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ईओडब्ल्यू को सौंपी गई करोड़ों की ठगी की जांच, सिविल लाइंस में पिछले साल दर्ज हुआ था केस
Tue, 22 Jun 2021 06:43 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Tue, 22 Jun 2021 06:43 AM IST
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जांच-सांकेतिक
- फोटो : अमर उजाला
सिविल लाइंस में रकम दोगुनी करने के नाम पर करोड़ों की ठगी मामले की जांच अब आर्थिक अपराध शाखा(ईओडब्ल्यू) करेगी। मामले की विवेचना में जुटी क्राइम ब्रांच ने सभी संबंधित दस्तावेज ईओडब्ल्यू को भेज दिए हैं। इस मामले में रियर इस्टेट कंपनी के निदेशक समेत पांच लोग नामजद कराए गए थे।
पिछले साल सितंबर में मामले की रिपोर्ट सोहबतियाबाग निवासी प्रकाश चंद तिवारी ने दर्ज कराई थी। इससे पहले मामले की शिकायत लेकर वह ठगी का शिकार हुए करीब डेढ़ दर्जन अन्य लोगों के साथ डीआईजी के पास पहुंचे थे। उनका आरोप था कि रकम दोगुना करने के नाम पर उनसे 28 लाख का निवेश कराया गया। इसी तरह अन्य लोगों से भी रुपये लिए गए। बताया गया कि कंपनी जमीन में रुपये लगाकर लाभ कमाती है और फिर इसी के जरिए निवेशकों को रकम दोगुना करकेदेती है। लेकिन निर्धारित अवधि बीत जाने के बाद भी रुपये नहीं लौटाए गए।
यही नहीं उसी जगह दूसरे नाम से कंपनी खोलकर अन्य लोगों के साथ फर्जीवाड़ा किया जा रहा है। मामले में राशिद नसीम, जसीम खां, आसिफ नफीस, नीरज श्रीवास्तव व जावेद इकबाल पर धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज किया गया था। ज्यादा रकम का मामला होने के कारण विवेचना क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई थी। हालांकि रकम करोड़ों में होने के चलते विवेचना ईओडब्ल्यू को से कराने की सिफारिश की गई थी। जिसकी मंजूरी मिल गई है। सीओ सिविल लाइंस सुधीर कुमार ने बताया कि विवेचना ईओडब्ल्यू से कराए जाने की अनुमति मिल गई है। संबंधित दस्तावेज ईओडब्ल्यू को सौंप दिए गए हैं।
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पिछले साल सितंबर में मामले की रिपोर्ट सोहबतियाबाग निवासी प्रकाश चंद तिवारी ने दर्ज कराई थी। इससे पहले मामले की शिकायत लेकर वह ठगी का शिकार हुए करीब डेढ़ दर्जन अन्य लोगों के साथ डीआईजी के पास पहुंचे थे। उनका आरोप था कि रकम दोगुना करने के नाम पर उनसे 28 लाख का निवेश कराया गया। इसी तरह अन्य लोगों से भी रुपये लिए गए। बताया गया कि कंपनी जमीन में रुपये लगाकर लाभ कमाती है और फिर इसी के जरिए निवेशकों को रकम दोगुना करकेदेती है। लेकिन निर्धारित अवधि बीत जाने के बाद भी रुपये नहीं लौटाए गए।
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यही नहीं उसी जगह दूसरे नाम से कंपनी खोलकर अन्य लोगों के साथ फर्जीवाड़ा किया जा रहा है। मामले में राशिद नसीम, जसीम खां, आसिफ नफीस, नीरज श्रीवास्तव व जावेद इकबाल पर धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज किया गया था। ज्यादा रकम का मामला होने के कारण विवेचना क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई थी। हालांकि रकम करोड़ों में होने के चलते विवेचना ईओडब्ल्यू को से कराने की सिफारिश की गई थी। जिसकी मंजूरी मिल गई है। सीओ सिविल लाइंस सुधीर कुमार ने बताया कि विवेचना ईओडब्ल्यू से कराए जाने की अनुमति मिल गई है। संबंधित दस्तावेज ईओडब्ल्यू को सौंप दिए गए हैं।
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