फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Explosion in firecracker factory: The temperament of the gunpowder was not known and they were working

Kaushambi : पटाखा फैक्टरी में विस्फोट: बारूद के मिजाज का पता नहीं और काम कर रहे थे, हादसे के शिकार हो गए

Mon, 26 Feb 2024 03:20 PM IST
विनोद सिंह अमर उजला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 26 Feb 2024 03:20 PM IST
सार

भरवारी के वार्ड नंबर 23 एपीजे अब्दुल कलाम नगर के खल्लाबाद में पिछले करीब छह साल से यह फैक्टरी चल रही थी। पुराने बैरिया, अंबहा और चंपहा समेत आसपास के कई गांवों के करीब 22 लोग इसमें काम करते थे। अकेले अंबहा के लगभग सात लोग थे।

विज्ञापन
Explosion in firecracker factory: The temperament of the gunpowder was not known and they were working
पटाखा फैक्टरी में आग के बाद उठा धुएं का गुबार। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भरवारी की पटाखा फैक्टरी में हादसे के शिकार ज्यादातर लोग ऐसे थे, जिन्हें पटाखों की जानकारी नहीं थी। फिर भी वे काम कर रहे थे। मालिक जैसा बताते, वैसा ही करते थे। जनरेटर से निकली चिंगारी क्या कर सकती है, वे समझ न पाए।

विज्ञापन

भरवारी के वार्ड नंबर 23 एपीजे अब्दुल कलाम नगर के खल्लाबाद में पिछले करीब छह साल से यह फैक्टरी चल रही थी। पुराने बैरिया, अंबहा और चंपहा समेत आसपास के कई गांवों के करीब 22 लोग इसमें काम करते थे। अकेले अंबहा के लगभग सात लोग थे।

विज्ञापन

फैक्टरी में काम करने वाले रामनरेश ने बताया कि कारखाने के मालिक और कुछ चुनिंदा कामगार ही ऐसे रहे, जिन्हें पटाखा बनाने का अनुभव था। ज्यादातर लोग इससे पूरी तरह बेखबर थे। मालिक जिस तरह से काम करना बताते थे, वे उसी तरह करते थे। वह भी पहले मजदूरी ही करता था। तीन महीने पहले ही फैक्टरी में काम करना शुरू किया।

विज्ञापन
विज्ञापन

अंबहा के वीरेंद्र कुमार, शिवदानी व अन्य ग्रामीणों ने बताया कि फैक्टरी में काम करने वाले शिवाकांत पहले मुंबई में रहते थे। पांच साल पहले गांव आकर कारखाना जाने लगे थे। अशोक कुमार चार साल पहले चंडीगढ़ में गुटखे की दुकान करते थे। शिव नारायण ने कुछ महीने पहले मजदूरी छोड़कर फैक्टरी में काम शुरू किया था। रामभवन पुत्र पन्नालाल भी छह-सात महीने से पटाखा फैकटरी जाना शुरू किया था। पहले यह भी मजदूरी करके घर चला रहे थे।

शादी समारोह ने बचा ली मजदूरों की जान
 

आग का गोला बनी पटाखा फैकटरी से बचकर निकले रामनरेश ने बताया कि फैकटरी में लगभग 22 लोग काम करते हैं। इनमें 16 लोग ही रविवार को आए थे। चंपहा के रहने वाले अन्य पांच लोग नहीं आए थे। उनके गांव में शायद कोई शादी समारोह था। फैकटरी नहीं आने के कारण इनकी जान बच गई। अन्यथा, यह भी हादसे का शिकार हो जाते।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed