Mahakumbh: संवाद और समझ बढ़ाने का शक्तिशाली माध्यम है कीवा कुंभ, परमार्थ में पहुंचे पांच महाद्वीपों के आदिवासी
स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि महाकुंभ में दुनिया भर से आए जनजाति/आदिवासी नेताओं और श्रद्धालुओं ने धरती माता की प्रार्थना की जो पर्यावरण संरक्षण, पृथ्वी माता के सतत विकास, और मानवता की एकता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। कीवा में प्रज्वलित अग्नि एकता और साझा आस्था का प्रतीक है।
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परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि कीवा कुंभ अपने आप में एक अद्वितीय आयोजन है। यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि विश्वभर के विभिन्न देशों, संस्कृतियों, धरती माता और प्राकृतिक संसाधनों के बीच संवाद और समझ को बढ़ाने का एक शक्तिशाली माध्यम है। इस कुंभ में पांच महाद्वीपों से आए जनजाति समुदायों के नेताओं ने एक साथ संगम में स्नान किया।
बुधवार को चार दिवसीय कीवा कुंभ में विश्व के पांच महाद्वीपों से आदिवासी और जनजाति समुदायों के प्रमुख नेताओं ने हिस्सा लिया। स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि महाकुंभ में दुनिया भर से आए जनजाति/आदिवासी नेताओं और श्रद्धालुओं ने धरती माता की प्रार्थना की जो पर्यावरण संरक्षण, पृथ्वी माता के सतत विकास, और मानवता की एकता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। कीवा में प्रज्वलित अग्नि एकता और साझा आस्था का प्रतीक है।
मैक्सिको से आए हेनबर्टो विलासेनियर ने बताया कि कीवा का अर्थ है धरती माता का गर्भ। इस महोत्सव के माध्यम से हम यह संदेश देना चाहते हैं कि हम धरती माता की संतान होने के नाते हमें उसकी सुरक्षा, समृद्धि, और संतुलित विकास में अपनी भूमिका निभानी होगी।
आदिवासी नेता हेल्मुट किजेलमैन ने कहा कि कीवा कुंभ का प्रमुख उद्देश्य पंचमहाभूतों-पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश की प्रार्थना करना है, ताकि इन तत्वों के बीच संतुलन बना रहे और हमारे जीवन के लिए ये सभी तत्व संरक्षित रहें। साध्वी भगवती सरस्वती ने कहा कि कीवा कुंभ में आए नेताओं ने इस महोत्सव के माध्यम से एकता, प्रेम और समृद्धि की प्रार्थना की।
इन देशों से आए आदिवासी नेता
जर्मनी, मैक्सिको, ऑस्ट्रेलिया, कोलंबिया, बाली, पेरू, इटली, मंगोलिया, स्पेन, अर्जेंटीना, संयुक्त राज्य अमेरिका, पेरू, ग्रेट ब्रिटेन, जापान, ब्राजील, चिली, पुर्तगाल, नीदरलैंड्स, इक्वाडोर, फ्रांस, स्कॉटलैंड के प्रतिभागियों ने सहभागिता की।