Mahakumbh 2025: 'राम' और 'लक्ष्मण' ने जीता सबका दिल, गुरु के लिए की पूरे देश की यात्रा
'राम-लक्ष्मण' पूरे देश की यात्रा कर चुके हैं। जहां भी इनके गुरु जाते हैं, उनको लाने और ले जाने का काम ये करते हैं। इस्कॉन के पंडाल में इनके लिए विशेष व्यवस्था की गई है। लोगों को इनके दर्शनों का लाभ रोज मिलता है।
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महाकुंभ की गलियां इस समय कई चमत्कार और हैरान करने वाली चीजों से पटी पड़ी हैं, जहां पर भी आपकी नजर जाएगी कुछ ऐसा देखने को मिलेगा जो सामान्य नहीं है। आज इस्कॉन मंदिर के कैंप में जाना हुआ जो सेक्टर -19 में स्थित है। यहां मेरी मुलाकात राम और लक्ष्मण से हुई। बैलों की इस जोड़ी ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा हुआ है। ये जहां भी जाते हैं पैदल ही जाते हैं। कुंभ में आने के लिए इन्होंने वृंदावन से प्रयागराज की यात्रा 45 दिन में पूरी की। अब ये अपने गुरु अभयचरणारविंद भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद की पालकी को कुंभ मेले में घुमाते नजर आ जाते है।
'राम-लक्ष्मण' पूरे देश की यात्रा कर चुके हैं, जहां भी इनके गुरु जाते हैं उनको लाने ले जाने का काम ये करते हैं। इस्कॉन के पंडाल में इनके लिए विशेष व्यवस्था की गई है। लोगों को इनके दर्शनों का लाभ रोज मिलता है। वहीं, मंदिर के एक कर्मचारी से पूछे जाने पर उसका कहना था कि इस तरह के बैल अब कम ही देखने को मिलते हैं। इनका विशेष ध्यान रखा जाता है, क्योंकि यह हमारे गुरु की सवारी को खींचने का काम करते हैं। इन बैलों की देखभाल भी भगवान की ही तरह की जाती है।
महाकुंभ जब तक चलेगा इन बैलों को यहीं रखा जाएगा। इसके बाद इन्हें हरियाणा जाना है, ये सफर भी यह पैदल ही तय करेंगे। देश में इस्कॉन के जहां-जहां मंदिर है, वहां इनका भ्रमण चलता रहता है। उनका मानना है कि गुरु की इन बैलों पर विशेष कृपा है। परिश्रम और विश्वसनीयता का प्रतीक बैलों को माना जाता है। इस्कॉन मंदिर में कई ऐसी झांकियां है जो आपका ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर लेंगी।
जैसे ही आप पंडाल में घुसते हैं तो सबसे पहले आपको हुनमान जी की एक बड़ी से प्रतिमा नजर आती है। इसके बाद आपको कृष्ण, राम और भगवान के अन्य स्वरूपों के दर्शन होते हैं। इन्हीं के बीच एक पंडाल बना है जहां पर राम और लक्ष्मण को रखा जाता है ताकि वो लोग उनके दर्शन कर सकें।