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High court : मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट में हस्तक्षेप से इनकार
Tue, 04 Aug 2020 08:01 PM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Tue, 04 Aug 2020 08:01 PM IST
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इलाहाबाद उच्च न्यायालय
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2018 कांस्टेबल भर्ती के अभ्यर्थी द्वारा पुलिस भर्ती बोर्ड से इतर मेडिकल बोर्ड गठित कर उसका मेडिकल कराने की मांग नामंजूर कर दी है। कोर्ट ने कहा कि वैधानिक प्रक्रिया के तहत गठित मेडिकल बोर्ड एक विशेषज्ञ संस्था है।
इसके निर्णयों को महत्व दिया जाना चाहिए। जब तक कि मेडिकल बोर्ड के निष्कर्ष में लापरवाही या खामी स्पष्ट न होती हो अदालत इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकती है। कोर्ट ने कहा कि हालांकि अदालत के पास अनुच्छेद 226 में पर्याप्त अधिकार हैं, लेकिन मेडिकल बोर्ड के मामले में आदेश पारित करते समय अदालतों को बेहद सचेत रहने की आवश्यकता है।
कांस्टेबल भर्ती के अभ्यर्थी मनीष कुमार की अपील खारिज करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति पंकज मित्तल और न्यायमूर्ति डॉ. योगेंद्र कुमार श्रीवास्तव की पीठ ने दिया है। याची का कहना था कि पुलिस भर्ती बोर्ड द्वारा गठित मेडिकल बोर्ड ने उसे अनफिट करार दिया था।
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अपीलेट मेडिकल बोर्ड ने भी पहले बोर्ड के निष्कर्ष को सही माना है, जबकि प्राइवेट डॉक्टर की रिपोर्ट के अनुसार याची काम के लिए स्वस्थ और एकदम फिट है। इस मामले में एकल न्यायपीठ द्वारा याचिका खारिज होने के बाद उसे विशेष अपील में चुनौती दी गई थी।
खंडपीठ ने कहा कि जब तक वैधानिक रूप से गठित मेडिकल बोर्ड के निष्कर्ष में कोई गंभीर खामी स्पष्ट न हो, अदालत ऐसे मामलों में हस्तक्षेप नहीं कर सकती है। याची मेडिकल बोर्ड के निष्कर्ष में कोई अनियमितता नहीं बता सका है। प्राइवेट डॉक्टर की रिपोर्ट भी स्पष्ट नहीं है कि याची को कोई बीमारी थी अथवा नहीं।
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इसके निर्णयों को महत्व दिया जाना चाहिए। जब तक कि मेडिकल बोर्ड के निष्कर्ष में लापरवाही या खामी स्पष्ट न होती हो अदालत इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकती है। कोर्ट ने कहा कि हालांकि अदालत के पास अनुच्छेद 226 में पर्याप्त अधिकार हैं, लेकिन मेडिकल बोर्ड के मामले में आदेश पारित करते समय अदालतों को बेहद सचेत रहने की आवश्यकता है।
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कांस्टेबल भर्ती के अभ्यर्थी मनीष कुमार की अपील खारिज करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति पंकज मित्तल और न्यायमूर्ति डॉ. योगेंद्र कुमार श्रीवास्तव की पीठ ने दिया है। याची का कहना था कि पुलिस भर्ती बोर्ड द्वारा गठित मेडिकल बोर्ड ने उसे अनफिट करार दिया था।
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अपीलेट मेडिकल बोर्ड ने भी पहले बोर्ड के निष्कर्ष को सही माना है, जबकि प्राइवेट डॉक्टर की रिपोर्ट के अनुसार याची काम के लिए स्वस्थ और एकदम फिट है। इस मामले में एकल न्यायपीठ द्वारा याचिका खारिज होने के बाद उसे विशेष अपील में चुनौती दी गई थी।
खंडपीठ ने कहा कि जब तक वैधानिक रूप से गठित मेडिकल बोर्ड के निष्कर्ष में कोई गंभीर खामी स्पष्ट न हो, अदालत ऐसे मामलों में हस्तक्षेप नहीं कर सकती है। याची मेडिकल बोर्ड के निष्कर्ष में कोई अनियमितता नहीं बता सका है। प्राइवेट डॉक्टर की रिपोर्ट भी स्पष्ट नहीं है कि याची को कोई बीमारी थी अथवा नहीं।