Kaushambi : पटाखा फैक्टरी में विस्फोट: बारूद के मिजाज का पता नहीं और काम कर रहे थे, हादसे के शिकार हो गए
भरवारी के वार्ड नंबर 23 एपीजे अब्दुल कलाम नगर के खल्लाबाद में पिछले करीब छह साल से यह फैक्टरी चल रही थी। पुराने बैरिया, अंबहा और चंपहा समेत आसपास के कई गांवों के करीब 22 लोग इसमें काम करते थे। अकेले अंबहा के लगभग सात लोग थे।
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भरवारी की पटाखा फैक्टरी में हादसे के शिकार ज्यादातर लोग ऐसे थे, जिन्हें पटाखों की जानकारी नहीं थी। फिर भी वे काम कर रहे थे। मालिक जैसा बताते, वैसा ही करते थे। जनरेटर से निकली चिंगारी क्या कर सकती है, वे समझ न पाए।
भरवारी के वार्ड नंबर 23 एपीजे अब्दुल कलाम नगर के खल्लाबाद में पिछले करीब छह साल से यह फैक्टरी चल रही थी। पुराने बैरिया, अंबहा और चंपहा समेत आसपास के कई गांवों के करीब 22 लोग इसमें काम करते थे। अकेले अंबहा के लगभग सात लोग थे।
फैक्टरी में काम करने वाले रामनरेश ने बताया कि कारखाने के मालिक और कुछ चुनिंदा कामगार ही ऐसे रहे, जिन्हें पटाखा बनाने का अनुभव था। ज्यादातर लोग इससे पूरी तरह बेखबर थे। मालिक जिस तरह से काम करना बताते थे, वे उसी तरह करते थे। वह भी पहले मजदूरी ही करता था। तीन महीने पहले ही फैक्टरी में काम करना शुरू किया।
अंबहा के वीरेंद्र कुमार, शिवदानी व अन्य ग्रामीणों ने बताया कि फैक्टरी में काम करने वाले शिवाकांत पहले मुंबई में रहते थे। पांच साल पहले गांव आकर कारखाना जाने लगे थे। अशोक कुमार चार साल पहले चंडीगढ़ में गुटखे की दुकान करते थे। शिव नारायण ने कुछ महीने पहले मजदूरी छोड़कर फैक्टरी में काम शुरू किया था। रामभवन पुत्र पन्नालाल भी छह-सात महीने से पटाखा फैकटरी जाना शुरू किया था। पहले यह भी मजदूरी करके घर चला रहे थे।
शादी समारोह ने बचा ली मजदूरों की जान
आग का गोला बनी पटाखा फैकटरी से बचकर निकले रामनरेश ने बताया कि फैकटरी में लगभग 22 लोग काम करते हैं। इनमें 16 लोग ही रविवार को आए थे। चंपहा के रहने वाले अन्य पांच लोग नहीं आए थे। उनके गांव में शायद कोई शादी समारोह था। फैकटरी नहीं आने के कारण इनकी जान बच गई। अन्यथा, यह भी हादसे का शिकार हो जाते।