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कुपोषण से लड़ने के नाम पर खिलवाड़
ब्यूरो/अमर उजाला इलाहाबाद
Updated Mon, 22 Dec 2014 01:53 AM IST
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इलाहाबाद। आंगनबाड़ी केंद्र सिर्फ सरकारी पैसा फूंकने के लिए बना दिए गए
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हैं। एक तरफ प्रशासन जिले में 99 नए आंगनबाड़ी केंद्रों को निर्माण करा रहा
है तो दूसरी ओर पुराने केंद्रों पर ताला लगता जा रह है। गत दिनों हुए
निरीक्षण के दौरान विभिन्न ब्लॉकों में 22 केंद्रों पर ताला लटकता मिला
जबकि वहां तैनात कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को नियमित रूप से मानदेय का
भुगतान किया जा रहा है। स्पष्ट है कि ऐसे आंगनबाड़ी केंद्रों में कुपोषण से
लड़ने के नाम सिर्फ खिलवाड़ और सरकारी पैसा बर्बाद करने काम किया जा रहा
है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जिले में 40 फीसदी से ज्यादा बच्चे कुपोषण के शिकार है। कुपोषण से लड़ने के लिए सरकार हर साल करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। अफसर गांवों को गोद ले रहे हैं। पूरा प्रशासनिक महकमा कुपोषण से लड़ने में लगा हुआ है और इन सबके बीच कुपोषण से लड़ाई में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले आंगनबाड़ी केंद्रों की हालत बदतर बनी हुई है। कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को नियमित रूप से मानदेय का भुगतान किया जा रहा है लेकिन केंद्रों का संचालन लगभग ठप है। कार्यकत्रियां और सहायिकाएं अक्सर नदारद रहती हैं, बच्चे भी नहीं पहुंचते और आंगनबाड़ी केंद्र पर ताला लगा रहता है। पिछले दिनों पांच ब्लॉकों में आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण कराया गया। इस दौरान उरुवा ब्लॉक में 15, प्रतापपुर में पांच और कौंधियारा एवं सोरांव ब्लॉक में एक-एक केंद्र बंद मिले।
सैदाबाद में केंद्र तो खुले मिले लेकिन वहां तीन कार्यकत्रियां और चार सहायिकाएं नदारद मिलीं। जिला कार्यक्रम अधिकारी जीडी यादव का कहना है कि इन मामलों में 36 आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और 45 सहायिकाओं को नोटिस जारी करते हुए उनका मानदेय रोक दिया गया है। अगर निरीक्षण में दोबारा अनुपस्थिति मिलीं तो इस बार उन्हें बर्खास्त कर दिया जाएगा।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जिले में 40 फीसदी से ज्यादा बच्चे कुपोषण के शिकार है। कुपोषण से लड़ने के लिए सरकार हर साल करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। अफसर गांवों को गोद ले रहे हैं। पूरा प्रशासनिक महकमा कुपोषण से लड़ने में लगा हुआ है और इन सबके बीच कुपोषण से लड़ाई में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले आंगनबाड़ी केंद्रों की हालत बदतर बनी हुई है। कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को नियमित रूप से मानदेय का भुगतान किया जा रहा है लेकिन केंद्रों का संचालन लगभग ठप है। कार्यकत्रियां और सहायिकाएं अक्सर नदारद रहती हैं, बच्चे भी नहीं पहुंचते और आंगनबाड़ी केंद्र पर ताला लगा रहता है। पिछले दिनों पांच ब्लॉकों में आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण कराया गया। इस दौरान उरुवा ब्लॉक में 15, प्रतापपुर में पांच और कौंधियारा एवं सोरांव ब्लॉक में एक-एक केंद्र बंद मिले।
सैदाबाद में केंद्र तो खुले मिले लेकिन वहां तीन कार्यकत्रियां और चार सहायिकाएं नदारद मिलीं। जिला कार्यक्रम अधिकारी जीडी यादव का कहना है कि इन मामलों में 36 आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और 45 सहायिकाओं को नोटिस जारी करते हुए उनका मानदेय रोक दिया गया है। अगर निरीक्षण में दोबारा अनुपस्थिति मिलीं तो इस बार उन्हें बर्खास्त कर दिया जाएगा।