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कुंभ 2019: मकर संक्रांति पर स्नान का यह है सबसे बड़ा महत्व, पूर्वजों को भी मिलता है लाभ

Wed, 16 Jan 2019 11:39 AM IST
देव कश्यप ज्योतिषाचार्य आशुतोष वार्ष्णेय, प्रयागराज
ज्योतिषाचार्य आशुतोष वार्ष्णेय, प्रयागराज Published by: देव कश्यप Updated Wed, 16 Jan 2019 11:39 AM IST
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prayagraj kumbh mela 2019 Know Big importance of holy dip in sangam on Makar Sankranti
shahi snan

मकर संक्रांति के प्रथम स्नान महापर्व पर मंगलवार को गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम तट पर देश-दुनिया के हर कोने से आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा। प्रयागराज की सड़कें चारो तरफ श्रद्धा पथ में तब्दील हो गईं। देश-दुनिया भर से संतों, श्रद्धालुओं, पर्यटकों का सागर उमड़ा तो 5.50 किमी लंबे संगम तट पर कहीं तिल रखने भर की जगह नहीं बची।

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इस पर्व से जुड़ी आस्था और महत्व के बारे में अमर उजाला ने ज्योतिषाचार्य आशुतोष वार्ष्णेय से बात की, ज्योतिषाचार्य के अनुसार मकर स्नान अर्थात् मकर संक्रांति के दिन संगम स्नान, स्नानकर्ता के साथ उसके पूर्वजों का भी कल्याण एवं मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करता है। ज्योतिषाचार्य बताते हैं, सूर्य पिता हैं और शनि सूर्य के पुत्र हैं। मकर संक्रांति के दिन सूर्य अपने पुत्र शनि के घर अर्थात् मकर राशि में एक माह के लिए आते हैं।

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मकर संक्रांति सूर्य के राशि परिवर्तन का पर्व है, मकर राशि में सूर्य के आने से मकर संक्रांति का स्नान प्रारम्भ होता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मकर राशि शनि की राशि है जिसमें उनके पिता सूर्य एक माह के लिए आते हैं। ज्योतिषीय दृष्टि से सूर्य और शनि का तालमेल संभव नहीं है, लेकिन इस दिन सूर्य खुद अपने पुत्र के घर जाते हैं जिसके प्रभाव से मकर संक्रांति का स्नान नकारात्मकता को खत्म कर स्नान-दान, जप करने वाले का भाग्योदय करता है।

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अगर पुत्र अपने दिवंगत पिता के नाम का स्मरण कर त्रिवेणी संगम पर डुबकी लगाता है, तो शास्त्रों के अनुसार उसके पूर्वजों को उसका पुण्य फल मुक्ति के रूप में प्राप्त होता है। शास्त्रों के अनुसार स्नान करने वाले अगर अपने बन्धु-बान्धवों, माता-पिता जो किसी कारणवश तीर्थराज प्रयाग में नहीं आ पाएं हैं, उनका नाम स्मरण कर डुबकी लगाते हैं तो वह भी पुण्य के भागी बनते हैं। जहां मकर संक्रान्ति पूजा-पाठ, दान, व्रत आदि हेतु सर्वोत्तम पुण्यकाल है, वहीं सूर्य नारायण की पूजा संक्रान्ति पर्व पर सूर्य संक्रमण काल में विशेष दानादि करना चाहिए।

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सूर्य नारायण की पूजा एवं व्रत, सब प्रकार के पापों का क्षय, सब प्रकार की आधियों, व्याधियों का निवारण और सब प्रकार की हीनता अथवा संकोच का निपात होता है तथा हर प्रकार की सुख, सम्पत्ति, संतान और सहानुभूति की वृद्धि होती है। मकर संक्रान्ति के दान में काष्ठ और अग्नि के दान का विशेष महत्व है। संक्रान्ति काल में जो भी वस्तु दान की जाती है या कृत्य-कृत्यादि जो भी दिया जाता है सूर्य नारायण उसे जन्म जन्मान्तर प्रदान करते रहते हैं।

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