Magh Mela : 40 से ज्यादा डीएफएमडी, पांच ड्रोन से होगी निगरानी, संवेदनशील स्थानों पर लगेंगे ऑटोमेटिक डिटेक्टर
डीएफएमडी का उपयोग हर उस स्थान पर किया जाएगा, जो सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील है। हनुमान मंदिर से लेकर पांटून पुलों के एंट्री व एक्जिट प्वाइंट पर भी डीएफएमडी लगवाए जाएंगे।
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10 दिन बाद शुरू हो रहे माघ मेला में सुरक्षा के तगड़े इंतजाम किए जाएंगे। अत्याधुनिक ऑटिफिशयल इंटेलिजेंस तकनीक से लैस कैमरों से सर्विलांस के साथ ही श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए परंपरागत उपकरणों का भी इस्तेमाल किया जाएगा। मेला क्षेत्र में 40 से ज्यादा डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर(डीएफएमडी) लगाए जाएंगे। इसके अलावा पांच ड्रोन कैमरों का इस्तेमाल भी किया जाएगा।
डीएफएमडी का उपयोग हर उस स्थान पर किया जाएगा, जो सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील है। हनुमान मंदिर से लेकर पांटून पुलों के एंट्री व एक्जिट प्वाइंट पर भी डीएफएमडी लगवाए जाएंगे। हर डीएफएमडी के पास पुलिस की पिकेट तैनात रहेगी, जो डीएफएमडी अलार्म बजते ही संबंधित की जांच करेगी। पुलिस अफसरों का कहना है कि भीड़ अधिक होने की स्थिति में डीएफएमडी सुरक्षा के लिहाज से बेहद कारगर साबित होते हैं।
इसमें किसी भी व्यक्ति के पास संदिग्ध वस्तु जैसे मुख्यत: शस्त्र आदि होने पर अलार्म बजने लगता है और पुलिसकर्मी अलर्ट हो जाते हैं। इसके अलावा मेला क्षेत्र में तैनात बहुत से पुलिसकर्मियों को हैंड हेल्ड मेटल डिटेक्टर से भी लैस किया जाएगा। इससे किसी भी संदिग्ध की फौरन जांच की जा सकेगी। माघ मेला एसएसपी डॉ.राजीव नारायण मिश्र ने बताया कि सुरक्षा के संबंध में पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। इसमें आधुनिक तकनीक के साथ ही परंपरागत उपकरणों का भी इस्तेमाल किया जाएगा।
मुख्य पर्वों पर उड़ाए जाएंगे ड्रोन कैमरे
मेला क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था के मद्दनेजर जमीन के साथ ही आसमान से भी निगरानी की तैयारी है। इसके तहत ही ड्रोन कैमरों का इस्तेमाल करने का भी निर्णय लिया गया है। सूत्रों का कहना है कि संगम समेत अन्य क्षेत्रों में सतर्क निगाह बनाए रखने के लिए पांच ड्रोन कैमरों का इस्तेमाल होगा। इनका इस्तेमाल फिलहाल, मुख्य स्नान पर्वों पर ही करने की योजना है। हालांकि, मेले के सामान्य दिनों में भी जरूरत महसूस होने पर इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।
वर्षों पुराना ‘निगहबान’ भी होगा मुस्तैद
तकनीक आधारित सुरक्षा उपकरणों के साथ ही माघ मेले में वर्षों पुराने ‘निगहबान’ को एक बार फिर मुस्तैद किया जाएगा। मेला क्षेत्र में एक दर्जन से ज्यादा वॉच टॉवर भी बनाए जा रहे हैं। इन पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाएगी। वाॅच टॉवर से मेला क्षेत्र की निगरानी का तरीका बहुत पहले से उपयोग में लाया जा रहा है।