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Prayagraj News: कैसे हो इलाज, जब चार साल से ओपीडी फार्मासिस्ट के भरोसे

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 23 Oct 2025 02:06 AM IST
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How can treatment be done when the OPD has been dependent on the pharmacist for four years?
कस्बे की स्वास्थ्य सेवाओं ध्वस्त है। लगभग 40 हजार की आबादी वाले कस्बे की पीएचसी में चार साल से ओपीडी में मरीजों का इलाज नहीं हुआ है। वहीं, आयुर्वेदिक और पशु अस्पताल को भी कस्बे से दूर स्थापित कर दिया गया।
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कस्बे की सबसे बड़ी समस्या नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का बदहाल होना है। केंद्र में पिछले चार वर्षों से बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) पूरी तरह बंद है। यह स्वास्थ्य केंद्र वर्तमान में केवल फार्मासिस्ट और एलटी के सहारे चल रहा है।
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यही हाल अन्य महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संस्थानों का भी है। लालगोपालगंज का दशकों पुराना राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल अब विस्थापित होकर नगर से दूर ग्रामसभा डहरपुर के सामुदायिक केंद्र में चला गया है। इसी प्रकार राजकीय पशु चिकित्सालय भी कस्बे से दूर अंधियारी ग्रामसभा में संचालित हो रहा है।
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पशुपालकों को अपने बीमार पशुओं के इलाज के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है। लोगों का आरोप है कि स्वास्थ्य सेवाओं का विस्थापन एक बड़ी साजिश का हिस्सा है जिससे निजी अस्पतालों और मेडिकल संचालकों को इसका लाभ मिल सके।
गंभीर मरीजों को प्रयागराज शहर जाना पड़ता है जिससे समय और धन दोनों बर्बाद होता है। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करना है लेकिन शासन का यह मिशन आम लोगों की पहुंच से दूर हो गया है। लोगों का कहना है कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों को इस जनसमस्या पर खास ध्यान देने की आवश्यकता है।


-- क्या कहते हैं जिम्मेदार-
-- जब मेरी जानकारी में आया कि पीएचसी में डॉक्टर नहीं है, तब ओपीडी शुरू कराने के लिए मैंने की तैनाती कराने की बात स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से कही थी। आयुर्वेदिक अस्पताल और पशु चिकित्सालय के विस्थापन पर भी जांच कराएंगे।

-- गुरु प्रसाद मौर्य विधायक फाफामऊ

-- यह केवल स्वास्थ्य का नहीं, कस्बे के विकास का मामला है। हमने पीएचसी की स्थिति सुधारने के लिए जनप्रतिनिधियों के समक्ष प्रस्ताव रखा है। मांग की है कि लालगोपालगंज को विशेष पैकेज देकर यहां पूर्णकालिक डॉक्टर की नियुक्ति की जाए। -- प्रदीप केसरवानी पूर्व चेयरमैन, लालगोपालगंज


-- लालगोपालगंज के साथ आसपास के सैंकड़ों गांवों की उपेक्षा की जा रही है। स्वास्थ्य सेवाओं का विस्थापन दुर्भाग्यपूर्ण है। पीएचसी में डाॅक्टर तो मिलते नहीं हैं, आयुर्वेदिक अस्पताल भी यहां से हट गया है। जिस वजह से निजी अस्पताल मालामाल हो रहे हैं। -- विनय अग्रवाल समाजसेवी, लालगोपालगंज



-- पीएचसी में डॉक्टर न होने से बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। जबकि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी इससे अवगत हैं, डाॅक्टर के अभाव में मरीजों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। -- मुख्तार अहमद पूर्व चेयरमैन लालगोपालगंज
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