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रक्षा क्षेत्र में भारत अब निर्यातक की भूमिका में : डॉ. जितेंद्र सिंह
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केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पीएमओ डॉ. जितेंद्र सिंह ने मंगलवार को संगम नगरी में कहा कि भारत अब रक्षा के क्षेत्र में निर्णायक दौर में प्रवेश कर चुका है। युद्ध कौशल केवल शारीरिक शक्ति से नहीं बल्कि तकनीक, वास्तविक समय के डाटा सिस्टम और स्वचालित प्लेटफॉर्म से संचालित हो रहा है। बीते एक दशक में भारत दुनिया का बड़ा रक्षा आयातक होने की छवि को पीछे छोड़कर अब एक उभरते हुए निर्यातक के रूप में स्थापित हो चुका है।
न्यू कैंट के कोबरा ऑडिटोरियम में नार्थ टेक सिंपोजियम में डॉ. जितेंद्र सिंह ने आंकड़ों के जरिये रक्षा क्षेत्र की मजबूती को रेखांकित किया। बताया कि 10 वर्षों में देश का रक्षा उत्पादन 174 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 1.54 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। चौंकाने वाली प्रगति निर्यात के मोर्चे पर रही है। इसमें 34 गुना की बढ़ोतरी हुई है। वर्तमान में देश का रक्षा निर्यात 23,622 करोड़ रुपये के पार हो गया है। इसमें निजी क्षेत्र का योगदान लगभग 15 हजार करोड़ रुपये है। यह बदलाव रक्षा विनिर्माण में सरकार और निजी उद्यमियों के बीच बढ़ते सहयोग का जीवंत प्रमाण है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए रक्षा बजट में 9.5 प्रतिशत की वृद्धि कर इसे 6.81 लाख करोड़ रुपये किया गया है।
उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्वांटम तकनीक हमारी रक्षा तैयारियों का अभिन्न अंग बन गई हैं। भारत ने क्वांटम-सुरक्षित संचार क्षमताओं में पहले ही तेजी से प्रगति की है, जो आने वाले समय में युद्ध प्रणालियों की रीढ़ बनेगी। सेना के तीनों अंगों, उद्योग जगत और शोध संस्थानों के बीच तालमेल पर जोर दिया ताकि डिजाइन से लेकर सेना में तैनाती तक के समय को कम किया जा सके।
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रक्षा त्रिवेणी संगम में उमड़ा तकनीक का सैलाब
नार्थ टेक सिंपोजियम में 284 स्टालों पर अत्याधुनिक रक्षा प्रणालियों का प्रदर्शन किया जा रहा है। मंत्री ने इसका जायजा भी लिया। उन्हें बताया गया कि यहां एआई, अनमैन्ड सिस्टम (ड्रोन), काउंटर-ड्रोन तकनीक, रोबोटिक्स और साइबर युद्ध से जुड़ी प्रणालियों को प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया है।
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न्यू कैंट के कोबरा ऑडिटोरियम में नार्थ टेक सिंपोजियम में डॉ. जितेंद्र सिंह ने आंकड़ों के जरिये रक्षा क्षेत्र की मजबूती को रेखांकित किया। बताया कि 10 वर्षों में देश का रक्षा उत्पादन 174 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 1.54 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। चौंकाने वाली प्रगति निर्यात के मोर्चे पर रही है। इसमें 34 गुना की बढ़ोतरी हुई है। वर्तमान में देश का रक्षा निर्यात 23,622 करोड़ रुपये के पार हो गया है। इसमें निजी क्षेत्र का योगदान लगभग 15 हजार करोड़ रुपये है। यह बदलाव रक्षा विनिर्माण में सरकार और निजी उद्यमियों के बीच बढ़ते सहयोग का जीवंत प्रमाण है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए रक्षा बजट में 9.5 प्रतिशत की वृद्धि कर इसे 6.81 लाख करोड़ रुपये किया गया है।
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उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्वांटम तकनीक हमारी रक्षा तैयारियों का अभिन्न अंग बन गई हैं। भारत ने क्वांटम-सुरक्षित संचार क्षमताओं में पहले ही तेजी से प्रगति की है, जो आने वाले समय में युद्ध प्रणालियों की रीढ़ बनेगी। सेना के तीनों अंगों, उद्योग जगत और शोध संस्थानों के बीच तालमेल पर जोर दिया ताकि डिजाइन से लेकर सेना में तैनाती तक के समय को कम किया जा सके।
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रक्षा त्रिवेणी संगम में उमड़ा तकनीक का सैलाब
नार्थ टेक सिंपोजियम में 284 स्टालों पर अत्याधुनिक रक्षा प्रणालियों का प्रदर्शन किया जा रहा है। मंत्री ने इसका जायजा भी लिया। उन्हें बताया गया कि यहां एआई, अनमैन्ड सिस्टम (ड्रोन), काउंटर-ड्रोन तकनीक, रोबोटिक्स और साइबर युद्ध से जुड़ी प्रणालियों को प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया है।