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तीन किलो बारूद से मची थी तबाही
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Fri, 09 Oct 2015 01:51 AM IST
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इलाहाबाद। नैनी के पंजाबी हाता में मंगलवार सुबह तीन किलो बारूद ने तबाही मचा दी थी। विस्फोट के बाद दो दिन तक फरारी काटने वाले मनोज गुप्ता उर्फ सलीम ने पूछताछ के दौरान पुलिस को यह जानकारी दी कि तीन किलो बारूद से पटाखा बनाया जा रहा था तभी लापरवाही के चलते यह भयानक हादसा हो गया। उसने ही यह भी बताया कि मकान मालिक का साला भी पटाखा बनाने में जुटा था इसलिए वह भी जान गंवा बैठा। मनोज ने तीनों शव की शिनाख्त कर ली। पूछताछ के बाद उसे नैनी पुलिस ने बृहस्पतिवार को जिला अदालत में पेश किया जहां से उसे जेल भेज दिया गया।
पंजाबी हाता में सगे भाइयों ब्रहमानंद तिवारी और रामानंद तिवारी के तीन मंजिला मकान में मंगलवार को हुए धमाके ने पूरे इलाके को हिला दिया था। आधा से ज्यादा मकान ढह गया और बाकी भी गिर सकता है। आसपास के भी कई मकानों को नुकसान पहुंचा। मलबे से चौबीस घंटे में तीन युवकों की लाश मिली। घटना के बाद से मकान मालिक रामानंद तिवारी की पत्नी दुर्गा उर्फ पिंकी के साथ फरार किराएदार मनोज गुप्ता उर्फ सलीम को पुलिस ने बुधवार शाम बमरौली में पकड़ा था।
दुर्गा और मनोज से थाने के खास कक्ष में पुलिस अधिकारियों ने पूछताछ की तो उसने कई राज बेनकाब किए। मनोज ने बताया कि उसने नैनीताल में जिस मुस्लिम युवती रानी से ब्याह किया, उसके भी खानदान का पेशा पटाखा बनाकर बेचना ही था। उसने भी यही धंधा अपना लिया। इलाहाबाद आकर भी वह पटाखा का ही कारोबार करता रहा। मनोज ने बताया कि छह साल पहले नैनीताल में पटाखा बनाते समय हुए धमाके में उसके सास-ससुर समेत चार लोगों की जान चली गई थी। उसके दो पुत्रों में बड़ा सरताज तो बीएससी की पढ़ाई कर रहा है लेकिन छोटा महताब भी पटाखा के धंधे से जुड़ गया था।
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साल भर पहले वह नैनी के पंजाबी हाता में रामानंद के मकान में आकर टिका तो नैनीताल से महताब भी उसके पास आ गया। वह भी उसके साथ पटाखा बनाने लगा था। दीवाली करीब थी इसलिए कुछ दिन पहले चौक से पांच किलो बारूद लाकर वह बेटे महताब के साथ पटाखा तैयार करने में जुटा था। महताब ने ही बरेली के बहेड़ी से तस्लीम उर्फ समीर समेत दो कारीगरों को बुलाया था।
वे दो किलो बारूद से पटाखा बनाकर सप्लाई कर चुके थे। मंगलवार को तीन किलो बारूद बचा था। सुबह से वह महताब और दोनों बाहरी कारीगरों के साथ पटाखा बांध रहा था। मकान मालिक रामानंद का साला चंदन भी मौजूद था। करीब दस बजे बिजली कटने पर वह महताब से यह कहकर बाथरूम चला गया कि अब माल समेट दो। वह बाथरूम के भीतर गया तभी जबरदस्त धमाका हो गया। उसे शक है कि बारूद की बोरी उठाकर दूसरी जगह रखते समय शायद हाथ से छूटी जिसकी वजह से तबाही मची। अधिवक्ता शशिरिष श्रीवास्तव ने बताया कि पुलिस ने मनोज उर्फ सलीम का चालान धारा 304, 286 और 4/5 विस्फोटक अधिनियम में किया। सीजेएम कोर्ट ने मनोज को न्यायिक हिरासत में जेल भेजने का आदेश दिया।
पुलिस ने बुधवार रात मनोज उर्फ सलीम को पोस्टमार्टम हाऊस ले जाकर मकान के मलबे में तीनों शव दिखाए थे। उसने ही शवों की पहचान अपने बेटे महताब, मकान मालिक के साले चंदन तिवारी और बरेली में बहेड़ी के तस्लीम उर्फ समीर के रूप में की थी। चंदन का एक हाथ इस धमाके में उड़ गया। इस बाबत मनोज का कहना था कि संभव है कि उसने ही बारूद भरी बोरी उठाकर रखने की कोशिश की मगर उसके हाथ से बोरी छूटने पर ऐसा विस्फोट हो गया। मनोज के मुताबिक, बेरोजगारी के चलते चंदन सुल्तानपुर से यहां आ गया था।
पुलिस ने धमाके के बाद नंबर जुटाकर नैनीताल में मनोज उर्फ सलीम की पत्नी रानी से फोन पर संपर्क किया था। हालांकि उसे यह नहीं बताया कि धमाके में महताब की मौत हो गई है। पुलिस ने रानी से कहा कि घर में धमाका हो गया है जिसके बाद से सलीम और महताब फरार हैं। पुलिस के कई बार फोन करने पर भी रानी नैनीताल से आने को राजी नहीं हुई। मनोज उर्फ सलीम की गिरफ्तारी के बाद फिर पुलिस ने रानी को फोन किया। बृहस्पतिवार को भी फोन पर बातचीत के बाद रानी का बड़ा पुत्र सरताज शाम को रिश्तेदार के साथ फोर व्हीलर गाड़ी से इलाहाबाद को रवाना हो गया। उसके अनुरोध पर बृहस्पतिवार को भी रानी को यह नहीं बताया गया कि महताब की मौत हो गई। उसे फरारी के बारे में ही बताया गया है। दूसरे मृतक चंदन के शव का बृहस्पतिवार को पोस्टमार्टम हो गया जबकि तीसरे मृतक समीर का भी शव उसके परिजनों को इंतजार में रखा है।
नैनी के मकान में पटाखा बांधते समय हुए धमाके ने दीवाली से पहले पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों की आंखें खोल दी हैं। जनपद में हर साल दीवाली से पहले पटाखा बनाते समय धमाके होते रहे हैं। पिछले दस साल के दौरान पटाखा बांधने के दौरान हुए विस्फोट में दो दर्जन से ज्यादा लोगों की अकाल मौत हो चुकी है। दर्जन भर से ज्यादा लोग जिंदगी भर के लिए विकलांगता का दंश झेलने को मजबूर हो गए। नैनी की घटना के बाद बृहस्पतविार को जिला प्रशासन की ओर से भी सभी थानेदारों को आगाह किया कि वे अपने इलाके में पटाखा कारोबार से जुड़े लोगों से संपर्क कर सुनिश्चित कर लें कि बना लाइसेंस के कोई पटाखा नहीं बनाने पाए और सुरक्षा से जुड़े सभी इंतजाम भी रहें।
एसपी सिटी राजेश यादव ने भी शहर के चौक इलाके और उससे सटे मुहल्ले में पटाखा कारोबार से जुड़े लोगों को चेताया कि सुरक्षा के सभी मानकों का ख्याल रखा जाए। बिना अनुमति पटाखा बनाने और बेचने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। करीब महीने भर बाद दीवाली है इसलिए अभी से पटाखा कारोबारी बड़ी मात्रा में पटाखा तैयार करने में जुट गए हैं। जल्दबाजी और लापरवाही के चलते हर साल जानलेवा हादसे होते हैं। चार साल पहले मऊआइमा में पटाखा बनाते समय हुए धमाके में नौ लोगों को मौत हो गई थी और एक दर्जन लोग जख्मी हुए थे। मऊआइमा में अब तक करीब बीस लोग ऐसे धमाकों का शिकार हो चुके हैं। शहर के चौक इलाके से सटे मुहल्ले में भी पटाखा बनाते समय दस साल पहले हुए विस्फोट में तीन लोगों की मौत हो गई थी।
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पंजाबी हाता में सगे भाइयों ब्रहमानंद तिवारी और रामानंद तिवारी के तीन मंजिला मकान में मंगलवार को हुए धमाके ने पूरे इलाके को हिला दिया था। आधा से ज्यादा मकान ढह गया और बाकी भी गिर सकता है। आसपास के भी कई मकानों को नुकसान पहुंचा। मलबे से चौबीस घंटे में तीन युवकों की लाश मिली। घटना के बाद से मकान मालिक रामानंद तिवारी की पत्नी दुर्गा उर्फ पिंकी के साथ फरार किराएदार मनोज गुप्ता उर्फ सलीम को पुलिस ने बुधवार शाम बमरौली में पकड़ा था।
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दुर्गा और मनोज से थाने के खास कक्ष में पुलिस अधिकारियों ने पूछताछ की तो उसने कई राज बेनकाब किए। मनोज ने बताया कि उसने नैनीताल में जिस मुस्लिम युवती रानी से ब्याह किया, उसके भी खानदान का पेशा पटाखा बनाकर बेचना ही था। उसने भी यही धंधा अपना लिया। इलाहाबाद आकर भी वह पटाखा का ही कारोबार करता रहा। मनोज ने बताया कि छह साल पहले नैनीताल में पटाखा बनाते समय हुए धमाके में उसके सास-ससुर समेत चार लोगों की जान चली गई थी। उसके दो पुत्रों में बड़ा सरताज तो बीएससी की पढ़ाई कर रहा है लेकिन छोटा महताब भी पटाखा के धंधे से जुड़ गया था।
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साल भर पहले वह नैनी के पंजाबी हाता में रामानंद के मकान में आकर टिका तो नैनीताल से महताब भी उसके पास आ गया। वह भी उसके साथ पटाखा बनाने लगा था। दीवाली करीब थी इसलिए कुछ दिन पहले चौक से पांच किलो बारूद लाकर वह बेटे महताब के साथ पटाखा तैयार करने में जुटा था। महताब ने ही बरेली के बहेड़ी से तस्लीम उर्फ समीर समेत दो कारीगरों को बुलाया था।
वे दो किलो बारूद से पटाखा बनाकर सप्लाई कर चुके थे। मंगलवार को तीन किलो बारूद बचा था। सुबह से वह महताब और दोनों बाहरी कारीगरों के साथ पटाखा बांध रहा था। मकान मालिक रामानंद का साला चंदन भी मौजूद था। करीब दस बजे बिजली कटने पर वह महताब से यह कहकर बाथरूम चला गया कि अब माल समेट दो। वह बाथरूम के भीतर गया तभी जबरदस्त धमाका हो गया। उसे शक है कि बारूद की बोरी उठाकर दूसरी जगह रखते समय शायद हाथ से छूटी जिसकी वजह से तबाही मची। अधिवक्ता शशिरिष श्रीवास्तव ने बताया कि पुलिस ने मनोज उर्फ सलीम का चालान धारा 304, 286 और 4/5 विस्फोटक अधिनियम में किया। सीजेएम कोर्ट ने मनोज को न्यायिक हिरासत में जेल भेजने का आदेश दिया।
पुलिस ने बुधवार रात मनोज उर्फ सलीम को पोस्टमार्टम हाऊस ले जाकर मकान के मलबे में तीनों शव दिखाए थे। उसने ही शवों की पहचान अपने बेटे महताब, मकान मालिक के साले चंदन तिवारी और बरेली में बहेड़ी के तस्लीम उर्फ समीर के रूप में की थी। चंदन का एक हाथ इस धमाके में उड़ गया। इस बाबत मनोज का कहना था कि संभव है कि उसने ही बारूद भरी बोरी उठाकर रखने की कोशिश की मगर उसके हाथ से बोरी छूटने पर ऐसा विस्फोट हो गया। मनोज के मुताबिक, बेरोजगारी के चलते चंदन सुल्तानपुर से यहां आ गया था।
पुलिस ने धमाके के बाद नंबर जुटाकर नैनीताल में मनोज उर्फ सलीम की पत्नी रानी से फोन पर संपर्क किया था। हालांकि उसे यह नहीं बताया कि धमाके में महताब की मौत हो गई है। पुलिस ने रानी से कहा कि घर में धमाका हो गया है जिसके बाद से सलीम और महताब फरार हैं। पुलिस के कई बार फोन करने पर भी रानी नैनीताल से आने को राजी नहीं हुई। मनोज उर्फ सलीम की गिरफ्तारी के बाद फिर पुलिस ने रानी को फोन किया। बृहस्पतिवार को भी फोन पर बातचीत के बाद रानी का बड़ा पुत्र सरताज शाम को रिश्तेदार के साथ फोर व्हीलर गाड़ी से इलाहाबाद को रवाना हो गया। उसके अनुरोध पर बृहस्पतिवार को भी रानी को यह नहीं बताया गया कि महताब की मौत हो गई। उसे फरारी के बारे में ही बताया गया है। दूसरे मृतक चंदन के शव का बृहस्पतिवार को पोस्टमार्टम हो गया जबकि तीसरे मृतक समीर का भी शव उसके परिजनों को इंतजार में रखा है।
नैनी के मकान में पटाखा बांधते समय हुए धमाके ने दीवाली से पहले पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों की आंखें खोल दी हैं। जनपद में हर साल दीवाली से पहले पटाखा बनाते समय धमाके होते रहे हैं। पिछले दस साल के दौरान पटाखा बांधने के दौरान हुए विस्फोट में दो दर्जन से ज्यादा लोगों की अकाल मौत हो चुकी है। दर्जन भर से ज्यादा लोग जिंदगी भर के लिए विकलांगता का दंश झेलने को मजबूर हो गए। नैनी की घटना के बाद बृहस्पतविार को जिला प्रशासन की ओर से भी सभी थानेदारों को आगाह किया कि वे अपने इलाके में पटाखा कारोबार से जुड़े लोगों से संपर्क कर सुनिश्चित कर लें कि बना लाइसेंस के कोई पटाखा नहीं बनाने पाए और सुरक्षा से जुड़े सभी इंतजाम भी रहें।
एसपी सिटी राजेश यादव ने भी शहर के चौक इलाके और उससे सटे मुहल्ले में पटाखा कारोबार से जुड़े लोगों को चेताया कि सुरक्षा के सभी मानकों का ख्याल रखा जाए। बिना अनुमति पटाखा बनाने और बेचने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। करीब महीने भर बाद दीवाली है इसलिए अभी से पटाखा कारोबारी बड़ी मात्रा में पटाखा तैयार करने में जुट गए हैं। जल्दबाजी और लापरवाही के चलते हर साल जानलेवा हादसे होते हैं। चार साल पहले मऊआइमा में पटाखा बनाते समय हुए धमाके में नौ लोगों को मौत हो गई थी और एक दर्जन लोग जख्मी हुए थे। मऊआइमा में अब तक करीब बीस लोग ऐसे धमाकों का शिकार हो चुके हैं। शहर के चौक इलाके से सटे मुहल्ले में भी पटाखा बनाते समय दस साल पहले हुए विस्फोट में तीन लोगों की मौत हो गई थी।