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Mahakumbh : महाकुंभ में शाही स्नान का ध्वजवाहक बनेगा जूना अखाड़ा, सबसे आगे करेगा स्नान

Mon, 07 Oct 2024 04:03 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 07 Oct 2024 04:03 PM IST
सार

सीएम के साथ संवाद से पहले शाही स्नान की परंपरा में बदलाव का निर्णय लिया गया। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और निरंजनी अखाड़े के सचिव महंत रवींद्र पुरी ने शाही स्नान की अगुवाई जूना अखाड़े को सौंपने का एलान किया।

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Mahakumbh: Juna Akhara will become the flag bearer of the royal bath in Mahakumbh, will take bath at the front
कुंभ मेला - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गंगा,यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम पर 13 जनवरी 2025 से आरंभ होने जा रहे महाकुंभ में शाही स्नान की परंपरा का ध्वजवाहक इस बार जूना अखाड़ा होगा। रविवार को परेड मैदान में सीएम योगी आदित्यनाथ की बैठक से पहले अखाड़ों में सर्व सम्मति से यह तय किया। 12 वर्ष बाद लगने वाले महाकुंभ में इस बार निरंजनी को सबसे आगे चलने का मौका दिया जाना था, लेकिन विश्व के सबसे बड़े संन्यासी पंरपरा वाले पंच दशनाम जूना अखाड़े को सबसे आगे स्नान करने की अनुमति प्रदान की गई।

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सीएम के साथ संवाद से पहले शाही स्नान की परंपरा में बदलाव का निर्णय लिया गया। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और निरंजनी अखाड़े के सचिव महंत रवींद्र पुरी ने शाही स्नान की अगुवाई जूना अखाड़े को सौंपने का एलान किया। परंपरा के अनुसार इस बार पड़ने वाले तीन शाही स्नानों में सबसे पहले देवता-निशान, अस्त्र-शस्त्र, सुसज्जित रथों, बग्घियों और अन्य तामझाम के साथ जूना अखाड़ा चलेगा।
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जूना अखाड़े के पीछे निरंजनी अखाड़ा और उसके बाद आनंद अखाड़े के संन्यासी संगम पर शाही स्नान के लिए पहुंचेंगे। इससे पहले सबसे आगे महानिर्वाणी अखाड़े के संन्यासी शाही स्नान के लिए निकलते थे। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष ने बताया कि इस बार बहुमत के आधार पर विश्व के सबसे बड़े संन्यासी अखाड़े के रूप में जूना अखाड़े को महाकुंभ में शाही स्नान के ध्वज वाहक के रूप में चुना गया है।

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इसके बाद महानिर्वाणी अखाड़े के संत शाही स्नान के लिए निकलेंगे। उनके साथ अटल अखाड़े के संत चलेंगे। इसी तरह सबसे अंत में उदासीन परंपरा के संतों को शाही स्नान के लिए चलने का क्रम निर्दारित किया गया है। इनमें सबसे आगे कौन सी उदासीन अनी परंपरा के संत चलेंगे, इसका निर्धारण उन पर ही छोेड़ दिया गया है।

अखाड़ा परिषषद के महामंत्री महंत हरि गिरि ने बताया कि इस बार सर्व सम्मति से जूना अखाड़े को शाही स्नान की परंपरा का ध्वज वाहक बनाया गया है। इसकी भव्यता के लिए अब से ही तैयारियां शुरू कर दी गई हैं, ताकि विश्व समुदाय के लिए संगम स्नान की परंपरहा अनुकरणीय और अविस्मरणीय बनाई जा सके। 

सभी परंपरा के संतों को महाकुंभ में करेंगे एकजुट

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी(मनसा देवी ट्रस्ट) ने कहा कि गृहमंत्री अमित शाह ने उन्हें सभी परंपरा के सतों को सनातन की रक्षा के लिए एकजुट करने और राष्ट्रव्यापी वातावरण बनाने के लिए कहा है। इसके लिए वह लगातार प्रयास कर रहे हैं। इस बार के महाकुंभ में इसके कई उदाहरण प्रस्तुत किए जाएंगे।इस बार दलित और ओबीसी संतों को भी प्रमुख पदों पर आसीन कराया जाएगा। ताकि संत समाज में आध्यात्मिक पदों पर भी समरसता का वातावरण बनाया जा सके।

सीएम को दी सीख, महाकुंभ की तैयारी को लेकर अफसरों के भरोसे न रहें

महाकुंभ की तैयारी बैठक में आनंद अखाड़े के स्वामी शंकरानंद सचिव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को आला अफसरों की मौजूदगी में सजग रहने की सीख दी। स्वामी शंकरानंद ने सीएम को कहा कि वह इस महाकुंभ की तैयारी को लेकर अफसरों के भरोसे कतई न रहें। अफसर उन्हें ऐन वक्त पर गच्चा दे सकते हैं और सरकार की बनी-बनाई छवि पर असर पड़ सकता है। इसलिए सीएम को चाहिए कि वह खुद महाकुंभ की तैयारियों को अपने स्तर से देखें और परखते रहें,ताकि किसी स्तर पर चूक न होने पाए। 

महाकुंभ में गुलामी के प्रतीक शब्दों को बदलने पर सीएम सहमत

महाकुंभ में शाही स्नान और पेशवाई जैसी परंपरा के साथ मुगलकालीन गुलामी के शब्दों को बदलने के लिए अखाड़ा परिषद के संतों ने सीएम के सामने सुझाव रखा। उनका कहना था कि हमारी सनातन संस्कृति में इस तरह के गुलामी के प्रतीक उर्दू के शब्दों के लिए जगह नहीं होनी चाहिए। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने इस पर जोर दिया। इस पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने सहमति जताई। उन्होंने कहा कि इस महाकुंभ में गुलामी के प्रतीक शब्द हटाए जाएंगे। इस पर आने वाली बैठक में निर्णय लिए जाने के संकेत दिए गए।

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