नाम की अर्जी और एक ही तिथि के दो अलग अलग आदेश पाये गए। सुनवाई के दौरान याची के अधिवक्ता उपस्थित नहीं हुए।
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कोर्ट ने व्यावसायिक मानदंडों का जिक्र करते हुए कहा कि कोर्ट वकील की बहस पर भरोसा कर सम्मान करती है।बड़ी मुश्किल से वकीलों की बात पर अविश्वास करती है।एक ही तारीख के दो तरह के आदेश दाखिल करने की स्थिति बार और बेंच के बीच रिश्तों को प्रभावित करने वाली है। परंपरागत भरोसा व प्रोफेशनल सुरक्षा बनाए रखने के लिए वकीलों पर नैतिक आदर्श स्थापित करने का दायित्व है। इन वकीलों ने गैर जिम्मेदाराना व्यवहार किया है।