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मां के लिए सुसाइड नोट छोड़ विवाहिता ने खुदकुशी
अमर उजाला ब्यूरो इलाहाबाद
Updated Wed, 25 Jan 2017 01:10 AM IST
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शहर के राजरूपपुर इलाके में शादी के तीसरे ही महीने सुमन दुबे (19) ने फांसी लगा ली। सुमन ने मां के नाम एक पत्र लिखकर छोड़ा था। बहन से मिलने भाई ससुराल पहुंचा तो खुदकुशी की जानकारी हुई। घर में कोहराम मच गया। सुसाइड नोट में सुमन ने घरवालों से अपने इस कदम के लिए माफी मांगी है। उसने अंत में लिखा है कि जिससे वह दूर रहना चाहती है, वही उसके सामने है। अब खुदकुशी के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है। मायके वालों का आरोप है कि उसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया जा रहा था।
कौशांबी जिले में रमसहाईपुर पंइसा निवासी रावेंद्र पांडेय की मौत हो चुकी है। उनके तीन बेटियों और एक बेटे में दूसरे नंबर की बेटी सुमन बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा थी। 24 नवंबर 2016 को उसका ब्याह प्रतापगढ़ जिले के मांधाता इलाके में पहाड़पुर निवासी लेखपाल हर्षनाथ दुबे के बेटे सौरभ दुबे के साथ हुआ था। हर्षनाथ राजरूपपुर में मकान बनाकर सपरिवार रहते हैं। सौरभ एलएलबी का छात्र है। सुमन कई दिनों से मायके वालों से बात नहीं कर रही थी। इससे परेशान होकर सोमवार रात कौशांबी से बड़ा भाई दिलीप बहन सुमन की ससुराल राजरूपपुर पहुंच गया। हर्षनाथ उसे घर के बाहर मिल गए। सुमन की सास पड़ोसी के यहां पूजा में गई थी।
हर्षनाथ उसे लेकर बहन से मिलाने उसके कमरे तक गए। दरवाजा अंदर से बंद था। बुलाने के बाद दरवाजा नहीं खुला तो फाटक तोड़ा गया। अंदर कमरे में सुमन का शव साड़ी के सहारे फांसी से झूल रहा था। फंदा काटकर सुमन को नीचे उतारा गए। उसे पास के निजी अस्पताल ले गए। डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। पोस्टमार्टम में फांसी से मौत की बात सामने आई। एक सुसाइड नोट भी मिला है। भाई दिलीप का आरोप है कि शादी के बाद से ससुराल वाले वाशिंग मशीन न देने और बारातियों का स्वागत ढंग से न करने को लेकर प्रताड़ित कर रहे थे।30 दिसंबर को पति ने पीटा था। तब दिलीप रिश्तेदारों के साथ आया था। पंचायत के बाद समझा बुझा दिया गया था।
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क्या लिखा
सुमन ने सुसाइड नोट में अपनी मौत के लिए किसी को साफ तौर पर जिम्मेदार नहीं ठहराया है। सुसाइड नोट को पढ़ने के बाद लगता है कि वह कई महीने से परेशान थी। जिसके चलते यह कदम उठाया।
सुसाइड नोट में लिखा है कि, मम्मी मेरी इतनी क्षमता नहीं की और बर्दाश्त कर सकूं। शालिनी से कहना अब कोई तकलीफ नहीं है। मम्मी मैनें आप लोगों को बहुत तकलीफ दी। मैं आप लोगों से बिना पूछे यह कदम उठा रही हूं। इसके सिवा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा था। बाबा ने भी बोल दिया था। अब मेरे लिए उस घर के रास्ते बंद थे। मैं यह बोझ ज्यादा दिन लेकर नहीं रह सकती। जिससे दूर रहना चाहती थी। वही मेरे सामने है। अंशु, मोहिनी, शालिनी, मम्मी, भईया मुझे माफ करना।
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कौशांबी जिले में रमसहाईपुर पंइसा निवासी रावेंद्र पांडेय की मौत हो चुकी है। उनके तीन बेटियों और एक बेटे में दूसरे नंबर की बेटी सुमन बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा थी। 24 नवंबर 2016 को उसका ब्याह प्रतापगढ़ जिले के मांधाता इलाके में पहाड़पुर निवासी लेखपाल हर्षनाथ दुबे के बेटे सौरभ दुबे के साथ हुआ था। हर्षनाथ राजरूपपुर में मकान बनाकर सपरिवार रहते हैं। सौरभ एलएलबी का छात्र है। सुमन कई दिनों से मायके वालों से बात नहीं कर रही थी। इससे परेशान होकर सोमवार रात कौशांबी से बड़ा भाई दिलीप बहन सुमन की ससुराल राजरूपपुर पहुंच गया। हर्षनाथ उसे घर के बाहर मिल गए। सुमन की सास पड़ोसी के यहां पूजा में गई थी।
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हर्षनाथ उसे लेकर बहन से मिलाने उसके कमरे तक गए। दरवाजा अंदर से बंद था। बुलाने के बाद दरवाजा नहीं खुला तो फाटक तोड़ा गया। अंदर कमरे में सुमन का शव साड़ी के सहारे फांसी से झूल रहा था। फंदा काटकर सुमन को नीचे उतारा गए। उसे पास के निजी अस्पताल ले गए। डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। पोस्टमार्टम में फांसी से मौत की बात सामने आई। एक सुसाइड नोट भी मिला है। भाई दिलीप का आरोप है कि शादी के बाद से ससुराल वाले वाशिंग मशीन न देने और बारातियों का स्वागत ढंग से न करने को लेकर प्रताड़ित कर रहे थे।30 दिसंबर को पति ने पीटा था। तब दिलीप रिश्तेदारों के साथ आया था। पंचायत के बाद समझा बुझा दिया गया था।
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क्या लिखा
सुमन ने सुसाइड नोट में अपनी मौत के लिए किसी को साफ तौर पर जिम्मेदार नहीं ठहराया है। सुसाइड नोट को पढ़ने के बाद लगता है कि वह कई महीने से परेशान थी। जिसके चलते यह कदम उठाया।
सुसाइड नोट में लिखा है कि, मम्मी मेरी इतनी क्षमता नहीं की और बर्दाश्त कर सकूं। शालिनी से कहना अब कोई तकलीफ नहीं है। मम्मी मैनें आप लोगों को बहुत तकलीफ दी। मैं आप लोगों से बिना पूछे यह कदम उठा रही हूं। इसके सिवा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा था। बाबा ने भी बोल दिया था। अब मेरे लिए उस घर के रास्ते बंद थे। मैं यह बोझ ज्यादा दिन लेकर नहीं रह सकती। जिससे दूर रहना चाहती थी। वही मेरे सामने है। अंशु, मोहिनी, शालिनी, मम्मी, भईया मुझे माफ करना।