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हाईकोर्ट : अधिवक्ताओं पर रेप का फर्जी मुकदमा दर्ज कराने के मामले में कोर्ट में जांच रिपोर्ट पेश

Thu, 20 Oct 2022 10:28 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 20 Oct 2022 10:28 PM IST
सार

यह आदेश न्यायमूर्ति गौतम चौधरी ने निक्की देवी की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। मामले में प्रतिवादी अधिवक्ताओं का आरोप है कि वकीलों का एक गैंग हाईकोर्ट में सक्रिय है जो झूठे केस कर चार्जशीट दाखिल होने केबाद वापसी केनाम पर अभियुक्तों से धन उगाही कर बंटवारा करता है।

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Inquiry report presented in the court in the case of filing a fake case against the advocates
कोर्ट - फोटो : file photo

विस्तार

वकीलों के खिलाफ दुराचार के झूठे केस की वापसी के नाम पर धन उगाही के लिए मऊआइमा सहित प्रयागराज के विभिन्न थानों में दर्ज 46 मामलों की जांच रिपोर्ट बृहस्पतिवार को सीबीआई ने सीलबंद लिफाफे में कोर्ट को सौंप दी। साथ ही कोर्ट ने सुनवाई के दौरान प्रार्थनापत्र पर मामले में जांच कराने का निर्देश दिया है।

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यह आदेश न्यायमूर्ति गौतम चौधरी ने निक्की देवी की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। मामले में प्रतिवादी अधिवक्ताओं का आरोप है कि वकीलों का एक गैंग हाईकोर्ट में सक्रिय है जो झूठे केस कर चार्जशीट दाखिल होने केबाद वापसी केनाम पर अभियुक्तों से धन उगाही कर बंटवारा करता है। पीड़िता के अनुसूचित जाति का होने केकारण सरकार से भी धन मिलता है। 
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इस मामले में आरोप निर्मित हो चुका है। मामले में अकेले मऊआइमा थाने में 36 केस दर्ज हैं। आरोपी अधिवक्ता भूपेंद्र पांडेय ने कोर्ट को 51 आपराधिक केसों की सूची सौंपी थी। कोर्ट ने तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। कोर्ट के आदेश पर जांच करते हुए सीबीआई ने बृहस्पतिवार को सीलबंद लिफाफे में अपनी जांच रिपोर्ट सौंप दी।
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इस दौरान कई और अधिवक्ताओं ने पहुंचकर हस्तक्षेप अर्जी दाखिल कर कोर्ट को बताया कि उन्हें भी फर्जी तरीके से फंसाया गया है। कोर्ट ने ऐसे अधिवक्ताओं की अर्जी रिकॉर्ड पर लेते हुए मामले की सुनवाई के लिए छह फरवरी की तिथि लगा दी। सीबीआई की ओर से डिप्टी सॉलिसिटर जनरल ज्ञान प्रकाश तथा अनुराग सिंह ने पक्ष रखा। हाईकोर्ट की दूसरी खंडपीठ ने गोरखपुर के इसी तरह के मामले को भी इसी पीठ केसमक्ष भेज दिया है। हालांकि, कोर्ट ने अब तक गोरखपुर के मामले में कोई आदेश पारित नहीं किया है।

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